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Dussehra 2017: इस रूप में आपने शायद ही सीएम योगी को देखा हो!

By Gaurav Dwivedi
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    गोरखपुर। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने गढ़ गोरखपुर में ही दशहरा मना रहे हैं। योगी के लिए दशहरा रावण से कही ज्यादा अपने मठ की परंपरा को सम्मान देना है। योगी का मिनी सचिवालय समझा जाने वाला गोरखनाथ मन्दिर, हर दशहरे पर योगी का इंतजार करता है तो इस बार सीएम की कुर्सी पर बैठे योगी ने भी मठ में शानदार समय बिताया। बाबा गोरखनाथ के नाम पर इस जिले का नाम गोरखपुर पड़ा है। गोरखनाथ मन्दिर के मुख्य महन्तों में एक बाबा योगी आदित्यनाथ अब सूबे के मुख्यमंत्री भी हैं तो ऐसे में दशहरे पर्व पर उनकी यहां मौजूदगी उत्सव को अपने आप बड़ा कर देती है। तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि योगी किस तरह से अपने पारंपरिक पूजन को करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इस मौके पर योगी के साथ मंदिर के कई महंत हैं, जिन्हें मर्यादित ढंग से वो अपने पूजन का हिस्सा बनाते जा रहे हैं।

    योगी की तस्वीर बनी दशहरे का आकर्षण

    योगी की तस्वीर बनी दशहरे का आकर्षण

    बता दें कि योगी आदित्यनाथ की इन तस्वीरों को देखकर आप समझ सकते हैं कि योगी पूजा पाठ करने में कभी पीछे नहीं हटते। इससे पहले भी हमने योगी को आरती करते देखा है। दशहरे पर भी उन्होंने अपने मठ यानी गोरखनाथ मंदिर में विशेष पूजन किया। इस दौरान उनके साथ कई अन्य महंत भी नजर आए।

    गाय पूजा से की योगी ने शुरुआत

    गाय पूजा से की योगी ने शुरुआत

    अपनी गाय पूजन परंपरा भी योगी निभाते नजर आए, बताएं तो सबसे पहले ही योगी ने गाय पूजा की। खुद उन्होंने अपने हाथों से गाय की सेवा की, उन्हें भोजन परोसा। इसके बाद योगी पूजन विधि की अन्य परंपरा को पूरी करते दिखे।

    नाथ परंपरा के अग्रणी योगी हैं आदित्य

    नाथ परंपरा के अग्रणी योगी हैं आदित्य

    गाय पूजन के बाद योगी अपने अन्य महंत मंडली के साथ गऊशाला से बाहर आए और नाथ परंपरा के गुरुओं के सम्मान में कई विधि-विधान के साथ पूजा की। नाथ परंपरा में योगी मठ का मुख्य चेहरा हैं, जब से योगी सूबे के मुख्यमंत्री बने हैं तब से वो नाथ परंपरा को हो सकता है कम समय दे पा रहे हों लेकिन भूले नहीं हैं।

    ये कहती है 'नाथ' परंपरा...

    ये कहती है 'नाथ' परंपरा...

    हिन्दू धर्म, दर्शन, अध्यात्म और साधना के अंतर्गत कई संप्रदायों और मत-मतांतरों में 'नाथ संप्रदाय' का प्रमुख स्थान है। संपूर्ण देश में फैले नाथ संप्रदाय के विभिन्न मंदिरों और मठों की देख-रेख यहीं से होती है।

    'नाथ' संप्रदाय की ये है मान्यता

    'नाथ' संप्रदाय की ये है मान्यता

    नाथ संप्रदाय की मान्यता के मुताबिक सच्चिदानंद शिव के साक्षात् स्वरूप 'श्री गोरक्षनाथ जी' सतयुग में पेशावर (पंजाब) में, त्रेतायुग में गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, द्वापर युग में हरमुज, द्वारिका के पास तथा कलियुग में गोरखमधी, सौराष्ट्र में आविर्भूत हुए थे।

    कब से मना रहे हैं योगी ऐसे दशहरा?

    कब से मना रहे हैं योगी ऐसे दशहरा?

    ऐसा नहीं है कि नाथ परंपरा पर मंदिर प्रशासन काम नहीं कर रहा है या योगी की मंसा सूबा संभालने में ही व्यस्त है। मंदिर की क्रियाओं में काफी बढ़ोत्तरी हो चुकी है, जब से योगी मुख्यमंत्री बने हैं। ऐसा भी नहीं है कि सीएम बनने के बाद ही योगी का ये रूप देखने को मिल रहा है। हर साल योगी इसी तरह अपना दशहरा मनाते आए हैं।

    ऐसे ही योगी करते हैं अपने समर्थकों को खुश

    ऐसे ही योगी करते हैं अपने समर्थकों को खुश

    योगी को फॉलो करने वाले उनके समर्थक मूल रूप से उनके योगी छवि के चलते उन्हें पसंद करते हैं तो ऐसे विशेष मौकों पर वो भी योगी को इस रूप में देखना चाहते हैं। योगी की ये पूजा शैली यूपी को तरो-ताजा कर देती है और नए ढंग से त्योहार को देखने का एक अवसर भी देती है।

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    English summary
    Dussehra 2017: CM Yogi Adityanath at Gorakhnath Mandir on Vijayadusmi Special Worship

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