माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा, लगाया 5 लाख का जुर्माना
गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर एमपी/एमएलए कोर्ट ने शुक्रवार (27 अक्टूबर) को कपिल देव सिंह की हत्या और 2010 में मीर हसन की हत्या के प्रयास के मामले में 10 साल की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्तार अंसारी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया है। इसी मामले में सोनू यादव को 5 साल की सजा सुनाई गई है और दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अंसारी को पिछले 13 महीनों में उसके खिलाफ दर्ज छह अलग-अलग मामलों में भी दोषी ठहराया गया है।

कपिल देव सिंह और मीर हसन दोनों मामलों में मुख्तार अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। यूपी पुलिस के विशेष महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि अंसारी को इससे पहले 5 जून को वाराणसी एमपी/एमएलए अदालत ने दोषी ठहराया था। उन्हें यूपी कांग्रेस प्रमुख अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
कुछ हफ्ते पहले, प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्तार अंसारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत 73.43 लाख रुपये से अधिक की जमीन, एक इमारत और बैंक जमा राशि कुर्क की थी। इन संपत्तियों का कुल पंजीकृत मूल्य 73,43,900 रुपये है।
अहम बात यह है कि, राज्य पुलिस ने अब तक गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधानों के तहत अंसारी और उसके गिरोह के सदस्यों की 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। कुमार ने कहा, 284.77 लाख रुपये की संपत्ति को ध्वस्त कर दिया गया और अंसारी और उनके लोगों से अवैध कब्जे मुक्त कराए गए।
दरअसल, 19 अप्रैल 2009 को हुए कपिल देव सिंह हत्याकांड और 24 नवंबर 2009 को मीर हसन अटैक केस में मुख्तार अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज किया गया था। इन मामलों में मुख्तार अंसारी को कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया था। पुलिस ने इन दोनों ही मामले में मुख्तार अंसारी को 120 बी यानी साजिश रचने का आरोपी बनाया था, लेकिन पुलिस साबित करने में असफल रही थी। जिसके चलते मुख्तार को प्रमुख केस में कोर्ट ने बरी कर दिया था। मगर, अब गैंगस्टर एक्ट के केस में कोर्ट ने दोषी करार दिया है।












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