Etawah Controversy: अखिलेश यादव का बड़ा बयान- 50 लाख लेते हैं कुछ कथा वाचक, श्रद्धा अब अमीरों का खेल?
Etawah Controversy: उत्तर प्रदेश में कथावाचकों को लेकर मचे बवाल ने अब सियासी रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले में कूदते हुए कथावाचकों की मोटी फीस और जातीय भेदभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को लखनऊ में सपा कार्यालय में उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी।
अखिलेश ने कहा कि आज देश में कुछ कथावाचक ऐसे हो गए हैं जिनकी फीस 50 लाख रुपये से भी ऊपर है। आम ग्रामीण इन कथाओं का खर्च वहन नहीं कर सकता, इसलिए वह उन्हीं लोगों को बुलाता है जो साधारण जीवन जीते हैं और कम फीस में धर्मकथा करते हैं।

बात करते हुए उन्होंने सीधे धीरेंद्र शास्त्री का नाम लिया और दावा किया कि वे कथाओं के लिए मोटी रकम अंडर टेबल लेते हैं। अखिलेश का कहना था कि कथा करवाना अब एक धर्म नहीं बल्कि बिज़नेस बन गया है, जिससे साधारण आदमी खुद को ठगा महसूस करता है।
इटावा की घटना से उठा विवाद
सपा प्रमुख ने कहा कि इटावा में कथावाचकों के साथ जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं लखनऊ में इन कथावाचकों को बुलाकर सम्मानित किया ताकि समाज में बढ़ती जातीय दूरियों को रोका जा सके।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि यह सब बीजेपी की साजिश थी, जिसके तहत इन कथावाचकों को न केवल अपमानित किया गया, बल्कि सार्वजनिक रूप से उनकी चोटी काटी गई और नाक रगड़वाई गई। उनका कहना था कि यह काम सुनियोजित तरीके से किया गया।
जातिगत पहचान पहले से थी स्पष्ट
अखिलेश ने यह भी साफ किया कि ये कथावाचक पहले भी उसी गांव में कथा कर चुके हैं और सभी को उनकी जाति का पहले से ही पता था। उन्होंने कहा कि यह आरोप लगाना कि उन्होंने अपनी जाति छिपाई, सरासर झूठ है और सिर्फ माहौल बिगाड़ने के लिए फैलाया गया है।
उनके मुताबिक ये लोग वर्षों से साधारण और सच्ची कथा कर रहे हैं, और इसी वजह से गांव के लोग उन्हें बुलाते आए हैं। उनका कहना था कि अब इन कथावाचकों को बदनाम कर भाजपा समाज को बांटने की साजिश रच रही है।
समाजवादी पार्टी के दफ्तर में इन कथावाचकों को बुलाकर अखिलेश यादव ने ढोलक भेंट की, कुछ पैसे दिए और सार्वजनिक रूप से उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि यह कदम सिर्फ उनके सम्मान के लिए नहीं, बल्कि समाज में सौहार्द बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि अगर गांव के लोग 50 लाख रुपए देकर कथावाचक बुला सकते, तो धीरेंद्र शास्त्री को ही बुला लेते। लेकिन आम जनमानस आज भी साधारण और सच्चे लोगों को महत्व देता है, और यही हमारी संस्कृति की पहचान है।
जाने क्या है इटावा का पूरा मामला?
मामला इटावा के दादरपुर गांव का है, जहां कथावाचक संत कुमार यादव और मुकुट मणि यादव कथा कर रहे थे। कुछ लोगों ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने खुद को ब्राह्मण बताकर लोगों को गुमराह किया और भावनाएं आहत कीं।
इसके बाद कथावाचकों के साथ मारपीट की गई, उनकी चोटी काट दी गई और महिलाओं से नाक रगड़वाई गई। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने दोनों पक्षों पर एफआईआर दर्ज कर कुछ आरोपियों को जेल भेजा।
अखिलेश यादव ने साफ आरोप लगाया कि यह पूरी घटना बीजेपी के इशारे पर अंजाम दी गई ताकि समाज में जातीय विभाजन को और गहरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि कथावाचकों को अपमानित कर बीजेपी समाज को बांटने की राजनीति कर रही है












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