Elvish Yadav: ईडी ने एल्विश यादव से मनी लॉन्ड्रिंग मामले की पूछताछ, 8 घंटे तक चले सवाल-जवाब
Elvish Yadav News: मशहूर यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी 2 के विजेता एल्विश यादव से गुरुवार को लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूछताछ की। यह पूछताछ स्नेक-रेव पार्टी मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुई, जो करीब 8 घंटे तक चली।
खबर के मुताबिक, एल्विश यादव को इससे पहले ईडी ने सोमवार को लखनऊ स्थित ऑफिस बुलाया था। मगर, एल्विश यादव ने आने में असमर्थता जताते हुए तीन दिन का समय मांगा था। इसके बाद ईडी ने उन्हें 5 सितंबर तक का वक्त दिया था।

दरअसल, रेव पार्टी में सांपों के जहर सप्लाई करने के मामले में ईडी को यूट्यूबर एल्विश यादव से पूछताछ करनी थी। ऐसा बताया जा रहा है कि पूछताछ के बाद एल्विश जब ED ऑफिस से बाहर आए तो चिढ़े हुए दिखाई पड़े।
इस दौरान उन्होंने मीडिया कर्मियों के सवाल पर चिढ़कर जवाब देते हुए कहा,'घर जाओ भूखे मर रहे होगे तुम लोग।' दरअसल, ईडी की टीम ने एल्विश यादव से करीब आठ घंटे तक लंबी पूछताछ की है।
आपको बता दें कि ईडी ने इससे पहले जुलाई में यादव से करीब 7 घंटे तक पूछताछ की थी। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज यह मामला इस साल मई में उजागर हुए सांप के जहर के रैकेट से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है।
सांप के जहर का इस्तेमाल करने का एल्विश पर है आरोप
पिछले साल नवंबर में नोएडा के सेक्टर 49 पुलिस स्टेशन में यादव और पांच अन्य के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी। अन्य आरोपियों, सभी सपेरे, को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में जमानत दे दी गई।
हालांकि, एल्विश यादव ने आरोपों को "निराधार और फर्जी" बताते हुए इनकार किया, लेकिन बाद में पुलिस ने अपनी ओर से "गलती" का हवाला देते हुए उनके खिलाफ एनडीपीएस के आरोप हटा दिए।
एल्विश से जुलाई में भी हुई थी पूछताछ
जुलाई में पूछताछ के बाद एक अधिकारी ने बताया कि यादव के जवाब संतोषजनक नहीं थे। एजेंसी ने सपेरों के बारे में और जानकारी जुटाने के बाद आगे की पूछताछ की योजना बनाई। इसके अलावा, हरियाणा के गायक राहुल यादव, जिन्हें फाजिलपुरिया के नाम से जाना जाता है से भी 8 जुलाई को लखनऊ स्थित ईडी कार्यालय में कई घंटों तक पूछताछ की गई थी।
17 मार्च को एल्विश यादव को किया था अरेस्ट
इस साल की शुरुआत में 17 मार्च को यादव को गिरफ़्तार किया गया था और 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में रखा गया था। हालांकि, पांच दिन बाद उन्हें स्थानीय अदालत से ज़मानत मिल गई। मामले के वित्तीय पहलुओं की गहन जांच के साथ ही जांच जारी है।












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