Loksabha Election 2024: RLD के 12 लोकसभा सीटों के दावे से जयंत-अखिलेश में बनेगा 36 का आंकड़ा ?
लोकसभा चुनाव के लिहाज से यूपी सबसे अहम राज्य है। सबसे अधिक 80 सीटें यूपी में ही है इसलिए सभी दल अभी से यूपी की सियासत में अपनी गोटियां बिछाने में जुट गए हैं।
Jayant CHaudhary-Akhilesh Yadav: देश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले यूपी की सियासत में गरमाहट आ गई है। यूपी चूंकि देश का सबसे बड़ा राज्य है और सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें यूपी में ही हैं। इसलिए सभी दलों के एजेंडे में यूपी सबसे उपर रहता है। लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे अखिलेश यादव की टेंशन बढ़ रही है क्योंकि विधानसभा चुनाव में उनके सहयोगी रही राष्ट्रीय लोकदल 12 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारी का दावा ठोक रही है।
आरएलडी का दावा पड़ेगा अखिलेश पर भारी
जानकारों की माने तो आरएलडी का यह दावा अखिलेश पर भारी पड़ सकता है। हालांकि अखिलेश को इस बात का एहसास है कि रालोद क्यों इस तरह की डिमांड कर रही है और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। लेकिन क्या अखिलेश 12 लोकसभा सीटों पर समझौता करेंगे यह बड़ा सवाल है। उधर आरएलडी का दावा है कि उसने उन्हीं सीटों पर अपनी तैयारी शुरू की है जहां उसकी पार्टी का अच्छा खासा जनाधार है।

12 लोकसभा सीटों पर आरएलडी का दावा
पश्चिमी यूपी आरएलडी का गढ़ है और जिन 12 सीटों पर वह चुनाव लड़ना चाहती है उनमें कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, फतेहपुर सीकरी, मथुरा और बागपत शामिल हैं।
निकाय चुनाव में सीटों को लेकर पैदा हुए मतभेद
दरअसल सपा और आरएलडी के बीच संबंध हाल ही में तनावपूर्ण हो गए हैं। खासकर शहरी स्थानीय निकाय चुनावों पर असहमति के बाद से ही। रालोद प्रमुख जयंत चौधरी 23 जून को पटना में आयोजित विपक्षी एकता बैठक में शामिल नहीं हुए और उन्होंने अंतिम समय में इसकी घोषणा की।
आरएलडी का क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा छिना
आरएलडी ने इस साल अप्रैल में क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा समाप्त हो गया था क्योंकि वह 2022 के विधानसभा चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों में कम से कम 6% वोट पाने में विफल रही। ये दोनों चुनाव रालोद ने एसपी के साथ गठबंधन में लड़े।
2022 विधानसभा चुनाव में आठ सीटें जीती थी रालोद
आरएलडी ने पिछले साल के विधानसभा चुनावों में कुल 403 सीटों में से 33 पर चुनाव लड़ा था और 2.85% वोट शेयर के साथ 8 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। पिछले साल दिसंबर में खतौली विधानसभा सीट पर उपचुनाव जीतने के बाद इसकी संख्या फिलहाल 9 है। वहीं 2019 के लोकसभा चुनावों में आरएलडी ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 1.69% वोट शेयर के साथ एक भी सीट नहीं जीत सकी थी।
आरएलडी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने वनइंडिया हिन्दी को बताया कि,
हम लोकसभा चुनाव में 12 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। हम इस पर सपा के वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा करेंगे। यह हमारा लक्ष्य है ताकि हम क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा वापस पा सकें। आरएलडी ने 2022 के चुनाव जीतने के लिए कई सीटों का बलिदान किया था ताकि "यूपी में बदलाव लाया जा सके" और गठबंधन जारी रखा जा सके। लेकिन अब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष का मानना है कि हमें 12 सीटों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ना है।
सपा के साथ गठबंधन का RLD को हुआ फायदा
हालांकि आरएलडी के इस दावे पर वरिष्ठ सपा नेताओं का कहना है कि रालोद की अपनी शिकायतें हो सकती हैं लेकिन उसे अभी भी अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी। आरएलडी ने 2022 में 33 सीटों पर चुनाव लड़ा और 8 सीटें जीतीं। उनका एकमात्र समर्थन आधार जाट वोट बैंक है। हमारे साथ गठबंधन करने से उन्हें फायदा हुआ क्योंकि तब मुसलमानों ने पार्टी का समर्थन किया था। उन्हें यह भी देखना चाहिए कि सपा ने उन्हें उनका हक दिलाने का काम किया है।
2004 लोकसभा चुनाव में आरएलडी ने जीती 3 सीटें
रालोद पश्चिम की जिन 12 जाट बाहुल्य सीटों की डिमांड कर रही है वहां अच्छी पकड़ होने का दावा वह कर रही है। पिछले लोकसभा चुनावों के परिणामों पर नजर डालें तो 2004 में रालोद के पिता अजीत सिंह ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन तीन ही सांसद जिता पाए।
2009 लोकसभा में बीजेपी के सहयोग से जीती 6 सीटें
वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में रालोद ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और उसको 6 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इसके बाद 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के आगे आरएलडी अपना खाता भी नहीं खोल पाई और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह को भी हार का मुंह देखना पड़ा था।












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