स्मृति इरानी ने डाला अमेठी में कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा, जड़ से उखड़ गई
स्मृति इरानी की कोशिश का ही असर था कि कई मौकों पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का अमेठी में ही विरोध हुआ।
नई दिल्ली। यूपी चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर में सपा, कांग्रेस और बसपा के किले ढह गए। प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा ने यूपी में इतिहास रच दिया है। यहां तक कि कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली अमेठी की चार सीटों में उसे एक भी सीट नहीं मिली। अमेठी में भाजपा की जीत में केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। अमेठी में भाजपा की गरिमा सिंह, जगदीशपुर में भाजपा के सुरेश पासी और तिलोई सीट पर भाजपा के राजा मयंकेश्वर ने जीत दर्ज की है। केवल गौरीगंज में सपा के राकेश सिंह ने जीत हासिल की।

2014 के लोकसभा चुनाव से ही स्मृति इरानी ने अमेठी में डेरा डाला हुआ था। अमेठी के लोगों से लगातार संवाद बनाते हुए स्मृति ने चारों सीटों पर भगवा झंडा फहराने के लिए काफी मेहनत की। दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भाजपा ने जबरदस्त जीत दर्ज की, लेकिन स्मृति इरानी अमेठी में राहुल गांधी के सामने चुनाव हार गईं। इसके बावजूद स्मृति ने अमेठी की जनता से संवाद बनाए रखा। स्मृति लगातार विभिन्न मौकों पर अमेठी आती रहीं।
अमेठी में ही हुआ राहुल गांधी का विरोध
उन्होंने अमेठी की समस्याओं के लिए जहां गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहराया, वहीं खुद को अमेठी से जुड़ा हुआ भी साबित किया। स्मृति की इस कोशिश का ही असर था कि कई मौकों पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का अमेठी में ही विरोध हुआ। आपको बता दें कि अमेठी लोकसभा सीट पर लंबे समय से गांधी परिवार का कब्जा है। यहां से राहुल गांधी सांसद हैं। इस बार यहां की अमेठी विधानसभा सीट इसलिए भी चर्चा में थी क्योंकि यहां से दो-दो रानियां चुनाव मैदान में थीं। जबकि सपा सरकार में मंत्री और गैंगरेप के आरोपी गायत्री प्रजापति यहां से चुनाव लड़ रहे थे। ये भी पढ़ें- स्मार्ट हुआ यूपी का मतदाता, तीन बार से दे रहा बहुमत की सरकार












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