स्मार्ट हुआ यूपी का मतदाता, तीन बार से खिचड़ी नहीं बहुमत की सरकार
मेल-जोल से बनने वाली सरकारें जनता के हित से ज्यादा आपसी हितों पर बंटी रहती हैं। सरकार बनाने के लिए गठजोड़ होता है और खरीद-फरोख्त भी होती है, ऐसे में जनता ने स्पष्ट जनाधार देकर खेल खत्म कर दिया।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली जबरदस्त जीत से एक बार फिर साबित हो गया है कि प्रदेश की जनता अब किसी भी स्थित में कच्ची सरकार नहीं चाहती। पिछले तीन हार के चुनावों में जनता ने मेलजोल की सरकार बनाने का मौका नहीं दिया। इससे साफ दिखता है कि यूपी का मतदाता स्मार्ट हो चुका है।

काम न करने पर नहीं दिया दूसरा मौका

2007 में बसपा को मौका
सपा के शासन से ऊबकर 2007 के विधानसभा चुनाव में जनता ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) को मौका दिया। 403 सीटों वाली यूपी विधानसभा में 2007 में बसपा ने 206 सीटों पर बाजी मारी थी। इस चुनाव में सपा को 97 सीटें मिली थीं। बीजेपी ने इस चुनाव में 51 और कांग्रेस को 22 सीटों से संतोष करना पड़ा था। READ ALSO: CM अखिलेश यादव बोले- यूपी में मोदी ने बीजेपी को उबारा वरना साफ हो जाता सूपड़ा

2012 में सपा को मिला था मौका
2012 में यूपी विधानसभा चुनाव में जनता ने एक बार फिर सपा को मौका दिया। समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव में बड़ी जीत हासिल की और 224 सीटों पर परचम लहराया। बसपा का हाल इस चुनाव में बुरा हुआ और कुल 80 सीटें मिलीं। बीजेपी को भी करारी शिकस्त मिली और कुल 47 सीटों से संतोष करना पड़ा। कांग्रेस एक बार फिर चौथे नंबर पर रही और उसे कुल 28 सीटें मिलीं। READ ALSO: पंजाब चुनाव 2017: 10 साल बाद कांग्रेस को मिली बड़ी जीत

2017 में बीजेपी ने पार किया 300 का आंकड़ा
2017 के विधानसभा चुनाव में जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया। लगातार सपा-बसपा के शासन की अदला-बदली से खराब हुई कानून व्यवस्था और प्रदेश की बदहाली को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बीजेपी ने 300 से ज्यादा सीटें हासिल करके यूपी चुनाव में परचम लहराया। सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन स्थिति बेहद बुरी हो गई। गठबंधन को 100 सीटें भी नहीं मिलीं। वहीं बसपा को महज 20 सीटों से संतोष करना पड़ा।












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