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गाजियाबाद: महामाया देवी मंदिर, जहां 131 लोगों को दी थी फांसी, 1857 की क्रांति से जुड़ा है सीकरी गांव का इतिहास

Independence Day 2023 Sikri Mata Temple History: पूरा देश आजादी के रंग में रंगा हुआ है। देश अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्‍त के इस खास मौके पर आपको ऐसे गांव की कहानी बताने जा रहे हैं, जो 1857 की क्रांति के बजने वाले बिगुल का गवाह रहा है।

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में मोदीनगर के गांव सीकरी में लोगों ने आजादी के मतवालों का साथ देते हुए अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी थी। सीकरी गांव में माता महामाया देवी मंदिर आजादी के ऐसे इतिहास का साक्षी है, जिसमें अंग्रेजों की क्रूरता को झेला है। अंग्रेजों की फौज के सामने डटकर मुकाबला करने वाले गांव के 131 लोगों को यहां फांसी की सजा दी गई थी।

Sikri Mata Temple History

सीकरी गांव में माता महामाया देवी का मंदिर करीब 550 वर्ष पुराना बताया जाता है। इस मंदिर की बहुत मान्यता है, लेकिन मंदिर में एक वटवृक्ष भी है, जिसे शहीदों का वटवृक्ष कहा जाता है। गांव के इतिहास के बारे में वनइंडिया से बात करते हुए समाजसेवी और सीकरी गांव के निवासी हरवीर ने बताया कि यहां अंग्रेजी फौज से गांव के लोगों ने जमकर लोहा लिया था।

ग्रामीण हरवीर सिंह ने बताया कि देश में शुरू हुई 1857 की क्रांति में सीकरी गांव के लोगों ने भी बढ़चढ़ हिस्सा लिया था। अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक चुके ग्रामीणों का अंग्रेजी फौज के साथ आमने-सामने की टक्कर हुई थी। 9 जुलाई 1857 को यहां अंग्रेजों ने क्रूरता ही हद पार करते हुए 131 लोगों को मंदिर के वृक्ष पर फांसी लगा दी थी।

गांव के लोगों खोला था मोर्चा

उन्होंने बताया कि 4 जुलाई 1857 को गांव के लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला था, जिसके चलते उनकी ट्रेजरी सहित मुखबिरों को बड़ा नुकसान पहुंचाया था, इतना ही नहीं हथियार लूटकर क्रांतिकारी सेनाओं की मदद की, जिसके बाद ब्रिटिश आर्मी के सेना नायक ने 2100 घुडसवारों के साथ तोपों के साथ सीकरी गांव पर हमला किया था।

अंग्रेजों ने पूरे गांव को तोपों से घेरा

सीकरी गांव किसी भी तरह के हमले से लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार था। अंग्रेजों की तोप का मुकाबला गांव के लोगों ने अपनी तोपों से दिया, लेकिन पुुरानी तोप होने की वजह से गांव को नुकसान झेलना पड़ा। करीब ढाई घंटे तक युद्ध चला, लेकिन बारिश के कारण बारूद भीग जाने के कारण आमने-सामने की लड़ाई शुरू हो गई, जिसमें अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को मार दिया।

Sikri Mata Temple History

मंदिर के तहखाने में छिपे लोगों की दी थी जानकारी

इसके बाद अंग्रेजों को लगा की अब कोई नहीं बचा तो सेना नायक डगलस और विलियम्स को गांव के किसी मुखबिर ने सूचना दी थी, मंदिर के तहखाने में क्रांतिकारियों ने शरण ली है, हालांकि सच्चाई ये थी उसमें महिला, बुजुर्ग और छोटे बच्चे थे। फिर मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन बरगद के पेड़ से लटककर उन्हें फांसी देने का आदेश दिया। इस पेड़ पर करीब 131 लोगों को फांसी दी गई।

शहीदों के वटवृक्ष के रूप में होती है पूजा

स्थानीय निवासी हरवीर के मुताबिक आज भी तहखाने में उनके पदचिन्ह मौजूद हैं। उन्होंने तेंदुराम की किताब के हवाले से जानकारी देते हुए बताया कि पूरी घटना 9 जुलाई को घटित हुई थी। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अलग-अलग किताबों से अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। माता के मंदिर में साल में दो बार मेला लगता है। लोगों की वटवृक्ष में बहुत श्रद्धा है। बरगद का यह पेड़ आज भी मौजूद है और यहां आने वाले श्रद्धालु उन शहीदों की याद में श्रद्धांजलि देते हैं।

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