Rakhi Shamra कौन हैं, जिन्होंने फिरोजाबाद DM रमेश रंजन पर रिश्वत में Iphone लेने का गंभीर आरोप लगाया?
Firozabad DM Ramesh Ranjan: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में प्रशासनिक महकमे के अंदर एक बड़ा विवाद सामने आया है। टूंडला तहसील की 33 वर्षीय तहसीलदार राखी शर्मा ने जिले के युवा डीएम रमेश रंजन (IAS, 2013 बैच) पर भ्रष्टाचार, मानसिक उत्पीड़न, सैलरी रोकने और रिश्वत के रूप में महंगा आईफोन और आईवॉच लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
आरोपों के बाद शासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राखी शर्मा को राजस्व परिषद मुख्यालय लखनऊ अटैच कर दिया है, जबकि विवादित जमीन मामले की जांच अब मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है।
ये मामला सिर्फ दो अधिकारियों की व्यक्तिगत रार नहीं है। यह यूपी प्रशासन में पदानुक्रम, महिलाओं के साथ व्यवहार, भ्रष्टाचार की शिकायतों को दबाने की कोशिश और सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है। राखी शर्मा ने सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से सीधे न्याय की गुहार लगाई, वीडियो जारी किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सबूतों का दावा किया। आइए इस पूरी कहानी को जड़ से समझते हैं कि राखी शर्मा कौन हैं, आरोप क्या हैं, डीएम रमेश रंजन के मामले के व्यापक मायने...

Who Is Rakhi Shamra: राखी शर्मा कौन हैं?
राखी शर्मा मूल रूप से आगरा के बल्केश्वर इलाके की रहने वाली हैं। वे प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारी हैं। 4 सितंबर 2024 से वे टूंडला तहसील में तहसीलदार के पद पर तैनात थीं। वे सरकारी गेस्ट हाउस में रहती हैं। 9 महीने से ज्यादा समय तक टूंडला में काम करने के दौरान उन्होंने एक विवादित जमीन मामले की जांच की थी, जिसमें कलेक्ट्रेट के कुछ कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
राखी शर्मा ने दावा किया कि जब उन्होंने निष्पक्ष जांच रिपोर्ट तैयार की, तो डीएम रमेश रंजन और उनके करीबी स्टाफ ने उन्हें रिपोर्ट को 'मैनेज' करने का दबाव डाला। रिपोर्ट में तीन कर्मचारियों (ओएसडी शैलेंद्र शर्मा, एक पेशकार और एक सीआरए) पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। जब उन्होंने दबाव नहीं माना, तो उत्पीड़न शुरू हो गया।
DM Ramesh Ranjan Vs Teh Rakhi Sharma Allegations: आरोपों का पूरा विवरण:- आईफोन, सैलरी और उत्पीड़न
राखी शर्मा के अनुसार पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है:-
- जुलाई 2025 में टूंडला तहसील में एक एप्लिकेशन आई, जिसमें डीएम ऑफिस के तीन कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप था।
- राखी ने डीएम को शिकायत की। डीएम और उन्होंने कर्मचारियों से समाधान करने को कहा, लेकिन उल्टा ये लोग राखी के पीछे पड़ गए।
- 8 महीने तक उनकी सैलरी रोक दी गई। बिना उनका पक्ष सुने एकतरफा एडवर्स एंट्री (प्रतिकूल प्रविष्टि) दे दी गई।
- दबाव बढ़ता गया। ओएसडी शैलेंद्र शर्मा के माध्यम से पहले आईवॉच, फिर 1.75 लाख रुपये का आईफोन मांगा गया।
- 4 नवंबर 2025 की रात को आगरा के एक शोरूम को खासतौर पर देर रात तक खुलवाकर फोन खरीदा गया। राखी ने सैलरी न मिलने के बावजूद इंतजाम करके फोन दिया। उन्होंने दावा किया कि वह आईफोन अभी भी डीएम रमेश रंजन इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके पास बिल व अन्य सबूत मौजूद हैं।
- फोन देने के बाद भी दबाव जारी रहा। उन्हें बार-बार कैंप हाउस बुलाया जाता था। एक बार तो 2 घंटे तक उन्हें 'बंधक' बनाकर रखा गया और हाईकोर्ट में दायर याचिका वापस लेने को कहा गया।
- 26 फरवरी 2026 को परेशान होकर राखी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। अगले दिन रात में ट्रेजरी खुलवाकर सैलरी जारी कर दी गई।
- 16 अप्रैल 2026 को डीएम ने उनका तबादला टूंडला से शिकोहाबाद कर दिया। राखी का आरोप है कि उन्हें अभी तक आधिकारिक ट्रांसफर लेटर नहीं मिला, लेकिन उनकी जगह दूसरे तहसीलदार को भेज दिया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राखी शर्मा ने भावुक होकर कहा, 'मैं जो कर सकती थी, किया। जो नैतिक रूप से गलत था, वो नहीं किया। अब न्याय चाहिए।' उन्होंने कुछ 'अनैतिक आदेशों' का जिक्र भी किया, लेकिन विस्तार से नहीं बताया।
Who Is DM Ramesh Ranjan: कौन हैं डीएम रमेश रंजन?
रमेश रंजन 2013 बैच के IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 18 फरवरी 1987 को पटना, बिहार में हुआ था, लेकिन वे उत्तर प्रदेश कैडर के हैं। उन्होंने बीटेक किया है। मार्च 2024 से वे फिरोजाबाद के डीएम और कलेक्टर हैं। युवा उम्र (लगभग 39 वर्ष) में जिले की कमान संभालने वाले रंजन को पहले कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का अनुभव है। प्रशासनिक अधिकारी उन्हें कुशल बताते हैं, लेकिन इस मामले में उन्होंने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। कुछ रिपोर्ट्स में आरोपों को 'बेबुनियाद' बताया गया है।
शासन की कार्रवाई
- शनिवार रात 10:17 बजे जिला सूचना अधिकारी ने ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप पर राखी शर्मा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होने की जानकारी दी।
- उन्हें तत्काल प्रभाव से लखनऊ के राजस्व परिषद मुख्यालय अटैच कर दिया गया।
- विवादित जमीन मामले की जांच दोबारा कराने के आदेश दिए गए। अब यह जांच मंडलायुक्त लखनऊ करेंगे।
- राखी शर्मा ने सीएम योगी से मामले की निष्पक्ष जांच और अपनी सुरक्षा की मांग की है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और व्यापक मायने?
यह मामला यूपी प्रशासन में कई सवाल खड़े करता है:-
- महिला अधिकारी के साथ व्यवहार: एक PCS महिला अधिकारी पर इतना दबाव और उत्पीड़न अगर सच है, तो यह सिस्टम में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर सवाल उठाता है।
- भ्रष्टाचार की शिकायत दबाना: तहसीलदार द्वारा की गई जांच को दबाने के लिए रिश्वत की मांग का आरोप गंभीर है। अगर साबित हुआ तो यह बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का संकेत दे सकता है।
- पदानुक्रम का दुरुपयोग: डीएम जैसे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सबऑर्डिनेट पर दबाव बनाना और सैलरी रोकना नियमों के खिलाफ है।
- ट्रांसफर की राजनीति: तबादला आदेश जारी होने के बाद आरोप लगना कई बार 'ट्रांसफर के बदले बदला' की शिकायतें लाता है। यहां भी यही सवाल उठ रहा है।
- सबूतों का दावा: राखी शर्मा ने बिल, ऑडियो और अन्य डिटेल्स का जिक्र किया है। अगर ये सबूत मजबूत निकले, तो जांच में बड़ा खुलासा हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ऐसे में यह मामला न सिर्फ व्यक्तिगत, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। अगर आरोप साबित हुए तो डीएम स्तर पर कार्रवाई अपरिहार्य होगी। वहीं, अगर आरोप झूठे साबित हुए तो राखी शर्मा पर भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। मामला अभी जांच के अधीन है। राखी शर्मा लखनऊ में अटैच हैं। डीएम रमेश रंजन फिरोजाबाद में अपने पद पर बने हुए हैं।












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