लखीमपुर की Inside Story, सीएम योगी ने कैसे सियासी दलों को नहीं लेने दिया पॉलिटिकल माइलेज
यूपी के लखीमपुर खीरी में हुई घटना के बाद सीएम योगी ने कैसे संभाले हालात।
लखनऊ, 04 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रविवार को हुए बवाल में 8 लोगों की मौत होने के बाद शाम होते होते यूपी का सियासी पारा अपने चरम पर था। लखनऊ में अधिकारियों के हाथ पांव फूल रहे थे। सब इस बात से चिंतित थे की मंगलवार को पीएम के दौरे से पहले यदि ये बवाल खत्म न हुआ और कहीं दौरा कैंसिल करना पड़ा तो सरकार के चार साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। इस बीच, सियासी दलों में इस घटना को लेकर सियासी माइलेज लेने की होड़ मची थी, लेकिन योगी के एक्शन में आते ही मामला पलटता चला गया। आइए जानते हैं योगी के पांच कदम के बारे में जिसने पूरी बाजी पलटकर रख दी।

योगी ने एडीजी प्रशांत कुमार को सौंपी कमान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जैसे ही सूचना मिली की लखीमपुर में बवाल हो रहा है और 6 किसानों किनमैत हो गई है वो सिद्धार्थनगर का दौरा छोड़कर, लखनऊ आ गए। योगी ने प्रशांत कुमार को लखीमपुर भेजा। सूत्र बताते हैं की इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह थी की प्रशांत कुमार लंबे समय तक मेरठ जोन के एडीजी रहे हैं और किसान नेता राकेश टिकैत के साथ उनके अच्छे रिश्ते हैं। प्रशांत कुमार योगी का सिग्नल मिलते ही लखीमपुर के लिए रवाना हो चुके थे।

आईपीएस अजय पाल शर्मा को भी लखीमपुर भेजा
सरकार से जुड़े सूत्रों की माने तो योगी के निर्देश पर ही आईपीएस अजय पाल शर्मा को भी लखीमपुर मामले को शांत करने के लिए लगाया गया। सीएम की हरी झंडी मिलने के बाद अजयपाल शर्मा लखीमपुर के लिए रवाना हो गए। शर्मा भी काफी लंबे समय तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एसपी रह चुके हैं। सरकार को लगा कि उनके अनुभव और कॉन्टेक्ट्स का लाभ सरकार को मिल सकता है। अजयपाल शर्मा ने इस आंदोलन को रोकने में अहम भूमिका निभाई।

किसान नेता राकेश टिकैत को मैनेज करने में कामयाब
लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद लगातार कई जिलों में सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया। सरकार को लगा कि ये मामला कई जिलों तक फैल सकता हैं। इसको देखते हुए पश्चिमी यूपी के कई जिलों में जिलाधिकारियों और कप्तानों को अलर्ट रहने का निर्देश जारी किया गया। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि योगी का साफ निर्देश था की इस मामले को पीएम के दौरे से पहले हर हाल में निपटाना है। इसके लिए सरकार ने राकेश टिकैत को मैनेज करने का दाव खेला और वह कामयाब हो गया। सरकार ने केवल राकेश टिकैत को ही लखीमपुर जाने की इजाजत दी। बाकी किसी को वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई।

राकेश टिकैत के अलावा किसी को लखीमपुर जाने की इजाजत नहीं दी
योगी सरकार ने किसी को लखनऊ तो किसी को सीतापुर जाते जाते पुलिस ने रोक लिया। राकेश टिकैत लखिमपुर को लखीमपुर खीरी जाने देने की पीछे सरकार का मास्टर प्लान काम कर रहा था। सरकार जनता में ये मैसेज देना चाहती थी कि सरकार किसानों की बात सुनने के लिए तैयार है और उनकी सभी मांगों पर विचार किया जायेगा। इधर , राकेश टिकैत ने लखीमपुर खीरी पहुंचकर किसानों से बातचीत करनी शुरू की। सुबह होते होते राकेश टिकैत ने किसानों की तरफ से मांगों की एक सूची योगी सरकार को भेज दी।

योगी ने किसानों की मांगों को तत्काल मान लिया
एडीजी प्रशांत कुमार और राकेश टिकैत को भेजने का योगी का दाव चल गया। सोमवार को सुबह किसानों की सभी मांगों को सीएम को बताया गया। सीएम ने तत्काल इन मांगों में थोड़ा संशोधन के बाद मान लिया। हिंसा में मारे गए किसानों को 45 लाख रुपए मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, हाईकोर्ट के पूर्व जज से जांच कार्य जाने की मांग को स्वीकार कर लिया गया। किसानों की मांग सरकार के मानते ही विपक्ष के कार्यक्रमों और दावों की हवा निकल गई।

मामले में केस दर्ज कर किसानों का गुस्सा दबाया
लखीमपुर खीरी में किसानों के भीतर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया गया। इससे किसानों के भीतर जो गुस्सा था वह शांत हो गया। अजय मिश्रा भी अपने बयान में यही कहते रहे कि इसमें किसानों का कोई दोष नही है। उनके भीतर जो शामिल गलत लोगों ने इसे खराब किया है। आशीष मिश्रा के समेत 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
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