Lok Sabha Election: मैनपुरी सीट क्यों है सपा के सिर का ताज? BJP भी इस सीट के लिए व्याकुल
Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव को लेकर अब कुछ ही महीने बाकी हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी बिसात बिछाने में लगे हैं। इसी कड़ी में, मंगलवार को समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने 16 प्रत्याशियों के नाम पहली सूची कर दी।
इसमें 'मैनपुरी' सीट (Mainpuri seat) का ध्यान सभी ने अपनी ओर केंद्रित किया। आखिर करे भी क्यों न, इस सीट पर सपा अजय रही है। पिछले दो बार के लोकसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकने के बाद भी सपा के सिर का ताज कहे जाने वाली मैनपुरी सीट बीजेपी अपनी झोली नहीं ला सकी।
सपा ने इस बार भी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को चुनावी रण में उतारा है। भले ही यह सीट सपा का गढ़ हो लेकिन, इस बार विजय पताका फहराना सपा के लिए आसान नहीं लग रहा। क्योंकि, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के जरिए घर-घर राम ज्योति प्रज्वलित कराकर अपनी गौरव गाथा पहंचाते हुए रणनीति पर काम किया है। आइए जानते हैं क्यों है यह सीट सपा के लिए सिर का ताज?

'मैनपुरी' सीट समाजवादी पार्टी के लिए बेहद खास रही है। यहीं से सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने लोकतंत्र के मंदिर का रास्ता तय किया। साल 1996 के बाद से लगातार सपा का ही इस पर कब्जा रहा। 2004 में मुलायम ने मैनपुरी लोकसभा सीट छोड़ी तो भतीजे धर्मेंद्र यादव को रण में उतारा। मैनपुरी में मुलायम का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोलता था। इसलिए हमेशा से सपा अजय रही है। 'मैनपुरी लोकसभा सीट' समाजवादी पार्टी के लिए एक अभेद किला के रूप में जाना जाता है।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव इस सीट से पांच बार सांसद बने थे। साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन, उसके बाद भी सपा के सिर से मैनपुरी के ताज को नहीं छीन सकी।
2022 के उपचुनाव में भी सपा की जीत
खास बात तो यह है कि मुलायम सिंह के निधन के बाद साल 2022 के अंत में इस सीट पर उप चुनाव कराए गए। इस बार बीजेपी ने दोबारा जमीन-आसमान एक कर दिया। सपा के इस अभेद किला को भेदने के लिए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ दो बार रैली करने पहुंचे। यहां तक की केशव प्रसाद मौर्य ने डेरा डाल दिया। लेकिन, हमेशा की तरह सपा ने बाजी मार ली और डिंपल यादव फिर से सांसद बनने सफल हुईं।
मैनपुरी सीट पर मिले बिछड़े दिल!
इस सीट पर सपा का दबदबा कायम रहे इसलिए अखिलेश यादव ने साल 2022 के उप चुनाव में अपने चाचा शिवपाल यादव से सारे गिले-शिकवे दूर किए। माना जाता है कि इस सीट को लेकर दोनों के दिलों में आई दूरियां कम हुई और सपा का कुनबा फिर एक हो गया। इस सीट के सहारे सैफई परिवार की कई पीढ़ियां संसद तक पहुंची हैं।
मैनपुरी सीट सपा का गढ़
1996 में मैनपुरी लोकसभा सीट मुलायम सिंह यादव ने पहला चुनाव लड़ा। मुलायम के मैनपुरी सीट छोड़ने के बाद पौत्र तेजप्रताप यादव को उप चुनाव में उतारा और जीत हासिल की। 2004 में सीट छोड़ने पर मुलायम ने भतीजे धर्मेंद्र यादव को रण में उतारा। जीत हासिल की। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी मुलायम ने मैनपुरी सीट झटकी। 2015 में मुलायम की भतीजी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या उर्फ बेबी यादव जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। इसी तरह सैफई परिवार के यह सीट दिल्ली तक के रास्ते और चुनावी धरातल पर उतरने की सीढ़ी बनती रही।












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