डॉ. भीमराव अंबेडकर को कौन कराएगा आजाद? 22 सालों से थाने के कबाड़खाने में हैं कैद
पिछले 22 सालों से गंदगी और कचरे के बीच रखी ये प्रतिमा अब बदहाल हो चुकी है लेकिन संविधान की किताब देखकर उन लोगों पर शर्म आती है जो अंबेडकर के नाम पर राजनीति करते हैं।
शाहजहांपुर। आज पूरा देश अंबेडकर जयंती मना रहा है और राजनीतिक पंडित अंबेडकर के नाम पर वोट वैंक जुटाने में लगे हैं। संविधान के निर्माता कहे जाने वाले डॉ. अंबेडकर को वैसे तो दलितों का मसीहा कहा जाता है लेकिन हम आपकों उस तस्वीर से रूबरू कराएंगे जिसे देखकर शायद अंबेडकर नाम की राजनीति करने वालों को शर्मसार होना पड़ सकता है। यूपी के शाहजहांपुर में एक थाने के मालखाने में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पिछले 22 सालों से सजा काट रही है लेकिन इतना लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी किसी राजनीतिक दल या किसी समाजसेवी ने प्रतिमा को आजाद कराने के बारे में नहीं सोचा।

शाहजहांपुर के कटरा थाने के मालखाने में कैद ये 10 फीट ऊंची प्रतिमा उस महान शख्स की है जिसे संविधान निर्माता तो कहा ही जाता साथ ही इन्हें दलित समाज में मसीहा के रूप में पूजा भी जाता हैं। लेकिन उनकी ये प्रतिमा इस थाने के मालखाने में पिछले 22 सालों से कैद की सजा काट रही है। दरअसल 29 जुलाई 1995 जब प्रदेश में पहली बार बसपा की सरकार बनी तो बसपा समर्थकों ने इस प्रतिमा को कटरा के चैराहे पर स्थापित कर दिया। लेकिन कुछ लोगों के विरोध करने पर तत्कालीन तहसीलदार और सीओं ने प्रतिमा को चैराहे से उठवाकर थाने के मालखाने में रखवा दिया। उसके बाद से डॉ. अंबेडकर की ये प्रतिमा लावारिस हालत में थाने के मालखाने में कैद की सजा काट रही है।

पिछले 22 सालों से गंदगी और कचरे के बीच रखी ये प्रतिमा अब बदहाल हो चुकी है लेकिन संविधान की किताब देखकर उन लोगों पर शर्म आती है जो अंबेडकर के नाम पर राजनीति करते हैं। थाने के मालखाने में रखी इस प्रतिमा का पिछले 22 सालों से अपमान किया जा रहा है। पुलिस के कपड़े भी इसी प्रतिमा के पास सुखाए जाते हैं। चूंकि इस प्रतिमा से संबंधित थाने में न ही कोई मुकदमा दर्ज है और ना ही कोई विवाद बचा है लेकिन फिर भी लावारिस दिखाकर पुलिस और प्रशासन इसे अपनी हिरासत में लिए हुए है। बड़ी हैरत कि बात है की कई बार प्रदेश में बसपा की सरकार बनी और आज तक किसी भी नेता ने ये जानने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर संविधान निर्माता और दलितों के मसीहा को आखिर इतनी लंबी कैद में क्यों रखा गया?
वहीं बीएसपी जिला अध्यक्ष उदयवीर सिंह का कहन है कि थाने के कबाड़खाने में रखी अंबेडकर प्रतिमा को वहां से निकलवाकर कहीं अच्छी जगह स्थापित करने की कोशिशें जारी हैं लेकिन जिला प्रशासन कोई साथ नहीं दे रहा है। हम कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही प्रतिमा को वहां से निकालकर कोई अच्छी जगह चिंहित करके लगवाया जाएगा। प्रतिमा को वहां से निकलने में काफी बाधाएं आ रही हैं। बहुत जल्द जिला प्रशासन से फिर से प्रतिमा को स्थापित करने कि बात की जाएगी। आप को बता दें कि पिछले साल अंबेडकर जयंती पर भी हमने जिला अध्यक्ष उदयवीर सिंह से इस मामले में बात की थी। लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली या यूं कह सकते हैं कि सफलता उन्हें मिलती है जो प्रयास करते हैं। अब देखना है कि इस थाने से अंबेडकर की प्रतिमा कौन और कब आजाद करवाता है।
यहां पर पुलिस के रहने के लिए एक बिल्डिंग बना दी गई बिल्डिंग बनाने के लिए मजदूर और राज मिस्त्री लगाए गए थे जो बिल्डिंग को बना रहे थे लेकिन किसी भी पुलिस अधिकारी या राजनीतिक दल की इस बदहाल प्रतिमा कि तरफ ध्यान नहीं गया, अगर थोड़ा सा भी इस प्रतिमा की ओर ध्यान दे दिया जाता तो कई जगह से टूटी प्रतिमा को ठीक कराया जा सकता था।












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