MBC के साथ दलित मिले तो UP में बन सकते हैं किंगमेकर ?, ये है BSP से राजभर की नजदीकी का राज
लखनऊ, 26 जुलाई: उत्तर प्रदेश की सियासत अब नई करवट ले रही है। समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव से तलाक लेने के बाद SBSP चीफ ओम प्रकाश राजभर अब बीएसपी की मुखिया मायावती के साथ गठबंधन करना चाहते हैं। मायावती के साथ हाथ मिलाने के पीछे राजभर की सोची समझी रणानीति काम कर रह रही है। सूत्रों की माने तो ओम प्रकाश राजभर को लगता है कि यदि मायावती उनके साथ आ गईं तो पूर्वांचल में दलित-MBC समीकरण के सहारे वो 62 सीटों पर जीत दिला सकते हैं। बसपा के नेताओं का भी मानना है कि यदि दलित के साथ मोस्ट बैकवर्ड क्लास (MBC) का जुड़ाव हो गया तो वो यूपी में किंग मेकर की भूमिका में आ सकते हैं। हालांकि राजभर का नाम लिए बगैर मायावती के भतीजे आकाश ने उनको अवसरवादी करार देते हुए कहा है कि कुछ लोग मायावती के साथ अपना नाम जोड़कर अपन दुकान चलाना चाहते हैं।

मायावती की लगातार तारीफ क्यों कर रहे ओम प्रकाश राजभर
दरअसल राजभर ने कभी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। विधानसभा चुनाव के बाद ऐसा मौका दूसरी बार आया है जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी की तारीफ की है और इच्छा व्यक्त की है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए उनके साथ चुनाव लड़ा जा सकता है। एसबीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने कहा, "एसबीएसपी की विचारधारा बसपा के साथ मेल खाती है। हम दोनों दलितों, अति पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लिए काम करते हैं। ओम प्रकाश राजभर जी ने कांशीराम जी के साथ मिलकर काम किया था।"

मोस्ट बैकवर्ड क्लास-दलित गठजोड़ फायदेमंद
SBSP के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि राजभर मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी के जाटव-दलित वोट आधार वाली पार्टी है। पूर्वी यूपी में एसबीएसपी के सबसे पिछड़ी जातियों (एमबीसी) वोट बैंक के बीच चुनावी गठजोड़ को मजबूत करने के लिए बसपा के साथ गठबंधन फायदेमंद हो सकता है। उधर, यूपी विधानसभा में अपने घटते वोट शेयर और घटती संख्या को लेकर चिंतित, बसपा को 2024 के आम चुनावों से पहले खुद को फिर से जीवंत करने के लिए नए सामाजिक और राजनीतिक गठबंधन की आवश्यकता है। वह भी राजभर की इस नई थ्योरी के तहत आगे बढ़ सकती हैं।

मोस्ट बैकवर्ड क्लास से सहयोग न मिलने से हारी बसपा
पिछले महीने आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में बसपा प्रत्याशी शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली तीसरे स्थान पर रहे थे। जमाली के लड़ने से सपा को हार का सामना करना पड़ा था। बसपा के एक नेता ने कहहा कि जमाली एक स्थानीय नेता हैं और लोगों से जुड़े हुए हैं। उन्हें मुसलमानों और दलितों के वोट मिले, लेकिन हार गए क्योंकि सबसे पिछड़ी जातियों ने उन्हें वोट नहीं दिया और ये वोट बीजेपी को गए। अगर एमबीसी और दलित एक साथ आए तो वे किंगमेकर के रूप में उभर सकते हैं। हालांकि, पार्टी ने राजभर के प्रस्तावों पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।

बसपा के बड़े नेता के साथ दो बार बैठक कर चुके राजभर
एसबीएसपी के सूत्रों ने कहा कि राजभर ने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कम से कम दो बार बसपा के एक वरिष्ठ नेता के साथ उनके संगठनों के बीच गठजोड़ की संभावना का पता लगाने के लिए चर्चा की थी। अरविंद राजभर ने कहा, 'राजनीति में संभावनाएं हमेशा रहती हैं। हमारा काम प्रयास करना है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष की राय है कि बसपा प्रमुख से चर्चा होनी चाहिए। हमारी विचारधारा और सिद्धांत समान हैं। कांशीराम जी ने उन्हें (राजभर) राजनीति से परिचित कराया था और वे कांशीराम जी के विचारों से प्रेरित थे।''

दलित के साथ MBC मिला तो 62 सीटों पर मिलेगी जीत
अरविंद राजभर ने कहा कि अगर एमबीसी और दलित एक साथ आते हैं, तो मुस्लिम भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए शामिल हो सकते हैं। राजभर समुदाय राज्य की आबादी का 3 प्रतिशत हिस्सा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की लगभग 125 विधानसभा सीटों और एक दर्जन लोकसभा सीटों पर राजभर की मौजूदगी है। पार्टी नेतृत्व की गणना के अनुसार, अन्य समुदायों से थोड़ा अधिक समर्थन एसबीएसपी को 62 विधानसभा सीटों पर जीत दिला सकता है।

माया के खिलाफ कभी 18 दिन तक दिया था राजभर ने धरना
हालांकि ओम प्रकाश राजभर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बसपा से की थी। बाद में संगठन के वाराणसी जिला अध्यक्ष बने। वह 1991 में बसपा के टिकट पर वाराणसी की कोलसला सीट से विधानसभा चुनाव हार गए थे। 1995 में मायावती के सत्ता में आने के तुरंत बाद, राजभर ने कथित तौर पर एमबीसी के हितों की अनदेखी करने और दलितों के केवल एक वर्ग के लिए काम करने के लिए उनकी सरकार के खिलाफ 18 दिनों का धरना दिया था।

योगी सरकार ने दी है Y श्रेणी की सुरक्षा
बाद में उन्होंने बसपा छोड़ दिया और अपना दल में शामिल हो गए और इसके युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष बने। अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल ने जब उन्हें कोलासला से टिकट देने से इनकार कर दिया तो राजभर ने पार्टी छोड़ दी। इसके बाद 2002 में उन्होंने SBSP लॉन्च किया। राजभर पहली बार 2017 में विधायक बने जब पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा। पिछले हफ्ते, योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा उन्हें वाई-श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की थी।












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