Lok Sabha Election: रायबरेली में बीजेपी से इस बार कहां कमजोर पड़ रही है कांग्रेस?
Rae bareli Lok Sabha Election News: यूपी की रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में दो दशकों बाद चुनाव का सीन बदल चुका है। कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह सीट छोड़ने की घोषणा करके बेहद दिलचस्प मुकाबले का रास्ता तैयार कर दिया है।
गांधी-नेहरू परिवार की गढ़ माने जाने वाली इस सीट को जीतने का बीजेपी का सपना अबतक अधूरा ही रहा है। 2019 में पार्टी को अमेठी में तो जीत का स्वाद मिल चुका है। लेकिन, अबकी बार रायबरेली जीतने पर पूरा दम लगा रही है।

दलित-ब्राह्मण वोटरों को साधने वाला बीजेपी का दांव!
18 लाख मतदाताओं वाली यूपी की रायबरेली लोकसभा सीट में 34% सिर्फ दलित वोटर हैं। इनके अलावा 13-14% ब्राह्मण वोटर बताए जाते हैं; बीजेपी ने इस बार दोनों को ही अपने पक्ष में करने का दांव चला है।
27 फरवरी को राज्यसभा चुनाव में ऊंचाहार विधानसभा के सपा विधायक मनोज पांडे ने क्रॉस-वोटिंग करके बीजेपी के आठवें उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित की थी। पांडे ब्राह्मण हैं और इलाके में ब्राह्मण समाज में उनका काफी प्रभाव माना जाता है।
मतलब, बीजेपी ने न सिर्फ पांडे के सहारे राज्यसभा चुनाव में एक अतिरक्त सीट जीती है, बल्कि वे उसके लिए रायबरेली लोकसभा सीट में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
करीब 6 लाख दलित वोटर तय करेंगे रायबरेली का विजेता
लेकिन, भाजपा का असली टारगेट दलित वोट बैंक है। 6 लाख से ज्यादा दलित मतदाताओं वाली रायबरेली लोकसभा सीट पर अकेले लगभग 4.5 लाख पासी मतदाता हैं। बीजेपी की इस वोट बैंक पर पहले से नजर रही है।
4.5 लाख पासी वोटर के पास चुनाव की चाबी!
इसी वजह से पिछले साल बीजेपी ने बुद्धिलाल पासी को रायबरेली का जिलाध्यक्ष बनाया था। पासी जाति दलित है और रायबरेली में इनकी आबादी दलितों की कुल जनसंख्या का करीब दो-तिहाई है।
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी नेता पासी ने कहा है, 'मैं पासी समाज से आता हूं और आश्वस्त कर सकता हूं कि यह समाज अकेले ही बीजेपी को इस सीट से जीत दिलाने के लिए काफी होगा।'
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उन्होंने कहा, 'परंपरागत रूप से पासी समाज का किसी भी एक पार्टी की ओर झुकाव नहीं रहा है। लेकिन, केंद्र की कल्याणकारी योजना से समाज को फायदा मिल रहा है और उन्हें इसके बारे में जागरूक करने और अधिक से अधिक दलित समाज के लोगों को योजनाओं से जोड़ने के लिए हम लाभार्थी सम्मेलन और लाभार्थी संपर्क अभियान भी करवा रहे हैं। पिछले 6 महिने में पूरे संगठन ने अपने प्रयास बढ़ा दिए हैं।'
रायबरेली में 10 वर्षों में 34% बढ़ गया बीजेपी का वोट
उन्हें लगता है कि अगर मनोज पांडे भाजपा में शामिल हो गए तो कांग्रेस के ब्राह्मण वोट में भी पलीता लगना तय है। अगर 2014 और 2019 के चुनाव परिणामों की तुलना करें तो बीजेपी को वोट शेयर करीब 17% बढ़कर यह 38.35% हो गया है। 10 वर्षों में यह 34% की बढ़ोतरी है।
कांग्रेस का लगातार साफ होता जा रहा है जनाधार
लेकिन, एक दशक में कांग्रेस के वोट शेयर में करीब 17% की गिरावट हो चुकी है। 2019 में तो सपा और बसपा दोनों ने ही कांग्रेस की उम्मीदवार सोनिया गांधी के पक्ष में उम्मीदवार नहीं उतारे थे, फिर भी 2014 के मुकाबले उनके वोट शेयर में लगभग 8% की गिरावट आ गई थी।
रायबरेली में हुई तरक्की से भी भाजपा के हौसले बुलंद
भाजपा नेताओं का कहना है कि अबकी बार जातिगत समीकरण उसके पक्ष में होने के साथ ही सरकार की ओर से हुए विकास के काम का भी उसे फायदा मिलगा। पिछले हफ्ते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायबरेली में एम्स का उद्घाटन किया है।
वहीं केंद्रीय सड़क परिवहन और राजपथ मंत्री नितिन गडकरी ने रायबरेली जिले में 4,142 करोड़ रुपए की 8 नेशनल हाइवे परियोजनाओं का उद्घाटन किया है।
मतलब, एक तरफ रायबरेली में कांग्रेस का लगातार घटता आधार और दूसरी तरफ भाजपा के बढ़ते जनाधार के साथ-साथ जातिगत समीकरण और विकास योजनाओं की अगर जुगलबंदी बिठाने में पार्टी सफल हो जाती है तो कांग्रेस के लिए इस बार रायबरेली में भी गेम बिगड़ने की स्थिति पैदा हो सकती है।












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