ब्रह्मराक्षस के नाम पर 8 साल काल कोठरी में कैद रही मां-बेटी, पति ने दी खौफनाक यातना

कौशांबी में एक पति ने अपनी पत्नी और बेटी को 8 साल तक घर के अंदर बंद रखा। ब्रह्मराक्षस के वहम में उसने पत्नी और बेटी को सालों तक प्रताड़ित किया।

इलाहाबाद। कौशांबी इलाके में दहशत की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे। ब्रह्मराक्षस के खौफ से मां - बेटी को 8 साल तक काल कोठरी में कैद रखा गया। एक पुरोहित मंत्रों से ब्रह्मराक्षस को कैद करने आया तो मां - बेटी का हाल देखकर स्तब्ध रह गया। पुरोहित ने पुलिस को सूचना दी तो देर रात मां-बेटी को सनकी आरोपी के चंगुल से छुड़ाया जा सका। सनकी की यातना से मां - बेटी इतनी डर चुकी हैं कि इंसानों का चेहरा देखकर ही कांप जाती हैं। देर रात तक घर के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी रही।

11 साल की बेटी हो चुकी है 19 की

11 साल की बेटी हो चुकी है 19 की

अंधविश्वास की सनक में यह अजीबोगरीब घटना कौशांबी के चरवा बलीपुर टाटा गांव की है। यहां के मानिंद किसान सरजू तिवारी ने ब्रह्मराक्षस के नाम पर अपनी ही पत्नी और बेटी को आठ साल तक घर में बंधक बनाये रखा और उन्हें इतनी यातनायें दीं कि जानवरों से भी ऐसा व्यवहार कोई नहीं करता। सरजू ने अपनी पत्नी शशिकला के साथ अपनी बेटी कंचन लता को 11 साल की उम्र में कैद कर दिया था। देर रात जब उसे बाहर निकाला गया तो कंचन 19 साल की हो चुकी थी। आप सोच सकते हैं 11 साल की अबोध बच्ची को जब दुनिया देखनी समझनी थी तो उसकी नजरों के सामने सिर्फ कोठरी का अंधेरा होता था। वह मां से लिपट कर हर दिन रोती और सोचती कि क्या कभी वह घर से बाहर निकल पायेगी । मां-बेटी कभी घर से बाहर नहीं निकलने पाती थी। सरजू कहीं जाने से पहले कोठरी में बाहर से ताला लगा देता था। हफ्ते में दो-तीन दिन बमुश्किल खाना मिलता था।

हरियाणा से आये पुरोहित ने बुलाई पुलिस

हरियाणा से आये पुरोहित ने बुलाई पुलिस

सरजू तिवारी गांव के बड़े काश्तकारों में से एक साधन संपन्न किसान है। 13-14 बीघा खेती होने के साथ ही निजी नलकूप आदि भी है। बड़े बेटे की मौत के बाद किसान सरजू तिवारी के दिमाग में यह बात घर कर गई कि उसकी पत्नी शशिकला व बेटी कंचन लता पर ब्रह्मराक्षस सवार है। सरजू तिवारी इस अंधविश्वास से कभी बाहर नहीं निकल सका और जब वह इसी सनक में आगे बढ़ा तो कुछ तांत्रिक व ओझा ने भी कमाई के लिये सरजू के शक को शह दे दी। सरजू ने ब्रह्मराक्षस से निपटने के लिये पत्नी व बेटी को घर के एक कमरे में ही कैद कर दिया। दोनों को खाना नहीं देता था ताकि ब्रह्मराक्षस कमजोर हो जाये। आये दिन लात घूसे व डंडे से पीट देता था, जिससे डर कर ब्रह्मराक्षस भाग जाये। बिजली का करंट, यहां तक की सरजू ने आग से दोनों को ब्रह्मराक्षस के नाम पर जलाने की कई बार कोशिश की थी। पर ईश्वर ने हर बार किसी न किसी बहाने दोनों को बचा लिया। घर में हमेशा ताला बंद रहता और तिवारी की इस करतूत से पड़ोसी ही नहीं बल्कि पूरा गांव वाकिफ था, लेकिन जाने क्यों कोई कुछ बोल नहीं रहा था। एक दो महीने नहीं बल्कि पूरे आठ साल दोनों मां-बेटी घर की चारदीवारी में कैद रही और आगे भी जाने कब तक कैद रहती। लेकिन सरजू ने ब्रह्मराक्षस भगाने के लिये हरियाणा के एक चर्चित पण्डित अमित त्रिपाठी से मुलाकात की थी। शनिवार की शाम ईश्वर का दूत बनकर यहां आये। तो सरजू तिवारी के इस सनकी खेल से पर्दा उठाया और मां-बेटी को नया जीवन दिया।

विधायक, सीओ ने पहुंच बचाई जान

विधायक, सीओ ने पहुंच बचाई जान

बलीपुर टाटा गांव में सरजू के बड़े बेटे आलोक उर्फ रिंकू की आठ साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद से सरजू का परिजनों के प्रति व्यवहार बदल गया था। उसके अजीब रवैये से आजिज आकर उसका छोटा बेटा विजय घर से भाग निकला। छोटे बेटे के गायब होने के बाद सरजू बिल्कुल सनकी हो गया और अपनी पत्नी शशिकला व बेटी कंचन लता को घर में ही कैद कर दिया। हरियाणा के पुरोहित ने मां-बेटी से बातचीत की तो उसे समझते देर न लगी कि माजरा क्या है। पुरोहित अमित की सूचना पर शनिवार देर रात चरवा पुलिस के साथ सीओ चायल महेंद्र सिंह देव, चायल विधायक संजय गुप्ता मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दरवाजा खुलवाकर मां-बेटी को बाहर निकलवाया। उनको इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है, जहां कंचन की हालत ठीक नहीं है। सरजू का कहना है कि वह बहुत कमजोर हो चुकी है। बहुत संभव है कि इतने दिन कैद में रहने तो कारण उसकी मानसिक दशा भी बिगड़ चुकी हो। इंस्पेक्टर मो. हासिम ने बताया कि मां-बेटी का इलाज चल रहा है। हालत सामान्य होने पर ही सच्चाई का पता चल सकेगा।

आखिर क्यों पड़ोसी नहीं सुनते थे चीख?

आखिर क्यों पड़ोसी नहीं सुनते थे चीख?

घर की काल कोठरी में मां-बेटी आठ साल से सरजू की सख्त यातनायें झेल कर दर्द से चीखती थीं। लेकिन पड़ोसी कहते हैं कि उन्होंने कुछ सुना ही नहीं। पुलिस से लेकर विधायक भी पड़ोसियों के व्यवहार से वह दंग रह गये। एक सवाल उठा कि क्या सच में कोई ब्रह्मराक्षस था ? क्या पड़ोसी इसी वजह से चुप थे? सरजू तिवारी की करतूत और उसकी यातनाओं से पड़ोसी ही नहीं बल्कि पूरा गांव वाकिफ था, क्योंकि वह ब्रह्मराक्षस भगाने के लिए उनसे भी तरीके पूछते। कहीं ओझा तांत्रिक तो गांव वालों की मदद से ही आये थे। पुरोहित अमित त्रिपाठी ने बताया कि मां-बेटी को कई दिनों तक खाना भी नहीं नसीब होता था। जब पेट ही खाली रहेगा तो वह कैसे स्वस्थ रहेंगे। पत्नी ने अमित से बताया कि उन दोनो की हालत ठीक है। कोई ब्रह्मराक्षस नहीं है। उनके पति का ही दिमाग खराब है। इतना जानने के बाद पुरोहित ने आजाद करवाने के लिये पुलिस से संपर्क किया । जबकि सरजू तिवारी कहना है कि दोनों पर ब्रह्मराक्षस सवार है, अब अंजाम बहुत बुरा होगा।

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