Lok Sabha Election 2024: यूपी की देवरिया सीट पर टिकट बदल सकती है BJP, ये है प्रमुख वजह? सर्वे में खुलासा
Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है। पूरे देश के साथ उत्तर प्रदेश में भी सात चरणों में मतदान होगा। ऐसे में बीजेपी ने यूपी की ज्यादातर सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। वहीं इंडिया गठबंधन के दल सपा और कांग्रेस भी अपनी तैयारियों में जुटी है। इस बीच खबर आ रही है कि देवरिया सीट पर टिकट को लेकर भाजपा पुनर्विचार कर सकती है।
यूपी में लोकसभा चुनाव के लिए बची सीटों पर भाजपा का मंथन जारी है। जल्द ही पार्टी की ओर से बाकी बचे प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाई जा सकती है। खबरों की मानें तो आने वाली 18 मार्च तक बीजेपी यूपी की एक और लिस्ट जारी कर सकती है। जिसमें अपने नाम को लेकर कई मौजूदा सांसदों की सांसे अटकी हुई हैं। कहा जा रहा है कि वर्तमान सांसदों के टिकट को लेकर बीजेपी पुनर्विचार कर सकती है।

जिन सीटों को लेकर पार्टी पुनर्विचार कर सकती है, उस लिस्ट में देवरिया लोकसभा सीट का भी नाम है। ऐसे में सूत्रों के हवाले से खबर है कि देवरिया से बीजेपी सांसद रमापति राम त्रिपाठी को लेकर संशय है।
एक सर्वे ने इस पर मुहर लगाई है। जनता का मूड (Janta Ka Mood) के एक सर्वे में इसका खुलासा हुआ है कि भाजपा का गढ़ कहे जाना वाला, जहां से लगातार दो बार बीजेपी उम्मीदवार ने भारी जीत दर्ज की है। वहां के लोकसभा मतदाताओं में भारी असंतोष है।
दरअसल, जनता का मूड उन लोकसभा सीटों पर सर्वे के जरिए लोगों की नब्ज टटोलने की कोशिश में जुटा है, जहां मौजूदा सांसदों को कमजोर स्थानों के रूप में पहचाना है। देवरिया में सर्वे से पता चलता है कि यहां के मतदाता मौजूदा सांसद रमापति राम त्रिपाठी से नाखुश हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे के लिए इलाके के करीब 9 हजार मतदाताओं से बात की गई और उनका मौजूदा सांसद को लेकर मन पढ़ने की कोशिश की गई।
जानिए क्या है नाराजगी की वजह?
सर्वे के मुताबिक वोटर्स के बीच असंतोष की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि मौजूदा सांसद रमापति राम त्रिपाठीनिर्वाचन क्षेत्र में एक बाहरी व्यक्ति माने जाते हैं। इतना ही नहीं उनकी 2019 की जीत को लेकर मतदाताओं का मानना है कि त्रिपाठी को सिर्फ इसलिए टिकट दिया गया था, क्योंकि पार्टी को लगता था कि यहां के वोटर पार्टी के प्रति वफादार थे।
बाहरी उम्मीदवार को लेकर क्षेत्र में अलग ही माहौल बना हुआ है। भाजपा के कार्यकर्ता भी हतोत्साहित हो गए हैं, क्योंकि मौजूदा सांसद से जुड़ाव बहुत कम है। ऐसे में मामला यहां तक पहुंच गया कि अगर फिर से किसी बाहरी व्यक्ति को देवरिया से उम्मीदवार बनाया गया तो नाराजगी खुलकर बाहर आ जाएगी।
जनता का मूड सर्वे से जुड़े भास्कर सिंह के मुताबिक अगर इस बार किसी बाहरी व्यक्ति को यहां से चुनाव लड़ने के लिए उतारा जाएगा तो फिर देवरिया के वोटर अन्य दलों को वोट देने पर विचार सकते हैं। हालांकि जनता का मूड के सर्वे ने जिन भी लोगों से बात की उन्होंने विकास की धीमी गति को भी प्रमुख कारण बताया।












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