मंत्रिमंडल के गठन से लेकर चीफ सेक्रेटरी की नियुक्ति तक कैसे असहज हुए CM योगी, जानिए 5 वजहें
लखनऊ, 26 मार्च: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की दोबारा सरकार तो बन गई है लेकिन योगी के मंत्रिमंडल का जो स्वरूप दिखाई दिया वह योगी को असहज करने वाली ही है। यूपी में दो डिप्टी सीएम बनाया जाना और उसमें भी खासतौर से ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य को जगह मिलना, यह योगी के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। ये दोनों चेहरे ऐसे हैं जो पहले भी योगी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं और आने वाले समय में यदि दोबारा उसी तरह की तस्वीर सामने आती है तो CM योगी के लिए काफी असहज स्थिति पैदा होगी। डिप्टी सीएम के अलावा भी कई और वजहें हैं जिनकी वजह से योगी अपने आपको असहज महसूस कर सकते हैं।

कोरोना में योगी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं पाठक
उत्तर प्रदेश में ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया गया है। ये ही ब्रजेश पाठक हैं जिन्होंने कोरोना के समय में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था। कोरोना के दौरान हुई अव्यवस्थाओं को लेकर पाठक ने उस समय योगी को एक पत्र लिखा था जिसमें कई तरह की चिंताएं व्यक्त की गईं थीं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दिनेश शर्मा की जगह ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाना एक तरह से योगी के लिए चुनौतिपूर्ण स्थिति पैदा करना है। ब्रजेश पाठक हमेशा कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहते हैं और उनको लेकर हमेशा मुखर भी रहते हैं। लिहाजा ब्रजेश पाठक और योगी की कमेस्ट्री कितनी कारगर होगी यह तो समय ही बताएगा।

केशव मौर्य की भी योगी से हो चुकी है अदावत
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में केशव मौर्य और ताकतवर होकर उभरे हैं। सिराथू से चुनाव हारने के बाद ऐसा लग रहा था कि केशव की कैबिनेट में एंट्री ही मुश्किल होगी लेकिन जिस तरह से उन्हें बीजेपी आलाकमान ने अपना आशीर्वाद दिया उससे भी योगी की टेंशन बढ़ सकती है। योगी के लिए मनमाफिक स्थिति तब होती जब उनके विरोधी परास्त होते या कमजोर होते लेकिन केशव के हारने के बाद ही वह डिप्टी सीएम के तौर पर अपना कद बरकरार रखने में कामयाब रहे। दूसरी यह कि पिछले कार्यकाल में भी योगी और केशव के बीच मतभेद को लेकर कई खबरें सामने आईं थी। तब मामला दिल्ली दरबार तक पहुंच गया था। किसी तरह मामले को शांत कराया गया।

एके शर्मा भी सरकार में आने में कामयाब रहे
पीएम मोदी के खास एके शर्मा भी योगी की दूसरी पारी में कैबिनेट में आने में सफल रहे। योगी के पहले कार्यकाल के दौरान जिस तरह से एके शर्मा को लेकर खबरें चलीं थी उससे योगी काफी नाराज हुए थे और यह नाराजगी उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के सामने जाहिर की थी। उस समय जो सियासी उठापटक हुई थी उसके बाद एके शर्मा को प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाकर मामले को आलाकमान ने अगले चुनाव के लिए दबा दिया था लेकिन इस बार चुनाव में जीत मिलने के बाद एके शर्मा योगी में कैबिनेट मंत्री के तौर पर आने में कामयाब रहे।

चीफ सेक्रेटरी की नियुक्ति से भी असहज हुए थे योगी
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जिस तरह से यूपी के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा की नियुक्ति चीफ सेक्रेटरी के पद पर हुई थी उससे भी ऐसा संदेश गया कि केंद्र सरकार योगी सरकार बनने से पहले ही एक ऐसा विश्वसनीय अफसर यूपी में बैठाना चाहती है जो यहां की प्रशासनिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रख सके। ठीक इसी तरह योगी के पहले कार्यकाल में भी शशि प्रकाश गोयल को केंद्र से लाकर यूपी में सीएम योगी का प्रमुख सचिव बनाया गया था। शशि प्रकाश गोयल भी पिछले पांच सालों से अपने पद पर बने हुए हैं। अब दोबारा चुनाव से पहले दुर्गाशंकर मिश्र का आना एक अलग कहानी की ओर इशारा कर रहा है।

योगी चाहेंगे स्वतंत्रदेव की तरह ही हो प्रदेश अध्यक्ष
योगी आदित्यनाथ के लिए यह जरूरी है कि यूपी का प्रदेश अध्यक्ष भी ऐसा हो ताकि संगठन और सरकार के बीच तालमेल बना रहे। वर्तमान में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह प्रदेश अध्यक्ष हैं लेकिन अब वह कैबिनेट मंत्री बनकर सरकार में जा चुके हैं। ऐसे में अब यूपी में बीजेपी का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा यह देखने लायक बात होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा। अगले प्रदेश अध्यक्ष को लेकर श्रीकांत शर्मा, दिनेश शर्मा, राम नरेश अग्निहोत्री और लक्ष्मीकांत वाजपेयी के नामों पर चर्चा हो रही है।












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