HC का इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कुलपति को झटका, संस्कृत विभाग की डीफिल प्रवेश सूची रद्द
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुये इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति को बड़ा झटका दिया है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग में डीफिल प्रोग्राम में प्रवेश के लिए जारी प्रवेश सूची को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने कुलपति द्वारा प्रवेश के लिए गठित डॉक्टोरल प्रोग्राम कमेटी को भी भंग कर दिया है और नई कमेटी गठन पर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने अपने इस बड़े फैसले में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कुलपति के इस तरह से अपने शक्ति के दुरुपयोग पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा किया और कहा कि कुलपति को अपनी इस तरह की शक्तियों का प्रयोग केवल आपात स्थिति में करना चाहिए।

गौरतलब है कि डीफिल प्रोग्राम में एडमिशन के लिये इंटरव्यू देने वाली दो छात्राओ ने सलेक्शन न होने पर कुलपति के आदेश को हाईकोर्ट में चैलेंज किया था। जिस पर न्यायमूर्ति एस अग्रवाल ने सुनवाई करते हुये छात्राओ के पक्ष में फैसला सुनाया और डीफिल प्रोग्राम में प्रवेश के लिए जारी प्रवेश सूची को रद्द करते हुये नयी डॉक्टोरल प्रोग्राम कमेटी को भी भंग कर दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पुरानी डॉक्टोरल प्रोग्राम कमेटी की संस्तुति पर ही एडमिशन सूची जारी होगी और तीन सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी ।
क्या था मामला
सन 2016 में क्रेट में सफल अभ्यर्थियों ने संस्कृत विभाग में विफल प्रोग्राम के अंतर्गत प्रवेश हेतु आवेदन किया था। डॉक्टोरल प्रोग्राम कमेटी ने साक्षात्कार लिया और परिणाम जारी होने से पहले अनियमितता की शिकायत पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कुलपति ने रिजल्ट पर रोक लगा दी और डॉक्टोरल प्रोग्राम कमेटी को भंग करते हुये नयी कमेटी गठित कर दी।
नयी कमेटी ने मई 2017 में फिर से साक्षात्कार लिया और परिणाम जारी किया। चयन सूची में नाम न होने पर छात्रा क्षमा मिश्रा और अश्विता तिवारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कुलपति के पुरानी डॉक्टोरल प्रोग्राम कमेटी भंग करने के आदेश को चैलेंज किया। जिस पर सुनवाई पूरी करते हुये हाईकोर्ट ने डीफिल प्रोग्राम में प्रवेश के लिए जारी प्रवेश सूची को रद्द कर नयी गठित डॉक्टोरल प्रोग्राम कमेटी को भी भंग कर दिया है।












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