देवी पूजन के लिए गंगाजल लेने गए पांच युवक डूबे, दो की मौत
मिर्जापुर। मिर्जापुर जिले के जिगना थाना क्षेत्र में शारदीय नवरात्र के पहले ही दिन देवी पूजन के लिए गंगा जल लेने गए पांच किशोर डूब गए। डूबने से दो किशोरों की मौके पर ही मौत हो गई। तीन घंटे बाद दोनों का शव बरामद कर लिया गया। जबकि स्नान कर रही गांव की महिलाओं ने साड़ी फेंककर डूब रहे तीन किशारों की जिंदगी बचा ली। ये किशोर गुरुवार की दोपहर में हरगढ़ गांव में स्थित विमलेश्वरनाथ मंदिर घाट पर से गंगा जल लेने गए थे। घटना जिगना थाना क्षेत्र की है। घटना से हरगढ़ के साथ ही आस-पास के गांवों में भी कोहराम मच गया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को ढांढस बंधाया।

महिलाओं ने साड़ी फेंक कर तीन युवकों को बचाया
जिगना थाना के करनी भांवा गांव के भिटरिया मजरा के करीब डेढ़ सौ की संख्या में व्रत रखने वाली महिलाएं और युवक हरगढ़ घाट पर दोपहर में गंगा स्नान करने गए थे। स्नान करने के दौरान गांव के पांच किशोर नाव पर सवार होकर कुछ दूरी पर जाकर मिट्टी निकालने के लिए गंगा में कूद गए। लेकिन कीचड़ में फंसने से पांचों डूबने लगे। यह देखकर घाट पर मौजूद महिलाओं ने शोर मचाने के साथ ही अपनी साड़ी गंगा में फेंककर डूबते को तिनके का सहारा देकर बचाना शुरू कर दिया। महिलाओं की त्वरित सक्रियता से 17 वर्षीय पंकज, 19 वर्षीय रोहित और 18 वर्षीय दिनेश को बचा लिया गया।

दोनो छात्रो का घंटे भर बाद मिला शव
गांव के ही 16 वर्षीय हरिओम पुत्र अनिल और 18 वर्षीय अरुण पुत्र संजय का पता नहीं चला। डूबे दोनों किशोर लोकनाथ मिश्र इंका बभनी में क्रमश- कक्षा नौ और इंटर के छात्र थे। घटना की सूचना पाकर पहुंचे थाना प्रभारी मनोज कुमार ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से दोनों की खोजबीन शुरू कराया। तीन घंटे बाद तीन गंगा में डूबे हरिओम और अरुण को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया। प्राईवेट अस्पताल ले जाने पर डाक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इससे दोनों के परिवार में कोहराम मच गया। घटना की जानकारी होने पर आस-पास के गांवों के लोग भी जुट गए। ग्रामीणों ने घटना पर दुख प्रकट किया। थानाध्यक्ष ने शवों को पीएम के लिए भेज दिया।

मौत के मुंह से निकलकर आए तीन किशोर रहे सन्न
शारदीय नवरात्र के पहले दिन देवी पूजन के लिए गुरुवार की दोपहर में हरगढ़ गांव में स्थित विमलेश्वरनाथ मंदिर घाट पर गंगा जल लेने के दौरान मौत के मुंह से निकलकर आए तीन किशोर दो घंटे तक हक्के-बक्के रहे। उनके समझ में ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और क्या बोलें। परिजनों और पुलिस के काफी समझाने के बाद तीनों किशोरों की जुबान खुली और वह घटना के बारे में बताया। घटना में उनके ही दो दास्तों की मौत से भी वे सदमें में थे।












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