Kawad Yatra 2025: बुग्गी में गंगाजल और दिल में शिवभक्ति, रुतवा गुर्जर की आस्था की हर ओर हो रही चर्चा
Kawad Yatra 2025: सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा जहां आस्था का प्रतीक बन चुकी है, वहीं एक शिवभक्त ने इसे नया आयाम दे दिया है। इस बार चर्चा का केंद्र बना है मेरठ का एक युवक, जो दांतों से गंगाजल खींचकर भोलेनाथ को अर्पित करने निकला है।
छत्रीगढ़ गांव निवासी रुतवा गुर्जर ने हरिद्वार से अपनी यात्रा की शुरुआत की थी। उन्होंने 101 लीटर गंगाजल को एक विशेष बुग्गीनुमा कांवड़ में भरकर दांतों की ताकत से खींचने का संकल्प लिया। उनका कहना है कि यह केवल आस्था नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश है।

रुतवा ने बताया कि उनकी मांग है कि 'गौ माता' को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने ये अनूठी कांवड़ यात्रा शुरू की है। उनके मुताबिक, यह उनका संकल्प है, जो शिवभक्ति से जुड़ा है और भावनात्मक रूप से बेहद खास है।
हर दिन तय कर रहे हैं 10 किलोमीटर की दूरी
रुतवा की टीम में कुल 9 लोग शामिल हैं जो पूरे रास्ते में उनकी सहायता करते हैं। वे प्रतिदिन लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं और 23 जुलाई को जलाभिषेक कर यात्रा पूर्ण करेंगे।
इस दौरान उन्हें रास्ते में किसी तरह की कठिनाई नहीं आई। कांवड़ यात्री का कहना है कि पुलिस प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं उन्हें पर्याप्त सुविधा उपलब्ध करा रही हैं।
गाड़ियां भी दांतों से खींचते हैं रुतवा
रुतवा गुर्जर खुद को 'बजरंग दल का चिता' बताते हैं और दावा करते हैं कि वे दांतों से फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो और कैंटर जैसी गाड़ियां भी खींच चुके हैं। उनका मानना है कि ये उनकी साधना और भक्ति का ही परिणाम है।
इतना ही नहीं, वे कहते हैं कि दांतों से 50 किलो वजन उठाकर एक किलोमीटर पैदल चलना भी उनके रोज़मर्रा के अभ्यास का हिस्सा है। उनका कहना है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो शरीर भी साथ देता है।
लोगों का कहना है, सबसे अलग है यह कांवड़ यात्रा
हर साल कांवड़ यात्रा में हज़ारों श्रद्धालु भाग लेते हैं, लेकिन रुतवा की यह पहल बाकी सबसे बिल्कुल अलग है। न कोई ढोल, न शो-ऑफ, सिर्फ साधना, संकल्प और एक स्पष्ट मांग के साथ वह आगे बढ़ रहे हैं।
इस अनोखे शिवभक्त को देखने के लिए लोग रास्ते में रुक जाते हैं। उनकी यात्रा ने न सिर्फ श्रद्धालुओं को प्रभावित किया है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी चर्चा का विषय बन गई है।
रुतवा ने कहा है कि वह किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि सीधे अपनी आस्था और देश के संस्कारों से जुड़ी मांग लेकर निकले हैं। वे चाहते हैं कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीर विचार करे।












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