UP में केवल 11 जिलों में अब तक हुई है सामान्य बारिश, जानिए क्यों आस लगाए बैठी है सरकार

लखनऊ, 01 सितंबर: उत्तर प्रदेश के 64 जिलों में मानसून में सामान्य से कम बारिश हुई है, जिनमें से कई में सूखे जैसी स्थिति है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 19 अगस्त तक यूपी के 75 जिलों में से केवल 11 में ही सामान्य बारिश हुई है। जहां सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश इस कमी को पूरा करेगी, वहीं किसानों को डर है कि अब बहुत देर हो चुकी है। हालांकि मौसम विभाग की माने तो अभी बारिश का समय बीता नहीं है। दस अक्टूबर तक बारिश का समय है। आने वाले दिनों में बारिश होने की पूरी संभावना है।

बाकी बचे समय में पर्याप्त बारिश का अनुमान

बाकी बचे समय में पर्याप्त बारिश का अनुमान

हालांकि, मौसम विज्ञानी सितंबर में पर्याप्त बारिश की उम्मीद कर रहे हैं, जो पूरे घाटे को कवर नहीं कर सकता है, लेकिन मानसून के मौसम के अंत तक वास्तविक और सामान्य बारिश के बीच अंतर को कम कर देगा, जो जून के मध्य से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक रहता है। वहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान के खेतों में रोपाई के बाद लगभग एक महीने तक आदर्श रूप से कम से कम कुछ इंच पानी की आवश्यकता होती है। वर्षा की कमी से खरपतवार की वृद्धि होती है और पौधे का विकास प्रभावित होता है। पूर्वी यूपी में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है, जहां बारिश एलपीए से 50 फीसदी कम है।

यूपी के जौनपुर में 74 फीसदी कम बारिश

यूपी के जौनपुर में 74 फीसदी कम बारिश

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक जौनपुर में 74 फीसदी कम बारिश हुई है। जिले में 19 अगस्त तक 471.5 मिमी की लंबी अवधि के औसत (एलपीए) की तुलना में इस मानसून में केवल 123.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई और यह बड़े घाटे वाले क्षेत्रों की श्रेणी में आता है। शाहजहांपुर जिले के कटरा क्षेत्र के कुलजीत सिंह कहते हैं कि, "मानसून में देरी के कारण हमें धान की रोपाई में एक महीने से अधिक की देरी करनी पड़ी। हममें से कई लोगों को नुकसान हुआ। अब, जिस धान की हमने रोपाई की है, वह बारिश की कमी के कारण प्रभावित हो रहा है।"

कई जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

कई जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

यूपी के फर्रुखाबाद में 80 फीसदी कम बारिश हुई है। यूपी के 29 जिलों में 50 फीसदी से भी कम बारिश हुई है। शाहजहांपुर, बस्ती और पूर्वी यूपी को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। स्थिति से निपटने के तरीकों पर किसानों को सही जानकारी देने के लिए जिला स्तर के अधिकारियों को किसानों और कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क बनाए रखने को कहा गया है।

सूखाग्रस्त करने में कोई जल्दबाजी नहीं होगी

सूखाग्रस्त करने में कोई जल्दबाजी नहीं होगी

उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद ने कहा कि सरकार स्थिति की निगरानी कर रही है और सूखा घोषित करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, "हम मानसून के हर पहलू को करीब से देख रहे हैं और प्रतिदिन डेटा एकत्र किया जा रहा है। बारिश कम हुई है लेकिन सूखे की घोषणा करना जल्दबाजी होगी क्योंकि हम अभी भी बुवाई का सीजन चल रहा है।''

अक्टूबर में लिया जाएगा सूखा घोषित करने पर निर्णय

अक्टूबर में लिया जाएगा सूखा घोषित करने पर निर्णय

अधिकारी ने कहा कि सूखा घोषित करने पर कोई भी निर्णय अक्टूबर में मानसून के बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार लिया जाएगा। तब तक संबंधित विभागों से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करें कि किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सकें। जहां अधिकारियों का दावा है कि कम बारिश के प्रभाव को रद्द करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है, वहीं किसानों की शिकायत है कि जमीनी स्तर पर कुछ नहीं किया जा रहा है।

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