Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

लालू यादव की बेटी रोहिणी ने अखिलेश के प्रचार का मोर्चा संभाला

लखनऊ, 13 जनवरी। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लालू यादव ने अखिलेश के लिए प्रचार किया था। लेकिन 2022 में अखिलेश के प्रचार का जिम्मा लालू यादव बेटी रोहिणी ने संभाला है। लालू यादव अभी दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। उनकी राजनीतिक भाग-दौड़ कम हो गयी है। वैसे भी रैलियों पर पाबंदी है। इसलिए वर्चुअल कैंपेन पर अधिक जोर है।

lalu prasad yadav daughter rohini acharya support akhilesh yadav in up election 2022

लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता से सुर्खियां बटोरती रही हैं। इसलिए उन्होंने अखिलेश यादव का डिजिटल प्रचार शुरू कर दिया है। दो दिन पहले उन्होंने ट्वीट किया, कमल रखो नुमाइश में, अखिलेश ही रहेंगे बाइस में, फिर ट्राई करो सत्ताइस में। यूपी में पहले चरण के चुनाव की अधिसूचना 14 जनवरी को जारी होगी। 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान होगा।

उत्तर प्रदेश के लिए लालू यादव की अहमियत

उत्तर प्रदेश के लिए लालू यादव की अहमियत

उत्तर प्रदेश चुनाव में राजद, सपा के साथ है। राजद का यहां कोई राजनीतिक आधार नहीं है। लेकिन सामाजिक समीकरण के हिसाब से लालू यादव व्यक्तिगत रूप से उत्तर प्रदेश में प्रासंगिक हैं। यूपी में 9 फीसदी यादव वोटरों को एकजुट रखने के लिए सपा को लालू यादव के नाम की जरूरत है। तभी तो पांच महीना पहले मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने दिल्ली जा कर लालू यादव से मुलाकात की थी। 2017 में भी लालू यादव ने सपा के लिए चुनाव प्रचार किया था। हालांकि सपा को लालू यादव के चुनाव प्रचार से बहुत फायदा नहीं मिला था। लेकिन इसके बावजूद अखिलेश यादव का लालू यादव पर भरोसा बना हुआ है। रिश्तेदारी की वजह से यह भरोसा बहुत मजबूत भी है। दिसम्बर में जब तेजस्वी यादव की दिल्ली में शादी हुई थी तब अखिलेश अपनी पत्नी डिम्पल यादव के साथ इसमें विशेष रूप से शामिल हुए थे। 2022 के चुनाव में लालू परिवार की तरफ से रोहिणी आचार्य ने सपा की मदद की शुरुआत कर दी है। उन्होंने अखिलेश यादव के लिए एक नया नारा गढ़ दिया है।

लालू यादव और मुलायम सिंह के बनते बिगड़ते रिश्ते

लालू यादव और मुलायम सिंह के बनते बिगड़ते रिश्ते

लालू यादव और मुलायम सिंह यादव के संबंध बनते बिगड़ते रहे हैं। रिश्तेदारी से पहले भी और बाद में भी। 2014 में मुलायम सिंह तब नाराज हो गये थे जब लालू यादव दंगा पीड़ितों से मिलने मुजफ्फरनगर चले गये थे। उस समय मुलायम सिंह ने कहा था, "हमारी सरकार ने दंगा पीड़ितों की इतनी मदद की, इसके बावजूद कुछ ऐरे-गैरे लोग (लालू यादव) वहां राजनीति कर रहे हैं। अब वे कांग्रेस की चापलूसी कर रहे हैं।" उस समय मुलायम सिंह वे लालू यादव को मसखरा तक कह दिया था। बाद में लालू यादव ने एक अन्य प्रसंग में कहा था, मुलायम सिंह 'डिरेल' हो गये हैं। समधियाना के बावजूद 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में लालू यादव और मुलायम सिंह के बीच अनबन हो गयी थी। सीट बंटवारे से नाराज मुलायम सिंह ने सपा प्रत्याशियों का अलग प्रचार शुरू कर दिया था। यहां तक कि मुलायम सिंह के पोते (लालू यादव के दामाद) तेजप्रताप सिंह यादव ने भी घोषणा कर दी थी के वे बिहार में सपा के लिए प्रचार करेंगे। तब राजलक्ष्मी (लालू यादव की पुत्री) और तेजप्रताप सिंह यादव की शादी के कुछ ही दिन हुए थे। राजनीतिक कारणों से लालू-मुलायम की नयी नयी रिश्तेदारी असहज हो गयी थी। तब लालू यादव ने मजाकिया लहजे में कहा था, मुलायम सिंह हमारे समधी हैं। उनको पांच धोती और एख छाता दे कर मना लेंगे।

लालू के प्रचार के बाद भी हार गये थे उनके दामाद

लालू के प्रचार के बाद भी हार गये थे उनके दामाद

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय लालू यादव ने घोषणा की थी कि वे अपने समधी मुलायम सिंह के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। लेकिन उन्होंने पहली चुनावी रेली अपने दामाद राहुल यादव के लिए की। कहा जाता है कि वे लखनऊ जाने की बजाय सीधे बुलंदशहर चले गये थे। बुलंदशहर की सिंकदराबाद सीट से उनके दामाद राहुल यादव सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। लालू यादव की चौथी पुत्री रागिनी की शादी उत्तर प्रदेश के नेता जितेन्द्र यादव के पुत्र राहुल यादव से हुई है। जितेन्द्र यादव पहले कांग्रेस में थे। 2012 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सिंकदराबाद से चुनाव लड़ा था। लेकिन हार गये थे। फिर वे समाजवादी पार्टी में चले आये। सपा ने उन्हें एमएलसी बनाया था। चर्चा के मुताबिक लालू यादव ने अपने दामाद राहुल यादव को टिकट दिलाने के लिए मुलायम सिंह पर दबाव बनाया था। सपा ने पहले इस सीट पर पूर्व मंत्री अब्दुल रब को टिकट दिया था। लेकिन बाद में अब्दुल रब का टिकट काट कर राहुल यादव को उम्मीदवार बनाया गया था। लालू यादव ने राहुल का जोरदार प्रचार किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नकल कर लोगों को खूब हंसाया भी था। लेकिन कुछ भी काम न आया। राहुल यादव 2017 का विधानसभा चुनाव हार गये थे। उन्हें तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था।

लालू यादव ने हेलीकॉप्टर से किया था प्रचार

लालू यादव ने हेलीकॉप्टर से किया था प्रचार

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजद का कोई उम्मीदवार नहीं था। लेकिन लालू यादव ने सपा के लिए जम कर प्रचार किया था। उन्होंने कहा था, उत्तर प्रदेश में विधानसभा का नहीं बल्कि देश का चुनाव हो रहा है। जैसे बिहार में नरेन्द्र मोदी की हार हुई वैसे ही उत्तर प्रदेश में भी होगी। हम लोग यूपी में बिहार दोहराएंगे। उन्होंने सपा के लिए कई चुनावी सभाएं की थीं। अखिलेश यादव ने लालू यादव को प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर भी दिया था। उन्होंने अपनी देसज शैली से भीड़ भी जुटायी थी। एक सभा में उन्होंने नरेन्द्र मोदी को दिल्ली से दूर हटाने के लिए भोजपुरी में गाना गाया था, "लागल, लागल झुलनिया के धक्का कि बलम कलकत्ता पहुंच गये।" एक सभा में उन्होंने कहा था, हम अखिलेश का लाइसेंस रिनुअल कराने आये हैं। लेकिन लालू यादव की तमाम कोशिशों के बाद भी उत्तर प्रदेश की जनता ने अखिलेश का लाइसेंस रिनुअल नहीं किया। सपा की करारी हार हुई। वह सत्ता की कुर्सी से लुढ़क कर 47 पर आ गयी। 2022 में रोहिणी आचार्य ने अखिलेश की जीत के लिए अलख जगाया है।

यह भी पढ़ें: यूपी में दूसरे दलों से नेताओं की एंट्री के बाद अखिलेश यादव के सामने पैदा हुई नई चुनौती

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+