पिछले 29 सालों से यूपी के इस जिले की पुलिस नहीं मनाती 'जन्माष्टमी', आखिर क्यों कहते इसे 'काला दिवस'?
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जहां एक तरफ पूरा देश कृष्ण के रंग में रंगा हुआ है, हर तरफ कान्हा के जन्म की तैयारियां चल रही हैं, वहीं कुशीनगर की पुलिस इसे काली रात के रूप मनाती है। दरअसल, 29 साल पहले यूपी के इस जिले में जन्माष्टमी की रात ऐसा कुछ घटा था कि आज भी यहां की पुलिस जन्माष्टमी नहीं मनाती।
बता दें कि कुशीनगर में जन्माष्टमी का दिन एक अभिशाप माना जाता है। वैसे तो कुशीनगर जिले की पुलिस लाइन मे वर्षो पूर्व भगवान कृष्ण के जन्मदिन के मौके पर झांकी सजाई जाती थी, लेकिन उसी दिन पुलिसकर्मियों के शहीद होने के कारण जनपद कि पुलिस अब इसे 'काला दिवस' के रूप मे मानाती है।

बात 30 अगस्त 1994 की है, इस दिन भी जन्माष्टमी की तैयारियां जोरो पर थी। लेकिन अचानक देर रात बिहार बार्डर से लगे गांव पचरुखियां में डकैतों के आने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना पर तत्कालीन एसपी बुद्धचंद ने पडरौना कोतवाल योगेंद्र प्रताप, तरयासुजान के थानेदार अनिल पांडे व कुबेरस्थान के थानेदार राजेंद्र यादव को वहां भेजा।

रात लगभग 9:30 बजे दो बार में नाव से बांसी नदी पार कर पुलिस टीम जब गांव में पहुंची तो डकैतों का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद नाव से पुलिस की एक टीम वापस आ गई। लेकिन जब दूसरी टीम नाव से वापस लौट रही थी, तभी डकैतों ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया।
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इस हमले में बदमाशों द्वारा फेंके गए बम और ताबड़तोड़ फायरिंग में गोली लगने से दारोगा अनिल पांडे, राजेंद्र यादव, कांस्टेबल नागेंद्र पांडे, खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव, परशुराम गुप्ता की मौत हो गई। नाविक भुखल को भी गोली लगी थी। तभी से जिले की पुलिस यह पर्व नहीं मनाती है। 6 पुलिसकर्मियों की मौत के बाद से आजतक इस दिन को 'काला दिवस' के रूप मे मनाया जाता है।












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