मानसरोवर यात्रा से लौटे दंपति ने सुनाई चीनी अधिकारियों के 'जुल्म' की दास्तान

कैलास मानसरोवर यात्रा से लौटे मेरठ के ओथ कमिश्नर एसडी गौड़ ने अपने अनुभव वन इंडिया के साथ साझा किए।

मेरठ। डोकलाम मसले को लेकर भारत-चीन के तनाव का असर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी दिख रहा है। श्रद्धालुओं को चीनी अफसरों की बेरुखी का शिकार होना पड़ रहा है। बार-बार चेकिंग कर यात्रियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। कैलास मानसरोवर यात्रा से लौटे मेरठ के ओथ कमिश्नर एसडी गौड़ ने अपने अनुभव वन इंडिया के साथ साझा किए।

 कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए दंपति ने सुनाई आपबीती

कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए दंपति ने सुनाई आपबीती

मेरठ के रक्षापुरम निवासी डा. एसडी गौड़ अपनी पत्नी सुनीति के साथ 13 अगस्त को कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए रवाना हुए थे। यात्रा पूरी करने के बाद रविवार देर शाम को वह वापस लौट आए हैं। दंपत्ति यात्रा के दौरान चीनी अफसरों के व्यवहार से बहुत आहत हैं। डा. गौड़ ने बताया कि वह लखनऊ से लेकर नेपाल होते हुए वायुमार्ग से तगलाकोट और सिमीकॉट पहुंचे। इससे आगे उन्हें कई बार चेकिंग से गुजरना पड़ा। उनका सारा सामान जब्त कर लिया जाता था और एक घंटे बाद बैग से बाहर बिखरा हुआ सभी सामान दे दिया जाता था।

18460 फीट की उंचाई पर चेक किए कागजात

18460 फीट की उंचाई पर चेक किए कागजात

इतना ही नहीं चीनी अफसर दंपत्ति को चैकिंग के दौरान डरा भी रहे थे | डा. गौड़ ने बताया कि 18460 फीट की ऊंचाई पर पुरांग में चीनी अफसरों ने सभी के कागजात चेक किए। जिसमें पासपोर्ट, आईडी व आयु के बारे में जांच की गई। उम्र अधिक होने का कारण बताकर दोनों को आगे की यात्रा के लिए चीनी अफसरों ने रोक दिया। अफसरों ने 60 वर्ष की उम्र तक के लोगों को ही जाने दिया। हम लोगो ने कई बार विनती की, लेकिन किसी भी चीनी अफसर ने हमारी फरियाद नहीं सुनी, काफी परेशान होकर उनकी पत्नी रोने लगी।

यात्रा के दौरान मर गए तो डस्टबिन में फेंक देंगे शव

यात्रा के दौरान मर गए तो डस्टबिन में फेंक देंगे शव

पत्नी के रोने पर चीनी अफसरों ने कहा कि एक ही शर्त पर आप जा सकते हैं। आप की कोई एंट्री नहीं की जाएगी। आगे की आप की खुद की जिम्मेदारी है। मरने पर आप का शव भी किसी को नहीं दिया जाएगा। शव को डस्टबिन में डाल पहाड़ियों से नीचे फेंक देंगे। गौड़ ने कहा कि इसी तरह की भाषा दुखी करने वाले थी। उन्होंने बताया कि इतनी दूर आने के बाद हम कैसे बिना दर्शन के चले जाते। ऐसे में उनकी हमने उनकी शर्त मान ली और यात्रा पूरी कर वापस अपने वतन लौट आये ।

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