Lok Sabha Election: चिराग पासवान कोई नया गुल खिलाएंगे या 2020 फिर से दोहराएंगे?

Bihar Lok Sabha Election News: बिहार में नीतीश कुमार के एनडीए में आने से बीजेपी का खेमा जितना ही उत्साहित था, उसके बाद से चिराग पासवान की दूरी से उसपर पानी फिरता नजर आ रहा है। राज्य में एनडीए में अबतक सीटें फाइनल नहीं हो पाई हैं और चिराग अलग ही तेवर दिखा रहे हैं।

चिराग पासवान कोई नया विकल्प तलाशने के मूड में रहे हैं, इसकी अटकलें 10 मार्च को उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से 'जन आशीर्वाद महासभा' के आयोजन की वजह से लग रही हैं।

chirag paswan

'जन आशीर्वाद महासभा' में क्या घोषणा करेंगे चिराग?
इस रैली का आयोजन वैशाली के साहेबगंज में किया गया है और चर्चा है कि यहां चिराग कुछ बड़ी घोषणा कर सकते हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि इस कार्यक्रम के लिए जो पोस्टर जारी किए गए हैं, उसमें पीएम मोदी समेत एनडीए के किसी भी नेता की तस्वीर नहीं है।

नीतीश के एनडीए में आने के बाद चिराग के साथ भाजपा का सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, इन अटकलों को खुद उन्हीं की वजह से हवा मिल रही है।

पीएम मोदी के मंच से भी गायब रहे चिराग
बुधवार को भी बेतिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से वे नदारद थे। इससे पहले भी 2 मार्च को औरंगाबाद और बेगूसराय में पीएम मोदी की सभा में खुद को उनका 'हनुमान' बताने वाले चिराग नहीं दिखे थे।

पीएम मोदी की नीतियों की जमकर की तारीफ
एक तरफ वैशाली में 10 मार्च के चिराग पासवान के कार्यक्रम का एलजेपी (पासवान) जोरदार प्रचार कर रही है, वहीं 6 मार्च यानी बुधवार को खुद चिराग ने एक्स पर एक पोस्ट लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों की जमकर सराहना की है।

चिराग ने नीति आयोग की रिपोर्ट में देश के 114 आकांक्षी जिलों में जमुई को पहला स्थान मिलने की जानकारी देकर मोदी सरकार की तमाम योजनाओं का गुणगान किया है।

उन्होंने लिखा है, 'देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की ओर से जनहित में लागू की गई मुद्रा लोन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जनधन खाता योजना और बैंक खाता में आधार सीडिंग के मामले में जमुई ने रिकॉर्ड उपलब्धि हासिल की है।'

आरजेडी से मिल रहा है चिराग को बड़ा ऑफर!
लेकिन, तथ्य यह भी है कि पहले एक बयान में यह भी कह चुके हैं कि आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से उनके अच्छे रिश्ते हैं। अब राजद की ओर से उन्हें महागठबंधन में शामिल होने का ऑफर मिलने तक की बात सामने आ रही है।

चर्चा है कि अगर चिराग तेजस्वी के साथ जाने को तैयार हो गए तो उन्हें बिहार से लेकर यूपी तक इंडिया ब्लॉक की ओर से 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका दिया जा सकता है। इसमें बिहार में 6+2 के अलावा यूपी में भी 2 सीटें।

एनडीए में अभी तक तय नहीं हुआ सीट-शेयरिंग का फॉर्मूला
बिहार में एनडीए दलों के बीच सीट-शेयरिंग का फॉर्मूला अबतक तय नहीं हो पाने का एक प्रमुख कारण एलजेपी के दोनों गुटों में दावेदारी को लेकर जारी तकरार को माना जा रहा है। जहां चिराग पासवान खेमे की ओर से पिछली बार की तरह 6 सीटों की दावेदारी की बातें सामने आ रही हैं।

वहीं उनके चाचा पशुपति कुमार पारस की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी किसी भी सूरत में 5 से कम पर हथियार डालने को तैयार नहीं है, यह भी अटकलें हैं।

लेकिन, इन सबके बीच हाजीपुर लोकसभा सीट सबसे बड़े विवाद की वजह बना हुआ है। यहां से पारस सांसद हैं, लेकिन चिराग इसे अपने पिता रामविलास पासवान की बिरासत मानते हैं।

नीतीश के साथ सियासी अदावत में फंस गया एनडीए का पेच?
चिराग पासवान की असली सियासी अदावत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ही रही है। उन्होंने जेडीयू सुप्रीमो के साथ अभी तक मंच साझा नहीं किया है।

जब अप्रत्याशित रूप से नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़कर फिर से एनडीए में शामिल हुए तो चिराग ने इतना भर कहा था कि मुद्दों के आधार पर उनका विरोध जारी रहेगा।

2020 के चुनाव में चिराग ने क्या किया था?
यह भी तथ्य है कि जब नीतीश कुमार पिछली बार पलटी मारकर लालू यादव के शरण में चले गए थे तो उन्होंने बीजेपी पर यही आरोप लगाया था कि उसने चिराग पासवान की पार्टी को हथियार बनाकर 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू की सीटें कम करवा दी थी।

तब नीतीश कुमार के साथ मतभेदों की वजह से ही चिराग पासवान की पार्टी एनडीए से अलग चुनाव लड़ी थी, लेकिन उन्होंने कभी भी भाजपा या प्रधानमंत्री मोदी को निशाना नहीं बनाया।

नीतीश का आरोप था कि एलजेपी ने जानबूझकर उनकी सीटों पर भाजपा के लोगों को ही टिकट दिया था, जिससे जेडीयू तीसरे नंबर की पार्टी बन गई।

अभी जिस तरह से चिराग पासवान के जो तेवर दिख रहे हैं, उससे यही लग रहा है कि वह कुछ तो अलग करने की सोच रहे हैं। लेकिन, उनका अगला कदम क्या होगा, वे इंडिया ब्लॉक का हिस्सा बनना पसंद करेंगे या फिर 2020 वाली राजनीति करेंगे? वैसे 2020 में एलजेपी को सिर्फ 1 ही सीट मिली थी। लेकिन, वोट शेयर जरूर 10% से ज्यादा रहा था।

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