" जन आशीर्वाद यात्रा" की तर्ज पर नए मंत्रियों को टास्क देगी BJP, 'कम्युनिटी कनेक्ट' के लिए होगा इनका इस्तेमाल
लखनऊ, 27 सितंबर: उत्तर प्रदेश में योगी मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद अब संगठन ने नए मंत्रियों को टास्क देने की तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी सूत्रों का दावा है कि जिस तरह मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद यूपी के नए मंत्रियों को " जन आशीर्वाद यात्रा" निकालने का टास्क दिया गया था, ठीक उसी तरह अब इन नए मंत्रियों को अपने अपने क्षेत्रों में यात्रा निकालकर अपने अपने समाज में बीजेपी के लिए माहौल तैयार करने का जिम्मा दिया जाएगा। हालांकि यात्रा का नाम अभी तय नहीं हो पाया है लेकिन जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। पदाधिकारियों का दावा है कि इस तरह से कम्युनिट कनेक्ट करने में काफी मदद मिलेगी। नए मंत्रियों के साथ ही नए विधान परिषद सदस्यों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

"आशीर्वाद यात्रा" की तर्ज पर टास्क देने पर मंथन
योगी आदित्यनाथ सरकार में शामिल किए गए सात नए मंत्री, गैर-यादव अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) और गैर-जाटव दलितों के शिक्षित, ज्यादातर युवा नेताओं को लोगों से जोड़ने वाले मंत्रियों के रूप में भारतीय जनता पार्टी के फोकस को दर्शाते हैं। भाजपा अभी भी इस बात पर विचार कर रही है कि जुलाई में नरेंद्र मोदी सरकार में जगह पाने वाले नेताओं द्वारा की गई "आशीर्वाद यात्रा" की तर्ज पर कुछ शुरू किया जाना चाहिए या नहीं।
भाजपा के एक प्रदेश उपाध्यक्ष ने बताया कि,
'' जिस तरह मोदी मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन साधने के बाद उन मंत्रियों को जन आशीवा्रद यात्रा के माध्यम से जमीन पर उतारने का काम किया गया था उसी तरह अब योगी की टीम के नए मंत्रियों को लेकर संगठन एक यात्रा निकालने पर विचार कर रहा है। इसका नाम जल्द ही फाइनल कर लिया जाएगा। इसके बाद इन मंत्रियों को उनके क्षेत्रों में लगाया जाएगा। अब चुनाव में बहुत कम समय बचा है। कुल मिलाकर तीन महीने का वक्त इन मंत्रियों के पास है। ऐसे में विभाग में कुछ करने का समय है नहीं तो अब उनको संगठन के लिहाज से इस्तेमाल किया जाएगा।''
नए राज्य मंत्री और ओबीसी नेता धर्मवीर प्रजापति, जिन्हें जनवरी में बीजेपी एमएलसी बनाया गया था, उन्होंने कहा, "पार्टी हमें जो भी काम सौंपेगी, हम उसे आसानी से करेंगे।" इनकी नियुक्ति दलित बहुल आगरा बेल्ट पर भाजपा के फोकस को दर्शाती है, जहां से पार्टी के छह विधायक, दो सांसद और एक मेयर हैं। जुलाई में, भाजपा के आगरा लोकसभा सांसद एसपी सिंह बघेल को नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था।

मंत्रियों के सहारे समुदाय कनेक्ट का प्लान
पार्टी के नेताओं ने स्वीकार किया कि नए मंत्री निश्चित रूप से "समुदाय-कनेक्ट" पहल करेंगे, हालांकि इसका स्वरूप अभी तय नहीं किया गया है। जबकि जितिन प्रसाद को एमएलसी के चार पदों में से एक के लिए नामित किया जाना है, बाकी छह मंत्री पहले से ही विधायक हैं, जिससे पार्टी को एमएलसी पदों के लिए तीन ओबीसी और दलितों का चयन करने में मदद मिल रही है।
जातियों के गुलदस्ते का होगा चुनाव में फायदा
जितिन प्रसाद के अलावा, पार्टी ने वीरेंद्र सिंह गुर्जर (शामली), संजय निषाद (गोरखपुर) और गोपाल अंजन भुरजी (मुरादाबाद) को भी एमएलसी के रूप में नामित किया है। इसको लेकर प्रदेश के एक महासचिव ने कहा कि , "इसका मतलब यह होगा कि सात मंत्रियों के साथ, ये एमएलसी अपनी अपनी जातियों में बीजेपी का जनाधार बढ़ाने में मदद करेंगे। जितिन जी ही मंत्री हैं और एमएलसी भी मनोनीत हो गए। बाकी छह मंत्री और तीन शेष एमएलसी पद ओबीसी और दलितों की विभिन्न उपजातियों से भरे गए हैं।"

गाजीपुर सदर से विधायक स्नातकोत्तर महिला राजनीतिज्ञ, 41 वर्षीय संगीता बलवंत बिंद के मंत्रिमंडल में आने के बाद यह स्पष्ट भी हो गया। राज्य मंत्री के रूप में शपथ लेने वाली संगीता ने कहा कि,
"भाजपा के रूप में हाशिए के वर्ग के लिए किसी ने भी इतना कुछ नहीं किया है और हम निश्चित रूप से इस पहल को मजबूत करेंगे। संगठन की तरफ से जो भी टास्क मिलेगा उसे पूरी मेहनत के साथ पूरा किया जाएगा।"












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