आपके खाने का बढ़ जाएगा जायका, हरी मिर्च दिखाएगी नया कमाल
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर ने हरी मिर्च की ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे हरी मिर्च अब हमे और भी जरूरी लगने लगेगी।
वाराणसी। हरी मिर्च का तीखापन भले ही लोगों के कान से धुएं निकाल दिया करती है लेकिन अभी यही मिर्च हमारे अन्नदाताओं को एक सफल व्यापार करने में सक्षम बना सकती है। अब हरी मिर्च की खेती करने वाले किसानों को मिर्च सूखने का डर नहीं सताएगा बल्कि अब किसान इन हरी-हरी मिर्चियों को धूप में सुखाकर भी उनसे मोटी रकम वसूल कर अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं। हरी मिर्च की खेती करने वाले हमारे किसानों के जीवन में खुशहाली लाने का ये प्रयास बीएचयू के कृषि वैज्ञानिकों के संग मिलकर यमन से आए छात्र मोहम्मद अल सवई ने की हैं। तो आइए आपको इस रिपोर्ट में दिखाते हैं की आखिर कान से धुएं निकालने वाली मिर्च कैसे हमारे अन्नदाताओं के चेहरे पर मुस्कान लाएगी। पेश है ये रिपोर्ट -

क्यों हरी मिर्च की खेती से चिंतित होते हैं किसान?
दरअसल हरी मिर्च की खेती करने वाले किसानों को ये डर हमेशा सताता है की मिर्च की फसल कटने के बाद अगर समय से ये बाजार में नहीं बिकी तो सूख जाएगी। ऐसे में इसकी खेती करने आले किसान हरी मिर्च को औने-पौने दामों में बेच दिया करते हैं।

क्या हुआ है अविष्कार?
मगर अब उन्हें डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर ने हरी मिर्च की ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे हरी मिर्च अब हमें पाउडर में भी मिल सकती हैं। यानि हरी मिर्च जल्द ही पाउडर के रूप में अब सबके भोजन में अपने स्वाद और गुण के साथ हाजिर होगी।

क्या है तकनीक?
ये तकनीक कृषि विज्ञान संस्थान में पढ़ रहे यमन से आए छात्र मोहम्मद अल सवई ने विकसित की है। मोहम्मद अल सेवई ने बताया कि उन्हें मिर्च के ऊपर रिसर्च करने के लिए जब कहा गया तो उन्होंने सोचा की मिर्च का पाउडर जो की घरों में इस्तमाल नहीं होता उस पर काम किया जाए और अल सवई इसे पाउडर बनाने में लग गए जिसे घरों में भी प्रयोग किया जा सके और आसानी से किसान भी इसे बना लें। तब अल सवई ने मिर्च पर शोध करना शुरू किया और उन्हें मिर्च के पाउडर के रूप में कामयाबी मिली।

अल सवई ने इस पाउडर को बनाने के लिए चार तरीके अपनाएं, मिर्च को पानी से सफाई के बाद इसकी डंठल निकाल देते हैं और लंबवत दो भागों में काट दिया जाता है। फिर पोटैशियम परमैगनेट नाम के कैमिकल में डाल दिया जाता है। फिर इसे निकालकर रूम टेंप्रेचर में छह घंटे तक रखा जाता है। इसके बाद मिक्सी ग्राइंडर में पाउडर बना लेते हैं। ये सब करने में इन्हें मात्र 7 दिन लगे।

क्या कहते हैं प्रोफेसर?
प्रो. अनिल चौहान के मुताबिक इनका लक्ष्य ये है कि किसानों को उनके उत्पाद की पूरी कीमत मिल सके। कई बार तापमान ज्यादा हो जाने के चलते मिर्च या अन्य फल खराब होने लगते हैं। अगर उनसे अन्य उत्पाद बना दिए जाए तो ये उस रूप में सुरक्षित भी रहेंगे और किसान को नुकसान नहीं होगा। हरी मिर्च का पाउडर इसी दिशा में एक कदम है।
क्या हैं फायदे?
इसके अलावा इस मिर्च पाउडर के सेहत को लेकर भी काफी गुण पाए जा रहे हैं और इसके उचित सेवन से स्वास्थ्य के ऊपर भी लाभकारी असर पड़ेगा। इसके हरे रंग में मिलने वाला हीमोग्लोबिन खून की कमी पर नियंत्रण करता है। ये उन महिलाओं के लिए खास लाभप्रद है, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान खून की कमी हो जाती है। इसके अलावा अस्थमा, रक्तचाप और मधुमेह के मरीजों को भी ये फायदा पहुंचाता है।

अब दाल में डालिए हरे मिर्च का तड़का
तो घरों में लाल मिर्च के पाउडर के तड़के को छोड़ हरी मिर्च से तड़का लगाने को तैयार हो जाइए, जल्द ही कृषि विज्ञान संस्थान इस तकनीक को बाजारों में लाने की तैयारी कर रही है। इस तरह स्वास्थ्य के साथ स्वाद भी मिलेगा तो दूसरी तरफ अन्नदाता किसान को उसकी मेहनत का फल भी मिलेगा।












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