लखनऊ की साहित्यिक विरासत को बढ़ाने के नाम पर तकरार
लखनऊ। अदब और तहजीब के शहर लखनऊ में अब शहर की रवायत और ऐतिहासिक विरासत को बढ़ावा देने को लेकर दो गुट आपस में भिड़ गए हैं। असल लखनऊ में 23-24 मार्च 2013 को लखनऊ लिटरेरी फेस्टिवल का आयोजन किया गया, इस कार्यक्रम का आयोजन संस्था के सचिव शमीम ए आरजू और उनके सहयोगियों ने मिलकर किया था। खुद आरजू का कहना है कि इस कार्यक्रम में कनक लता चौहान और जयंत कृष्ण उनके सहयोगी थे। कनक पर कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों के सत्कार और उनके प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, जबकि जयंत कृष्णा को मेंटर की भूमिका में अपना सहयोग देते थे।

लेकिन अगले वर्ष 2014 में लखनऊ एक्सप्रेशंस सोसाइटी की ओर से लखनऊ लिट्रेचर कार्निवाल का आयोजन कराया गया और इस संस्था के साथ कनक लता चौहान जुड़ी थीं। ऐसे में जहां पहले इन लोगों ने मिलकर शहर में सांस्कृति कार्यक्रम का आयोजन कराया तो अगले ही वर्ष इस इस कार्यक्रम के आयोजन में शामिल लोगों के बीच दो गुट बन गए और अब दोनों ही गुट एक दूसरे के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए हैं।

शमीम आरजू का कहना है कि उनकी सोसाइटी का नाम लखनऊ लिटरेरी फेस्टिवल है जिसे उन्होंने वर्ष 2013 में बनाया था, जबकि बाद में कनक लता ने इसी से मिलती जुलती सोसाइटी लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल की स्थापना की है। ऐसे में दोनों ही सोसाइटी का संक्षिप्त नाम एलएलएफ है, जिसके चलते आयोजकों और लोगों के बीच काफी भ्रम होता है। उनका कहना है कि यह कॉपीराइट नियमों का उल्लंघन है, जिसके खिलाफ हमने कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है। बावजूद इसके कि यह मामला कोर्ट में है सरकार इस विवाद के बीच कनक लता की संस्था की आर्थिक मदद कर रही है। इस बाबत कई बार पर्यटन विभाग के मुख्य सचिव को कई बार पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई लेकिन अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। जिसके बाद आखिरकार आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी गई है, जिसे तकरीबन 20 दिन हो गए हैं, पर्यटन विभाग की ओर से जवाब का अब भी इंतजार है।
क्या कहना है कनक लता का
वहीं इस पूरे प्रकरण पर कनक लता का कहना है कि हमारी सोसाइटी का नाम अलग है। पिछले वर्ष की ही तरह इस वर्ष भी हम 17 से 19 नवंबर तक इस लखनऊ लिटरेचर कार्निवाल का आयोजन करेंगे जोकि लखनऊ एक्सप्रेशन सोसाइटी की ओर से आयोजित किया जाएगा। वहीं इस पूरे आयोजन पर फंडिग के सवाल पर कनक लता का कहना है कि पिछले वर्ष हमें 10 लाख रुपए का सहयोग पर्यटन विभाग की ओर से मिला था और इस वर्ष भी हम फंडिंग के लिए भी दो से तीन विभागों से बातचीत कर रहे हैं।
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