Cancer Drug Shortage India: देश में कैंसर की दवाओं के स्टॉक पर संकट, बाजार से क्यों गायब हुई कीमोथेरेपी दवाएं

Cancer Drug Shortage India : भारत में कैंसर के इलाज से जुड़े मरीजों और डॉक्टरों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। पिछले करीब दो हफ्तों से देशभर में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो बेहद महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाएं सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की भारी कमी देखी जा रही है।

हालात ऐसे हैं कि कई शहरों में मेडिकल स्टोर, स्टॉकिस्ट और थोक विक्रेताओं के पास इन दवाओं का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है।

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ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) लगातार इस स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं क्योंकि ये दोनों दवाएं कैंसर के कई प्रकारों के इलाज में पहली पंक्ति की कीमोथेरेपी दवाओं के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो हजारों मरीजों के इलाज पर असर पड़ सकता है।

आखिर क्यों पैदा हुआ दवाओं का संकट?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस संकट की सबसे बड़ी वजह प्लैटिनम (Platinum) की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी है। दरअसल, Cisplatin और Carboplatin दोनों दवाएं प्लैटिनम-आधारित कीमोथेरेपी एजेंट हैं। इन दवाओं के निर्माण में प्लैटिनम एक महत्वपूर्ण कच्चा माल होता है।

मुंबई के लीलावती अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मोहन मेनन के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में प्लैटिनम की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 के मध्य में प्लैटिनम की कीमत करीब 2,700 रुपये प्रति ग्राम थी, जो अब बढ़कर 7,800 रुपये प्रति ग्राम से अधिक हो चुकी है। यानी महज तीन साल के भीतर प्लैटिनम की कीमत लगभग तीन गुना तक पहुंच गई है, जिससे इन दवाओं का उत्पादन महंगा हो गया है।

दो हफ्तों से बाजार में नहीं मिल रहीं दवाएं

डॉक्टरों का कहना है कि पिछले लगभग दो सप्ताह से इन दवाओं की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। विशेष रूप से कम डोज वाली Cisplatin और Carboplatin बाजार से लगभग गायब हो चुकी हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर उच्च डोज वाले वेरिएंट सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन अधिकांश मरीजों और अस्पतालों को आवश्यक मात्रा में दवा नहीं मिल पा रही है। देश के कई बड़े शहरों में मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि उनके पास इन दवाओं का नया स्टॉक नहीं पहुंच रहा है और पुराने स्टॉक लगभग समाप्त हो चुके हैं।

हॉरमुज संकट ने बढ़ाई मुश्किल

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े संकट ने भी इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। हॉरमुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का व्यापार होता है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और कच्चे माल की लागत प्रभावित हुई है। इसका असर दवा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे पदार्थों पर पड़ा है, जिनमें प्लैटिनम भी शामिल है।

प्लैटिनम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

प्लैटिनम की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे पहले, दुनिया में प्लैटिनम का सबसे बड़ा उत्पादक देश दक्षिण अफ्रीका है, जहां उत्पादन में कमी और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के कारण वैश्विक बाजार में प्लैटिनम की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल उद्योग में प्लैटिनम की मांग लगातार बढ़ रही है। वाहनों में प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों के लिए इसका व्यापक उपयोग किया जाता है। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के विकास में भी प्लैटिनम की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

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भारत के लिए UAE अहम सप्लायर

भारत के लिए प्लैटिनम आयात का बड़ा स्रोत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है। आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल प्लैटिनम आयात का लगभग आधा हिस्सा UAE से आता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार का तनाव या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति भारतीय बाजार पर सीधा प्रभाव डालती है।

कंपनियां कीमतें क्यों नहीं बढ़ा रहीं?

आमतौर पर कच्चे माल की कीमतें बढ़ने पर कंपनियां तैयार उत्पादों के दाम बढ़ा देती हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो पा रहा है।Cisplatin और Carboplatin दोनों दवाएं भारत सरकार के ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के दायरे में आती हैं। DPCO के तहत आवश्यक दवाओं की कीमतें सरकार नियंत्रित करती है।

इस नियम के तहत कंपनियां अपनी मर्जी से दाम नहीं बढ़ा सकतीं। उन्हें केवल थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) के आधार पर सीमित वार्षिक मूल्य वृद्धि की अनुमति होती है। यही वजह है कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद कंपनियां इन दवाओं की कीमतों में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं कर पा रही हैं, जिससे कई निर्माताओं के लिए उत्पादन आर्थिक रूप से कठिन हो गया है।

मरीजों और अस्पतालों की बढ़ी चिंता

कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि Cisplatin और Carboplatin कई प्रकार के कैंसर जैसे फेफड़े, सिर-गर्दन, अंडाशय, मूत्राशय और अन्य कई कैंसर के इलाज में नियमित रूप से इस्तेमाल की जाती हैं। इन दवाओं की कमी से इलाज का शेड्यूल प्रभावित हो सकता है और कुछ मरीजों को वैकल्पिक दवाओं का सहारा लेना पड़ सकता है, जो कई बार अधिक महंगी भी होती हैं। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर अब सरकार तथा दवा कंपनियों से जल्द समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं ताकि मरीजों का इलाज प्रभावित न हो।

क्या आगे और बढ़ सकता है संकट?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्लैटिनम की वैश्विक कीमतों में तेजी जारी रहती है और पश्चिम एशिया का संकट जल्द नहीं सुलझता, तो आने वाले समय में दवाओं की आपूर्ति पर और दबाव पड़ सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य क्षेत्र की निगाहें सरकार, दवा कंपनियों और आपूर्ति श्रृंखला पर टिकी हैं कि इस महत्वपूर्ण कैंसर दवा संकट का समाधान कितनी जल्दी निकाला जाता है।

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