BHU हॉस्पिटल हेड पर फिजी महिला का बड़ा आरोप- 'उसने KISS किया, हमबिस्तर होने को कहा'
वाराणसी। लड़कियों के साथ हुए छेड़खानी के मसले को लेकर विवादों में आए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वाइस चासंलर जीसी त्रिपाठी अब एक नए मुसीबत में फंस गए हैं। यह मुसीबत बीते मंगलवार (26 सितंबर) को विश्वविद्यालय की एग्जिक्यूटिव काउंसिल की बैठक में डॉक्टर ओपी उपाध्याय को सर सुंदरलाल अस्पताल का प्रमुख के तौर पर नियुक्त करने को लेकर आई है। जी हां क्योंकि ओपी उपाध्याय को फिजी की एक कोर्ट यौन शोषण के मामले में दोषी ठहरा चुकी है। हालांकि उपाध्याय ने साल 2014 में फिजी के हाई कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की थी लेकिन उसने भी निचली अदालत का फैसला कायम रखा। एग्जिक्यूटिव काउंसिल के ही एक सदस्य ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाया है।

21 वर्षीय फिजी स्टूडेंट के साथ की थी गंदी हरकत
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के पास मौजूद फिजी की अदालत के आदेश की कॉपी के अनुसार 21 वर्षीय स्टूडेंट नासिनू ने 2013 में अदालत में बयान दिया था जिसमें उसने कहा था ''उन्होंने (उपाध्याय) मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने घर आने को कहा। जब मैं उनके घर गई तो उन्होंने मुझे हमबिस्तर होने को कहा।'' कोर्ट के फैसले के दस्तावेज में नासिनू का बयान यह भी बताता है कि ये सारी बातें हिंदी में ही हुई थीं। नासिनू के मुताबिक 'उन्होंने कमरे में मेरे कंधे पर हाथ रखा, जांघों पर हाथ फेरते हुए मेरे गाल पर किस भी की।'

उस वक्त फिजी नेशनल यूनिवर्सिटी में वाइस-चांसलर के एडवाइजर थे उपाध्याय
ये घटना 25 अगस्त 2012 को हुई जब उपाध्याय फिजी नेशनल यूनिवर्सिटी (एफएनयू) में वाइस-चांसलर के सलाहकार के तौर पर प्रतिनियुक्ति पर थे। फिजी की अदालत ने उपाध्याय को "अनैतिक और अमार्यादित हमले" का दोषी पाया। फिजी कोर्ट के फैसले के मुताबिक आरोपी ने पीड़ित महिला से कहा कि वह उसके कमरे में हमबिस्तर हो सकती है। उसके बाद आरोपी ने पीड़िता के ब्रेस्ट और थाई को टच किया। जिस महिला से आप फर्स्ट टाइम मिलते हो उसके स्तनों और जांघों को टच करना अनैतिक और अमार्यादित मंशा का साफ तौर पर जाहिर करता है।

ओपी उपाध्याय ने कहा- झूठा आरोप लगाया गया
नियुक्ति के बाद इंडियन एक्सप्रेस ने ओपी उपाध्याय से खास बातचीत की। उपाध्याय ने कहा, बीएचयू ने मेरे मामले में कानूनी सलाह ली है और ये फैसला हुआ कि किसी विदेशी कोर्ट का फैसला हमारे देश में कोई वैधता नहीं रखता। इसलिए सेलेक्शन कमेटी ने मेरा इंटरव्यू लिया गया और मुझे चुना। उपाध्याय ने कहा उस वक्त मैं (फिजी में) में अध्ययन अवकाश पर था। ये मामला जबरन धन उगाही का था। मैंने उसका विरोध किया तो मेरे ऊपर झूठा आरोप लगा दिया गया।

पावर खत्म होने से ठीक एक दिन पहले जीसी त्रिपाठी ने कर दिया काम
आपको बता दें कि जीसी त्रिपाठी का कार्यकाल 27 नवंबर को खत्म हो रहा है। मानव संसाधन मंत्रालय के नियमों के अनुसार किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर अपने कार्यकाल के आखिरी दो महीनों में कोई भी नियुक्ति नहीं कर सकते। इसके अनुसार 27 सितंबर को जीसी त्रिपाठी की नियुक्ति की पॉवर खत्म हो रही थी। लेकिन 26 सितंबर को उन्होंने ओपी उपाध्याय को सर सुंदरलाल अस्पताल का प्रमुख के तौर पर नियुक्त कर दिया।












Click it and Unblock the Notifications