क्या शिवपाल के खौफ से अभी भी भयतभीत हैं अखिलेश, 11 अक्टूबर से पहले देंगे जवाब या अकेले ठोकेंगे चुनावी ताल
लखनऊ, 09 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव में अब बहुत कम वक्त ही बचा है। इस बीच यूपी चुनाव से पहले प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) शिवपाल यादव और समाजवादी पार्टी (सपा) अखिलेश यादव के बीच सुलह का रास्ता अभी तक नहीं निकल पाया है। इस बीच शिवपाल ने चुनावी समझौता करने के लिए 11 अक्टूबर की समय सीमा निर्धारित की है। उधर सपा के सूत्र बता रहे हैं कि शिवपाल ने सपा चीफ अखिलेश यादव से अपने और अपने करीबीयों के लिए 30 सीटों की मांग रखी है लेकिन वो इतनी सीटें देने को तैयार नहीं हैं। हालांकि अखिलेश के मन में यह डर भी सता रहा है कि कहीं शिवपाल पार्टी में आकर पुराने जख्मों को ताजा न कर दें। इसीलिए जो भी फैसला लिया जाए सोच समझकर लिया जाएगा।

12 अक्टूबर से सामाजिक परिवर्तन यात्रा निकालेंगे शिवपाल यादव
समाजवादी विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर 12 अक्टूबर को मथुरा से "सामाजिक परिवर्तन यात्रा"। शिवपाल यादव द्वारा स्थापित नई समय सीमा को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर दबाव की रणनीति के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने अपने चाचा की पार्टी के साथ राजनीतिक गठबंधन के लिए दिलचस्पी दिखाई थी। सपा प्रमुख ने बार-बार कहा कि सपा जसवंत नगर में शिवपाल यादव के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी, जहां से वह अपनी पार्टी पीएसपी का नेतृत्व करने के बावजूद अभी भी सपा विधायक हैं।

12 अक्टूबर से ही शुरू होगी अखिलेश की समाजवादी विजय यात्रा
विधानसभा चुनावों से पहले जनता से जुड़ने के उद्देश्य से, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को राज्य में 12 अक्टूबर से 'समाजवादी विजय यात्रा' की घोषणा की। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए यह उनकी तीसरी एकल राज्यव्यापी रथ यात्रा होगी। पार्टी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि 'समाजवादी विजय यात्रा' 12 अक्टूबर से शुरू होगी। बताया जा रहा है कि यह यात्रा कई चरणों में आयोजित होगी और इसकी शुरुआत कानपुर से हो सकती है। पहले चरण में यह यात्रा बुंदेलखंड जाएगी।

अखिलेश ने किया था चुनाव में 400 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा
2022 के यूपी चुनाव के लिए, अखिलेश यादव ने राज्य सरकार के कथित कुशासन के कारण 400 से अधिक सीटें जीतने का विश्वास व्यक्त किया है। जहां उन्होंने कांग्रेस और बसपा के साथ गठबंधन करने से इनकार किया है, वहीं सपा अध्यक्ष अपने चाचा के साथ चुनावी तालमेल को लेकर प्रतिबद्ध नहीं हैं। पीएसपी-एल के ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाले 'भागीदारी संकल्प मोर्चा' का हिस्सा बनने की अटकलों ने भी जोर पकड़ा जब ओवैसी ने 21 सितंबर को शिवपाल यादव से मुलाकात की।

अखिलेश को डर कहीं शिवपाल फिर पार्टी पर हावी न हो जाएं
प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव लगातार अपने भतीजे के सामने सपा में जाने का प्रस्ताव रख रहे हैं लेकिन अखिलेश यादव न तो तो शिवपाल का फोन उठा रहे हैं न तो वह उनके किसी फोन काल का जवाब देते हैं। शिवपाल ने 11 अक्टूबर तक का समय दिया है लेकिन फिलहाल जो परिस्थितियां हैं उससे यही लगता है कि मुलायम परिवार के बीच सुलह की गुंजाइश कम ही है। दोनों नेता अपनी अपनी यात्राओं का ऐलान भी कर चुके हैं। हालांकि सपा के सूत्र बताते हैं कि पार्टी टूटने के दौरान अखिलेश के दिल में जख्म हुए थे वो अभी तक भरे नहीं हैं। अखिलेश यादव को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं शिवपाल यादव को पार्टी में शामिल करा लिया और फिर पार्टी और सपा के वरिष्ठ नेताओं पर उनकी पकड़ हो गई तो फिर वही पुरानी कहानी दुहराई जा सकती है। इसलिए अखिलेश अभी शिवपाल के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में ही डाले हुए हैं।

राजभर-ओवैसी और चंद्रशेखर ने की थी शिवपाल से मुलाकात
2022 में उत्तर प्रदेश के अंदर विधानसभा चुनाव होने है, जिसको लेकर सियासी हलचल तेजी से बढ़ने लगी है। वहीं, छोटे-छोटे राजनीतिक दल भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में 29 सितंबर को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर छोटे-छोटे दलों का जमावड़ा लगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सियासी मुद्दों को लेकर इनके बीच करीब घंटे भर चर्चा हुई।

गुन्नौर और जसवंतनगर सीट पर शिवपाल की निगाहें
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के मुखिया भारतीय जनता पर्टी के साथ ही अपने भतीजे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को पटकनी देने की तैयारी में हैं। दरअसल सूत्र बता रहे हैं कि शिवपाल यादव बदायूं लोकसभा की गुन्नौर सीट से अपने लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं। कभी सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का गढ़ कहा जाने वाले बदायूं पर शिवपाल की नजर टिकी हुई है और यादव-मुस्लिम समीकरण के सहारे उन्हें जीत का भरोसा भी है। सूत्रों का दावा है कि शिवपाल जसवंत नगर की सीट अपने बेटे के लिए खाली कर सकते हैं और खुद गुन्नौर से चुनाव लड़ सकते हैं।

यूपी में पिछली बार बीजेपी ने जीती थी 312 सीटें
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में, भाजपा ने 403 सदस्यीय सदन में 312 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि बसपा केवल 19 सीटें जीत सकी। दूसरी ओर, सपा-कांग्रेस गठबंधन फल देने में विफल रहा क्योंकि वह केवल 54 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल कर सका। इसे पीएम मोदी के लिए जनादेश के रूप में देखा गया था क्योंकि भाजपा ने किसी भी सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी, गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ इस पद के लिए एक सरप्राइज पिक थे। हालांकि कुछ भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री के रूप में आदित्यनाथ के भविष्य पर परस्पर विरोधी बयान दिए, लेकिन पीएम मोदी ने राज्य की अपनी लगातार यात्राओं के दौरान यूपी के मॉडल की सराहना करते हुए सभी अटकलों पर विराम लगा दिया।












Click it and Unblock the Notifications