Ghazipur News: अजय राय पहुंचे भाजपा कार्यकर्ता के घर, जानें क्यों उठाई एक करोड़ मुआवजे की मांग?
Ghazipur News: गाजीपुर जिले का रुकन्दीपुर गांव राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गया है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय शुक्रवार को पुलिस हमले में मृत भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय के परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई और सरकार से मदद की मांग की।
परिजनों से बातचीत में के बाद अजय राय ने कहा कि दिव्यांग सियाराम बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे। पेंशन पर निर्भर इस परिवार को न्याय और सहायता की जरूरत है। उन्होंने मुआवजा एक करोड़ रुपये और परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की।

उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के स्वागत में नेता व्यस्त दिखे लेकिन अपने ही कार्यकर्ता के परिवार के पास कोई नहीं पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस इस परिवार के साथ हर हाल में खड़ी रहेगी।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
अजय राय ने कहा कि अब तक केवल औपचारिक कदम उठाए गए हैं। कुछ पुलिसकर्मी हटाए गए या निलंबित हुए लेकिन वास्तविक सजा किसी को नहीं मिली। कहा कि यह लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध है जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज हो और उन्हें जेल भेजा जाए। अजय राय ने आरोप लगाया कि थाने में हुई मारपीट यह बताने के लिए काफी है कि प्रदेश की आम जनता कितने भय में जी रही है।
हिटलरशाही और जातिगत राजनीति का आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह शासन पूरी तरह हिटलरशाही की तरह चल रहा है। व्यापारी वर्ग को लाभ पहुंचाया जा रहा है और जनता पर पुलिस का डंडा बरस रहा है।
दावा किया कि योगी सरकार जाति विशेष के लोगों को चिह्नित कर निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि जब दिव्यांग कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं है तो साधारण नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।
घटनास्थल पर दिखाया वीडियो
मुलाकात के दौरान अजय राय ने पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को कथित लाठीचार्ज का वीडियो भी दिखाया। उनका कहना था कि जब वीडियो मौजूद है तो जांच केवल औपचारिकता है और दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस दौरान कांग्रेस के दर्जनों नेता और कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद रहे। जिला अध्यक्ष सुनील राम, प्रदेश सचिव फसाहत हुसैन और पूर्व विधायक अमिताभ अनिल दुबे सहित कई नेताओं ने परिवार को सांत्वना दी।
जानें क्या है यह पूरी घटना?
दरअसल, गांव में घटना की शुरुआत 9 सितंबर को हुई थी। गांव रुकन्दीपुर में बिजली का खंभा लगाने को लेकर प्रधान और पूर्व प्रधान पक्ष में विवाद हुआ। बाद में एक पक्ष के लोग थाने पहुंचे और वहां धरना देने लगे।
पुलिस ने समझाने की कोशिश की कि मामला बिजली विभाग का है मगर लोग मानने को तैयार नहीं थे। देर रात अचानक बिजली गुल हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर लाइट कटवाई और धरना दे रहे लोगों को पीटा गया।
नहीं बच पाए सियाराम, घर में पसरा मातम
लाठीचार्ज में अफरा-तफरी मच गई। दिव्यांग सियाराम भाग नहीं पाए और जमीन पर गिर गए। ग्रामीणों के मुताबिक उन्हें बुरी तरह पीटा गया। उनके शरीर पर गहरे निशान थे और हालत गंभीर होती चली गई।
इलाज के दौरान उनकी स्थिति और बिगड़ गई। लगातार दो दिन तक इलाज चलता रहा लेकिन गुरुवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। परिवार अब न्याय और सहायता की उम्मीद में बैठा है वहीं घटना को लेकर पूरे गांव में शोक का माहौल है।












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