Lakhimpur Case: किसानों को कुचलने के आरोपी आशीष मिश्रा जेल से हुए रिहा, पिता अजय मिश्रा मिलने पहुंचे

लखनऊ। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जेल में बंद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा मंगलवार को जेल से रिहा हो गए। वहीं बेटे आशीष मिश्रा के जेल से बाहर आने के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री व पिता अजय मिश्रा उनसे मिलने के लिए आवास पर पहुंचे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को अपने संशोधित आदेश में आशीष मिश्रा को साल 2021 के अक्टूबर महीने में हुई घटना के मामले में जमानत दे दी थी। दरअसल, आशीष को बीते गुरुवार को ही जमानत मिल गई थी, लेकिन जमानत के आदेश में दो धाराएं छूट गई थीं, जिसे जुड़वाने के लिए अगले दिन शुक्रवार को आशीष मिश्र के वकील हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच पहुंचे थे।

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पिछले गुरुवार को ही पारित हो गया था जमानत का आदेश
गुरुवार को पारित किये गए जमानते के आदेश में धारा 147, 148, 149, 307, 326, 427 के साथ-साथ आईपीसी 34, शस्त्र अधिनियम की धारा 30 और मोटर वाहन की धारा 177 का उल्लेख किया गया लेकिन धारा 302 और धारा 120 ( बी ) छोड़ दिया गया था। पिछले साल यूपी के लखीमपुर खीरी में प्रदर्शन कर रहे किसानों की हत्या के मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को जेल से रिहा कर दिया गया है। वह एक एसयूवी में पिछले गेट से जेल से निकले।

आशीष पर शहर छोड़ने का कोई प्रतिबंध नहीं
समाचार एजेंसी एएनआई ने आशीष मिश्रा के वकील अवधेश कुमार सिंह के हवाले से कहा कि अदालत ने तीन-तीन लाख रुपये की दो जमानत की मांग की थी, लेकिन उनके शहर छोड़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। जमानत मिलने के बाद आशीष के वकील ने दावा किया कि "मेरे मुवक्किल के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है।"

निचली अदालत ने खारिज कर दिया था अनुरोध
निचली अदालतों द्वारा अनुरोधों को खारिज करने के बाद, उन्हें पिछले हफ्ते इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दी गई थी। अदालत ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी सहित पुलिस द्वारा सूचीबद्ध कुछ आरोपों पर सवाल उठाया था।" कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान, किसी भी मृतक के शरीर पर या किसी घायल के व्यक्ति के शरीर पर ऐसी कोई फायरआर्म्स की चोट नहीं मिली थी।

अदालत ने पुलिस के दावों पर उठाया था सवाल
अदालत ने पुलिस के दावों पर भी सवाल उठाया कि आशीष ने एसयूवी के चालक को किसानों को कुचलने के लिए उकसाया। आशीष मिश्रा को जमानत मिलने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने एनडीटीवी को बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा, कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ने वाले किसान संघों के साथ मिलकर, "जल्द ही" अपील दायर करने के लिए दस्तावेज इकट्ठा कर रहा है।

किसानों का दावा- पुलिस पर मामले को कमजोर करने का दबाव
किसानों ने दावा किया है कि पुलिस पर मामले को कमजोर करने के लिए दबाव डाला गया और इसके कारण आशीष मिश्रा को जमानत मिल गई। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी दोनों ने भी तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की तरह निशाना साधा और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा अपना बचाव कर रही है।

3 अक्टूबर को हुई थी घटना
साल 2021 में 3 अक्टूबर को, आशीष मिश्रा कथित रूप से एक एसयूवी चला रहे थे, जो लखीमपुर खीरी में तीन (निरस्त) कृषि कानूनों के खिलाफ एक विरोध मार्च के दौरान चार किसानों और एक पत्रकार को कुचल गई थी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के कुछ दिनों बाद ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। किसानों को कार से टकराते हुए दिखाने वाले वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिससे भाजपा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार, और पीएम मोदी की भी तीखी आलोचना हुई थी। उस दिन हुई हिंसा में मारे गए भाजपा के दो कार्यकर्ताओं सहित आठ लोग मारे गए थे।

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