UP में शिक्षकों की गंदी हरकत, दो बच्चियों को पूरे स्कूल के सामने नंगा किया, मामले को दबाने के आरोप

उत्तर प्रदेश के स्कूल से शर्मनाक वाकया सामने आया है। दो दलित लड़कियों के कपड़े उतारे गए हैं। पीड़ितों पर खामोश रहने का प्रेशर बनाया जा रहा है।

हापुड़ (UP), 19 जुलाई : उत्तर प्रदेश के स्कूल से शर्मनाक वाकया सामने आया है। दो दलित लड़कियों के कपड़े उतारे (UP dalit students stripped) गए हैं। जानकारी के मुताबिक इस मामले में दलित लड़कियों को स्कूल की यूनिफॉर्म उतारने को कहा गया और कपड़े ऊंची जाति की लड़कियों को दे दिए गए। लड़कियों को स्कूल में क्लास की तस्वीर क्लिक करने का 'दोषी' पाया गया। स्कूल के अधिकारियों ने लड़कियों को दोषी करार दिया और तालिबानी फरमान सुनाया।

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यूपी शिक्षा विभाग ने सोमवार को हापुड़ में दो दलित स्कूली छात्राओं को कपड़े उतारने और उनकी यूनिफॉर्म ऊंची जाति की लड़कियों को देने के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) की ओर से दो दलित स्कूली छात्राओं के जबरन कपड़े उतारने के मामले में "कार्रवाई की गई।" रिपोर्ट मांगे जाने के बाद यूपी राज्य शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच का आदेश दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हापुड़ के जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने बताया कि उन्होंने पुलिस को भी प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक विगत 11 जुलाई को, कक्षा IV की दो दलित स्कूली छात्राओं को कथित तौर पर अपनी यूनिफॉर्म उतारने पर मजबूर किया गया। टीओआई की रिपोर्ट में कहा गया कि क्लास की फोटो क्लिक करने को अपराध मानते हुए स्कूल के अधिकारियों ने दोनों बच्चियों के कपड़े ऊंची जाति की लड़कियों को देने के लिए मजबूर किया गया।

जानकारी के मुताबिक स्कूल के आदेश का विरोध करने पर शिक्षकों ने उन्हें निष्कासित करने की धमकी दी। हालांकि बुनियादी शिक्षा अधिकारी अर्चना गुप्ता ने घटना के सामने आने के बाद दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया, लेकिन पुलिस ने कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की। स्थानीय NGO शोषित क्रांति दल ने बाद में इस मुद्दे को उठाया और सोशल मीडिया पर इस मामले में कार्रवाई की मांग की।

दोनों छात्राओं में एक लड़की के पिता ने बताया कि उन पर मामले को दबाने का दबाव बनाया जा रहा है। टीओआई की रिपोर्ट में पीड़िता के पिता ने कहा, मेरी शिकायतों के बावजूद, शिक्षकों के खिलाफ अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की ओर से भी चुप रहने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में शिक्षकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

छात्राओं के कपड़े उतारे जाने के मामले में शोषित क्रांति दल के अध्यक्ष रविकांत ने ट्वीट किया, एक सप्ताह हो गया है और कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है... आरोपी शिक्षक लड़कियों के परिवारों पर दबाव बनाने के लिए पंचायत कर रहे हैं। यह ऊंचाई है दलित अधीनता। आप इसे और कैसे परिभाषित करेंगे? रविकांत जाति सूचक पहचान गोपनीय रखन के लिए केवल अपने फर्स्ट नेम का ही उपयोग करते हैं।

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इस मामले में एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार को कहा कि NCSC के अध्यक्ष विजय सांपला ने रिपोर्ट मांगी। इसके एक दिन बाद महिला कॉन्सटेबलों सहित एक टीम ने लड़कियों का बयान दर्ज किया।

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