flashback 2022: UP Assembly Election में BJP को मिली बड़ी जीत तो उपचुनाव से मिला बड़ा सबक़
साल 2022 बीजेपी के लिए अच्छा तो रहा लेकिन जाते जाते वह उपचुनाव में हार का गम भी दे गया। खतौली में अपनी सीट गंवा चुकी बीजेपी पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। जाट बाहुल्य सीट हारना बीजेपी के अच्छे संकते नहीं हैं।

flashback 2022: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में बीजेपी (Bhartiya Janta Party) को शानदार सफलता मिली थी। 2022 में हुए इस चुनाव में बीजेपी ने 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। यूपी में लंबे समय बाद कोई सरकार लगातार दूसरे कार्यकाल में पुर्ण बहुमत पाने में कामयाब हुई थी। सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम मोदी की नीतियों में उत्तर प्रदेश की जनता ने एक बार फिर विश्वास व्यक्त किया और विपक्ष को पूरी तरह से नकार दिया था। विपक्ष की तरफ से अखिलेश यादव, बसपा और कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए पूरा जोर लगाया लेकिन वो सफल नहीं हुए और योगी की अगुवाई में यूपी में दूसरी बार बीजेपी की पुर्ण बहुमत की सरकार आसानी से बन गई।
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विधानसभा चुनाव में मिली जीत लेकिन आंकड़ा घटा
उत्तर प्रदेश में साल 2022 के शुरू होते ही बीजेपी ने दोबारा सरकार बनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। जिस तरह से सीएम योगी और पीएम मोदी ने यूपी को केंद्र बनाकर प्रचार किया उसका लाभ बीजेपी को मिला। बीजेपी की सरकार यूपी में 37 साल बाद दोबारा सरकार बनाने वाली पार्टी बन गई। 2017 के विधानसभा चुनाव में जहां बीजेपी अकेले अपने दम पर 300 के आंकड़े को पार कर गई थी वहीं इस बार वह 255 तक ही पहुंच पाई। सहयोगियों के साथ मिलकर वह 273 के आंकड़े तक पहुंचने में कामयाब रही। चुनाव आयोग के आंकड़ो के अनुसार इस चुनाव में बीजेपी को 41फीसदी से ज्यादा वोट मिले जबकि दूसरे नंबर पर रहने वाली सपा को 32 फीसदी वोट हासिल हुए।

सीएम योगी के काम पर जनता ने लगाई मुहर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में बीजेपी की जीत कई मायने में खास रही। पिछले चुनाव में जहां बीजेपी, समाजवादी पार्टी को सत्ता से हटाने के लिए चुनाव लड़ रही थी। वहीं इस बार वह अपनी सत्ता बचाने के लिए लड़ रही थी। खासतौर से 2017 से 2022 के बीच आई वैश्विक महामारी कोरोना का भी असर पड़ा। कारोना के दौरान यूं तो यूपी में बहुत मौतें हुईं लेकिन इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से आम जनता के साथ खड़े नजर आए उसका लाभ भी सरकार को मिला। कुल मिलाकर यूं कहा जाए तो ये चुनाव योगी के चेहरे और बीजेपी सरकार के काम पर लड़ा गया जिसपर जनता ने मुहर लगाई।

चुनाव के बाद यूपी बीजेपी को मिले दो नए चेहरे
चुनाव में जीत के बाद बीजेपी संगठन में दो परिवर्तन हुए। चुनाव में जीत के शिल्पी कहे जाने वाले संगठन मंत्री सुनील बंसल से यूपी का प्रभार लेकर उन्हें दिल्ली भेज दिया गया। दिल्ली में उन्हें रा@टीय महासचिव बनाया गया और दो राज्यों का प्रभार भी सौंप दिया गया। बंसल के जाने के बाद यूपी बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को भी पद से हटा दिया गया और उनकी जगह पहली बार किसी जाट चेहरे को मौका दिया गया। जाट नेता भूपेंद्र चौधरी ने यूपी बीजेपी की कमान संभाली। ऐसा कहा गया कि जाटों को खुश करने के लिए मोदी ने जाट चेहरे पर दांव लगाया है। इधर संगठन मंत्री सुनील बंसल के जाने के बाद उनकी जगह एबीवीपी के कद्दावर नेता धरमपाल सिंह को संगठन मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।

रामपुर-आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी ने सपा का गढ़ तोड़ा
विधाानसभा चुनाव के बाद बदले हुए समीकरणों के बीच रामपुर और आजमगढ़ में लोकसभा का उपचुनाव हुआ जो बीजेपी के साथ ही सपा के लिए भी काफी अहम था। आजमगढ़ से सांसद अखिलेश यादव ने सांसदी से इस्तीफा देकर मैनपुरी के करहल विधानसभा से चुनाव लड़ा था। विधायक बनने के बाद वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बन गए। वहीं दूसरी ओर आजम को एक मामले में सजा होने की वजह से उनकी सांसदी चली गई और इस नाते रामपुर की सीट खाली हो गई। दोनों सीटों पर उपचुनाव हुआ जिसमें बीजेपी ने सपा से यह दोनों सीटें छीन लीं। इस हार का संदेश दूर तक गया और कहा जाने लगा कि अब यूपी में समाजवादी की नांव हिचकोले खा रही है।

खतौली-मैनपुरी की हार ने किया सोचने के लिए मजबूर
रामपुर-आजमगढ़ में किला फतह करने के बाद बीजेपी काफी उत्साहित दिख रही थी। वहीं दूसरी ओर सपा को करारा झटका लगा था। बीजेपी ने इस जीत के बाद यूपी में अगले लोकसभा चुनाव में 75 प्लस सीटें जीतने का टारगेट रखा है। बीजेपी के नेताओं का दावा है कि बीजेपी इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगी। इसी बीच रामपुर सदर-खतौली विधानसभा सीट के साथ ही मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। इसमें बीजेपी को मैनपुरी में हार का सामना करना पड़ा जबकि खतौली की सीट को आरएलडी-सपा के गठबंधन ने छीनकर खतरे की घंटी बजा दी है। इधर मैनपुरी में शिवपाल-अखिलेश की एकजुटता की वजह से बीजेपी अपनी रणनीति में सफल नहीं हुई।












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