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Mathura CM Yogi Visit: 'भगवान राम भारत के शाश्वत राजा'- CM योगी का बड़ा बयान, सनातन एकता पर दिया जोर

CM Yogi Adityanath Mathura Visit: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को मथुरा-वृंदावन में संत मलूक दास की 452वीं जयंती समारोह में एक ऐतिहासिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत का केवल एक ही राजा है, वह शाश्वत राजा भगवान राम हैं, उनके अलावा कोई और नहीं। यह बयान सिर्फ एक भाषण का अंश नहीं, बल्कि सनातन धर्म की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करने का संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने सनातन अनुयायियों, संतों और समाज से एकता बनाए रखने का जोरदार आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्तिगत, संस्थागत या सांप्रदायिक हित कभी भी राष्ट्र और सनातन धर्म के मार्ग में बाधा नहीं बनने चाहिए।

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भगवान राम: भारत के शाश्वत राजा

CM योगी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत की सभ्यतागत चेतना में भगवान राम सदियों से शाश्वत राजा के रूप में विराजमान हैं। यह विचार कोई नया नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक धारा का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'यह धारणा देश की आत्मा में गहराई से समाई हुई है।'

यह बयान राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद की नई ऊर्जा को दर्शाता है। योगी जी ने याद दिलाया कि आज की पीढ़ी भाग्यशाली है, क्योंकि उसने राम जन्मभूमि की मुक्ति, राम मंदिर निर्माण और राम लल्ला की प्राण-प्रतिष्ठा देखी है। कई पीढ़ियां इस सपने को पूरा होते नहीं देख पाईं।

संत मलूक दास: 450 साल पहले का दिव्य प्रकाश

मुख्यमंत्री ने संत मलूक दास को 'दिव्य प्रकाश' कहा। लगभग 450 साल पहले, जब विदेशी आक्रमणों के कारण सनातन धर्म चुनौतियों का सामना कर रहा था, तब ऐसे संतों ने समाज को जगाया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को पुनर्स्थापित किया।

मलूक दास की जयंती पर दिए गए इस भाषण में योगी जी ने प्रयागराज की आध्यात्मिक विरासत का भी जिक्र किया। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम को आस्था का पवित्र केंद्र बताया। उन्होंने वैष्णव परंपरा, खासकर संत रामानंदाचार्य की परंपरा की सराहना की, जिसने ब्रज, अयोध्या, चित्रकूट, काशी और जगन्नाथ पुरी जैसे केंद्रों में आध्यात्मिक चेतना फैलाई।

तुलसीदास का उदाहरण: मुगल प्रलोभन ठुकराकर सिर्फ राम को माना

योगी आदित्यनाथ ने तुलसीदास का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने मुगल शासकों के प्रलोभनों को ठुकरा दिया और घोषणा की कि वे 'केवल एक ही शासक भगवान राम' को मानते हैं। रामलीला जैसे आयोजन आज भी जाति और समुदाय की सीमाओं को तोड़कर लोगों को एकजुट करते हैं। यह संतों और शास्त्रों की स्थायी शक्ति को दर्शाता है।

एकता का संदेश: व्यक्तिगत हित से ऊपर राष्ट्र और सनातन धर्म

मुख्यमंत्री ने सबसे जोरदार अपील एकता की की। उन्होंने कहा, 'व्यक्तिगत हित कभी भी सनातन धर्म और राष्ट्र के मार्ग में बाधा नहीं बनने चाहिए। मेरा व्यक्तिगत हित कभी भी राष्ट्र या सनातन धर्म के हित से बड़ा नहीं हो सकता।'

उन्होंने याद दिलाया कि जब संतों ने व्यक्तिगत, संस्थागत और सांप्रदायिक हितों को एक तरफ रख दिया, तो बड़े पैमाने पर जागरण हुआ। इसी एकता के कारण अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संभव हो पाया। योगी जी ने कहा, 'यदि संतों की एकता में इतनी शक्ति है, तो यदि पूरा सनातन समाज एकजुट हो जाए, तो कोई भी राष्ट्र-विरोधी या हिंदू-विरोधी ताकत भारत को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी।'

संभल का ऐतिहासिक संदर्भ: अतीत से वर्तमान तक की यात्रा

CM योगी ने संभल का जिक्र करते हुए कहा कि 1526 में श्री हरि हर मंदिर को तोड़ दिया गया था। 67 तीर्थ स्थल और 19 कुएं नष्ट हो गए थे। 1976-78 के सांप्रदायिक दंगों में सैकड़ों हिंदुओं की हत्या हुई। 1995-96 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए।

योगी जी ने एक पीड़ित परिवार की कहानी भी सुनाई। परिवार ने बताया कि उनकी संपत्ति लूट ली गई थी और उन्हें दिल्ली भागना पड़ा। मुख्यमंत्री ने दस्तावेज मांगे और संपत्ति वापस दिलाने का भरोसा दिया। अब स्थिति बदल गई है। 84-कोसी परिक्रमा के लिए फंड आवंटित कर दिया गया, सड़कें बनाई जा रही हैं, धर्मशालाएं विकसित की जा रही हैं। सभी 67 तीर्थ स्थलों को संवारा गया और 19 कुओं पर से अतिक्रमण हटा दिया गया।

अयोध्या और काशी: विकास और विरासत का संगम

अयोध्या का जिक्र करते हुए योगी जी ने कहा, 'हमने त्रेता युग तो नहीं देखा, लेकिन जैसा शास्त्रों में वर्णित है, वैसी ही अयोध्या आज बनाई जा रही है।' राम मंदिर के साथ 500 साल पुराना कलंक मिट गया।

काशी के कायाकल्प का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, 'आज मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि अब एक ही समय में 50,000 श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं।' उन्होंने जोर दिया कि विकास और विरासत का संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए। 'हमारा मानना है कि विकास तभी सार्थक होता है जब विरासत को भी सुरक्षित रखा जाए।'

डबल इंजन सरकार और संतों का आशीर्वाद

ये सारी उपलब्धियां संतों के आशीर्वाद, सक्षम नेतृत्व और डबल-इंजन सरकार की तेज रफ्तार का नतीजा हैं। सीएम योगी ने अंत में 'चरैवेति, चरैवेति' (आगे बढ़ते रहो) का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा, 'बिना रुके, बिना थके और बिना झुके हमें यह यात्रा जारी रखनी है।'

CM योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था। यह सनातन समाज को एकजुट करने, सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने और राष्ट्र-धर्म को सर्वोपरि रखने का संदेश था। संत मलूक दास की जयंती पर दिए गए इस संबोधन में अतीत की पीड़ा, वर्तमान की उपलब्धियां और भविष्य का संकल्प सभी शामिल थे।

(PTI इनपुट)

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