Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

लखनऊ में बैठे-बैठे मायावती ने कैसे रचा कैराना का चक्रव्यूह, जिसमें फंसी भाजपा

सियासत के गहरे जानकार भी इस बात को सोचकर हैरान हैं कि बिना कैराना गए और अपने वोटरों से बिना कोई अपील किए, बसपा सुप्रीमो मायावती ने दलित वोटों को आखिर कैसे आरएलडी की तरफ मोड़ दिया।

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिम यूपी की बहुचर्चित सीट कैराना पर भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। फूलपुर और गोरखपुर में सपा-बसपा के गठजोड़ से हारी भाजपा को बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि कैराना में भी उसे हार का मुंह देखना पड़ेगा। भाजपा को मात देने वाली आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम हसन को कैराना की नकुड़ और गंगोह विधानसभा में जबरदस्त बढ़त मिली और इन दोनों ही सीटों पर दलित वोट बड़ी संख्या मैं है। सियासत के गहरे जानकार भी इस बात को सोचकर हैरान हैं कि बिना कैराना गए और अपने वोटरों से बिना कोई अपील किए, बसपा सुप्रीमो मायावती ने दलित वोटों को आखिर कैसे आरएलडी की तरफ मोड़ दिया। इस सवाल का जवाब हम आपको दिए देते हैं।

आखिर क्यों खामोश थीं मायावती?

आखिर क्यों खामोश थीं मायावती?

कैराना में सियासी शंखनाद होने से पहले ही मायावती ने साफ कर दिया था कि वो उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगी। ऐसे में यह तय हो गया था कि कैराना में प्रत्याशी सपा का हो या आरएलडी का, उसकी जीत में दलित वोटों का रोल काफी अहम होगा। कैराना में छिड़े चुनावी घमासान के दौरान मायावती ने ना तो अपने वोटरों से किसी तरह की कोई अपील की और ना ही कोई जनसभा, लेकिन बसपा सुप्रीमो की ये खामोशी यूंही नहीं थी। सूत्र बताते हैं कि जिला स्तर पर बसपा के नेताओं को गुप्त तौर पर सपा और आरएलडी नेताओं के साथ मिलकर चुनाव प्रचार करने के निर्देश लखनऊ से मिल चुके थे।

बसपा का वो कैंप, जिसमें मिला दलितों को इशारा

बसपा का वो कैंप, जिसमें मिला दलितों को इशारा

मायावती को एहसास था कि बिना बसपा प्रत्याशी के अगर वो सीधे तौर पर चुनाव प्रचार में उतरीं तो भाजपा किसी ना किसी मुद्दे के जरिए दलित वोटों में सेंधमारी कर लेगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए ही मायावती ने साइलेंट रहकर दलित वोटों को आरएलडी की तरफ मोड़ा। बसपा के जिला स्तर के नेताओं ने भी पर्दे के पीछे रहकर ही अपने वोटरों से संपर्क साधा। सूत्रों के मुताबिक कैराना में वोटिंग से ठीक 2-3 दिन पहले बसपा का एक कैडर कैंप आयोजित किया गया, जिसमें भाजपा की नीतियों की आलोचना की गई। इस कैंप में ही दलित वोटों को भाजपा के खिलाफ वोट करने का इशारा कर दिया गया था।

कर्नाटक से कैराना पर निशाना

कर्नाटक से कैराना पर निशाना

इसके अलावा कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह के दौरान सपा मुखिया अखिलेश यादव, यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और आरएलडी प्रमुख अजीत सिंह के साथ मंच सांझा कर मायावती पहले ही यह संकेत दे चुकी थी कि 2019 के गठबंधन के लिए वो पूरी तरह से तैयार हैं। कैराना सीट पर दलितों के करीब 2 लाख वोट हैं, जिनमें से 1.5 लाख जाटव हैं। कैराना में बसपा प्रत्याशी के ना होने से दलितों के ये वोट काफी निर्णायक हो गए थे, जिन्हें साधने में मायावती ने किसी तरह की कोई गलती नहीं की।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+