Ghazipur Loksabha By Election: आज़मगढ़ की तरह Ghazipur में BJP की राह आसान कर सकती है BSP?
Ghazipur Loksabha By Election का ऐलान निर्वाचन आयोग की तरफ से कभी भी हो सकता है। सभी दल हालांकि अभी निकाय चुनाव में जुटे हैं लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि आयोग जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी कर सकता है।

Ghazipur Loksabha Seat: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने के बाद तीन लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। इनमें से आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट शामिल थी। गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी के एक मामले में दोषी पाए जाने के बाद उनकी सदस्यता चली गई है। उनकी सदस्यता रद्द होने का नोटिफिकेशन भी लोकसभा सचिवालय की तरफ से जारी किर दिया गया। अब इस सीट पर कभी भी उपचुनाव का ऐलान किया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो गाजीपुर में यदि लोकसभा उपचुनाव होता है तो यहां भी बसपा आमगढ़ की तरह ही बीजेपी की राह आसान कर सकती है।
गाजीपुर में कभी भी हो सकता है उपचुनाव का ऐलान
बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी के भाई और गाजीपुर से बसपा के सासंद अफजाल अंसारी को चार साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता चली गई है। अब इस सीट पर कभी भी चुनाव का ऐलान हो सकता है। इस लिहाज से सभी पार्टियां अंदरखाने अपनी अपनी तैयारियों में जुट गई हैं। पिछली बार सपा-बसपा के गठबंधन की वजह से बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था लेकिन इस बार सपा और बसपा की राहें अलग अलग हैं इसलिए यहां चुनाव के समीकरण पूरी तरह से बदले हुए दिखाई देंगें।
आजमगढ़ की तरह गाजीपुर में मुस्लिम कार्ड खेल सकती है बीएसपी
2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा ने मुस्लिम कार्ड खेलकर बीजेपी को हराने में कामयाबी हासिल की थी। हालांकि इस चुनाव में बसपा को सपा का साथ मिला था जिसकी वजह से उसकी राह असान हो गई थी। तब बसपा के उम्मीदवार अफजाल अंसारी को दलित-मुस्लिम-यादव वोट बैंक के सहारे जीतने में सफल रहे थे। लेकिन इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि बसपा गाजीपुर में किसको मैदान में उतारती है। बीजेपी की हार जीत का बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगी की बसपा का प्रत्याशी कौन होगा।
मुस्लिम कार्ड से सपा को होगा नुकसान, बीजेपी को मिलेगा फायदा
राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि बसपा यदि पिछली बार की तरह किसी मुस्लिम चेहरे को मैदान में उतारती है तो बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित होगा। इस बार गाजीपुर में सपा भी अपना उम्मीदवार उतारेगी। बसपा यदि सपा के उम्मीदवार के आधार पर अपना फैसला करती है तो यहां के समीकरण उलट सकते हैं। हालांकि अभी गाजीपुर उपचुनाव को लेकर कोई भी पार्टी बोलने की स्थिति में नहीं है। नेताओं का कहना है जबतक चुनाव की घोषणा नहीं हो जाती तब तक अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।
आजमगढ़ में बसपा ने गुड्डू जमाली को मैदान में उतारा था
आजमगढ़ में हुए उपचुनाव में भी बीजेपी की जीत इसीलिए हो गई कि बसपा ने गुडुडू जमाली को मैदान में उतार दिया। जमाली की वजह से मुस्लिम वोट बैंक सपा से छिटक गया और बीजेपी जीतने में कामयाब हो गई। आजमगढ़ में जमाली की अपनी प्रतिष्ठा है और वह एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं। आजमगढ़ में जमाली को मुस्लिम का अच्छा खासा समर्थन मिला जिससे सपा की मुश्किलें बढ़ गईं और पूर्व सीएम अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव को हार का सामना करना पड़ा था।
रामपुर में बसपा ने बीजेपी के खिलाफ नहीं उतारा था प्रत्याशी
बसपा ने जिस तरह आजमगढ़ में उम्मीदवार उतारकर बीजेपी की राह आसान बनाई वहीं दूसरी ओर रामपुर में आजम की सदस्यता जाने के बाद हुए उपचुनाव में बसपा ने चुनाव से किनारा कर लिया था। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि रामपुर में बसपा ने उम्मीदवार न उतारकर भी बसपा ने पिछले दरवाजे से बीजेपी की मदद की थी। यहां बसपा का उम्मीदवार न होने की वजह से दलित समाज का वोट बीजेपी के पक्ष में चला गया जिससे बीजेपी की जीत की राह और आसान हो गई। बीजेपी यहां ध्रुवीकरण कराने में कामयाब हो गई थी।












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