Loksabha 2024: रामपुर-आज़मगढ़ की तरह घोसी में भी अखिलेश का खेल बिगाड़ेंगी मायावती?

यूपी के मऊ में घोषी सीट पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी ने जहां दारा सिंह को टिकट दिया है वहीं दूसरी ओर सपा ने सुधाकर सिंह को मैदान में उतारा है।

Ghoshi By Election: देश में अगले साल लोकसभा चुनाव होना है। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर सबकी नजरें बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्नलेषकों की माने तो यह देखना दिलचस्प होगा कि मायावती घोषी में अपना उम्मीदवार उतारती हैं या रामपुर और आजमगढ़ की तरह यहां भी वह सपा के मुखिया अखिलेश यादव का खेल बिगाड़ेंगी।

मायावती

मायावती बिगाड़ेंगी सपा का खेल?

बसपा के सूत्रों की माने तो अभी साफतौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है कि मायावती घोषी में उम्मीदवार उतारेंगी या नहीं। मायावती यहां भी आजमगढ़ और रामपुर वाला फार्मूला अपना सकती है। राजनीतिक जानकार राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि घोषी का परिणाम बहुत कुछ मायावती के कदम पर निर्भर करेगा। चूंकि 17 अगस्त को नामांकन का अंतिम दिन है इसलिए उसके बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी।

रामपुर लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव में नहीं उतारा उम्मीदवार

इससे पहले रामपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मायावती ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा इसका फायदा बीजेपी को मिला और गैर मुस्लिम वोटर बीजेपी के पक्ष में लामबंद हो गए। बीजेपी ने यहां आजम को हारकर भगवा परचम लहराने में कामयाबी हासिल की थी। इसी तरह रामपुर सदर सीट पर आजम के बेटे के अब्दुल्ला आजम के खिलाफ भी मायावती ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा जिससे बीजेपी ने लंबे समय बाद गढ़ जीतने में सफलता हासिल कर ली।

आजमगढ़ में भी उम्मीदवार उतारकर अखिलेश का किया नुकसान

इसी तरह आजमगढ़ में हुए लोकसभा के उपचुनाव में मायावती की रणनीति की वजह से ही सपा को शिकस्त खानी पड़ी। आजमगढ़ में बीजेपी ने दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को टिकट दिया था। सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने इस हाइप्रोफाइल सीट पर अपने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा था। यहां बीजेपी और सपा के बीच कांटे की टक्कर थी। लेकिन अंत में मायावती के एक कदम से सपा की उम्मीदों पर पानी फिर गया था।

मायावती के कदम से बीजेपी की जीत का रास्ता हुआ साफ

दरअसल मायावती ने आजमगढ़ के उपचुनाव में अखिलेश की रणनीति को भांपते हुए गुड्‌डू जमाली को मैदान में उतार दिया। सपा को उम्मीद थी कि वह आजमगढ़ में यादव और मुस्लिम वोट बैंक के सहारे बीजेपी को कड़ी टक्कर देने में कामयाब होगी लेकिन मायावती के दांव से सपा चित्त हो गई। गुड्‌डू जमाली ने मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई जिससे बीजेपी की जीत का रास्ता साफ हो गया था।

आजमगढ़-रामपुर जैसा दांव खेल सकती हैं बसपा सुप्रीमो

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो घोषी में भी मायावती कुछ वैसा ही दांव खेल सकती हैं लेकिन अभी उन्होंने पत्ते नहीं खोले हैं। मायावती का कदम ही बहुत कुछ यहां के सियासी समीकरण तय करेगा। बसपा यदि अपना उम्मीदवार नहीं उतारती है तो दलितों का वोट तो बीजेपी की तरफ जा सकता है लेकिन मुस्लिम वोट बैंक सपा के पास जाने का खतरा रहेगा। लेकिन यदि मायावती अपना उम्मीदवार उतारती हैं तो यहां की लड़ाई पूरी तरह से त्रिकोणीय होने की उम्मीद है।

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