जानिए 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' अभियान का क्या रहा स्ट्राइक रेट, 159 में से केवल जीत पाई 1

लखनऊ, 11 मार्च: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं और उसके नतीजे भी आ गए हैं। विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए भी उत्साहजनक नहीं है। यूपी में कांग्रेस को खड़ा करने के लिए यूपी की प्रभारी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने काफी मेहनत की थी। आधी आबादी पर दांव खेलने वाली प्रियंका को वहां भी निराशा मिली। प्रियंका ने कांग्रेस में महिलाओं को चालीस फीसदी टिकट दिए जाने की शुरूआत की। इस अभियान के तहत ही कांग्रेस ने यूपी में 159 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था लेकिन इनमें से सिर्फ एक ही जीत पाईं। कांग्रेस की हालत यह है कि वह केवल दो सीटों पर सिमटकर रह गई है। यानी यूं कहें तो लड़की हूं लड़ सकती हूं अभियान में जीत का स्ट्राइक रेट 0.60 के करीब ही रही है जो उसकी असफलता की कहानी बयां कर रहा है।

कांग्रेस के खाते में आई केवल दो सीटें इसमें भी एक महिला

कांग्रेस के खाते में आई केवल दो सीटें इसमें भी एक महिला

राज्य में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। राज्य में कांग्रेस ने केवल दो सीटें जीती हैं और इस बार उसका वोट शेयर भी पिछले चुनाव की तुलना में गिर गया है। कांग्रेस राज्य में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही थी। लेकिन उनके नेतृत्व में पार्टी प्रदर्शन नहीं कर पाई और पार्टी के सिर्फ दो विधायक ही विधानसभा की दहलीज पार कर पाए. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी विधानसभा चुनाव हार गए हैं। पार्टी को केवल दो सीटों पर विजय मिली है जिसमें एक फरेंदा सीट से चौधरी और दूसरी प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास सीट से आराधना मिश्रा उर्फ मोना शामिल हैं। ये भी अपने पिता के प्रभाव की वजह से जीतने में सफल रही हैं। इनकी जीत में कांग्रेस का योगदान कम ही है।

विधानसभा में कमजोर हो रही कांग्रेस

विधानसभा में कमजोर हो रही कांग्रेस

राज्य में कांग्रेस की ताकत विधानसभा में कमजोर होती जा रही है। जहां 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 28 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा 7 पर पहुंच गया था। जबकि राज्य में 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था और इस बार पार्टी ने अपने दम पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में कांग्रेस को करीब 6.5 फीसदी वोट मिले थे। मौजूदा विधानसभा चुनाव में कुछ खास प्रदर्शन नहीं हो सका। कांग्रेस के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो बीजेपी को छोड़कर पार्टी राज्य के सभी राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने में सफल रही है। फिलहाल प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की यह दूसरी बड़ी हार है। इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक सीट पर सिमट गई थी।

दो विधायक ही पार कर पाए विधानसभा की दहलीज

दो विधायक ही पार कर पाए विधानसभा की दहलीज

पार्टी केवल रायबरेली की सीट जीतने में सफल रही और अमेठी की सीट पर उसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा। कई दशकों तक उत्तर प्रदेश की सत्ता पर राज करने वाली कांग्रेस अब महज दो विधायकों तक सिमट कर रह गई है। प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास सीट से वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा मोना चुनाव जीतने में सफल रही हैं। मोना मिश्रा ने बीजेपी प्रत्याशी नागेश प्रताप को हराकर दूसरी बार विधायक बने हैंगौरतलब है कि रामपुर खास प्रमोद तिवारी का गढ़ माना जाता है, वह यहां से लगातार नौ बार विधायक रह चुके हैं। इसके साथ ही महाराजगंज की फरेंदा सीट पर पार्टी ने वीरेंद्र चौधरी पर दांव खेला था। वह चुनाव जीतने में सफल रहे और उन्होंने चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को हराया। कांग्रेस उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह को 85,181 वोट मिले जबकि बीजेपी उम्मीदवार बजरंग बहादुर सिंह को 83,935 वोट मिले. हालांकि, वीरेंद्र पिछला चुनाव हार गए और बजरंग बहादुर सिंह से हार गए। तो इस चुनाव में उन्होंने बदला ले लिया है।

प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस की यूपी में दूसरी हार

प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस की यूपी में दूसरी हार

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान जब से प्रियंका गांधी के हाथों में आई है तब से यह दूसरा चुनाव है जिसमें कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को करारी हार मिली थी। इसके बाद भी प्रियंका पिछले तीन वर्षों से कांग्रेस को खड़ा करने में दिन रात एक किए हुए थीं लेकिन परिणाम आए तो सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं। अब कांग्रेस के समाने चुनौती काफी बड़ी है। मिशन 2024 में जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस के साथ ही प्रियंका को भी नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कांग्रेस के भीतर से ही अब प्रियंका के रवैये को लेकर आवाज भी उठने लगी है। कई पदाधिकारियों का आरोप है कि वह वामपंथियों से इतनी घिर गई हैं कि पार्टी के हित में सही फैसले नहीं ले पा रही हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि प्रियंका को समय रहते ही कांग्रेस के साथ ही अपनी कमियों को भी दूर करना होगा नहीं तो कांग्रेस की ऐसी स्थिति बार बार आती रहेगी।

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