यूपी में मुश्किल हैं भाजपा के लिए मोदी से योगी तक का सफर
यूपी में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद भाजपा के सामने प्रदेश में बड़ी चुनौती, पार्टी के सामने मुस्लिम विरोधी छवि से बाहर निकलना बड़ा लक्ष्य
अंकुर सिंह। उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत के तकरीबन एक हफ्ते के बाद भाजपा ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए गोरखपुर से भाजपा सांसद और पार्टी के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है। योगी आदित्यनाथ अपने कट्टर और विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में पार्टी ने जिस तरह से उन्हें प्रदेश का मुख्मयंत्री घोषित किया है वह पार्टी के लिए आगामी समय में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

मोदी से योगी तक का सफर
योगी आदित्यनाथ राम मंदिर, लव जेहाद, घर वापसी जैसे तमाम मुद्दों को लेकर अपनी विवादित राय रखते आए हैं। योगी आदित्यनाथ के लिए उनकी कट्टरवादी हिंदुत्व की छवि ही उनके लिए प्रदेश में उनकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा है। हालांकि यूपी के मुख्यमंत्री का ताज मिलने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी खुद को अपनी इस छवि से बाहर निकलना। लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को एक कट्टर नेता के तौर पर जाना जाता था, गुजरात में दंगों के बाद देशभर में उनकी नकारात्मक छवि बनी और एक समुदाय विशेष के खिलाफ उन्हें जाना जाने लगा, लेकिन लोकसभा चुनाव में जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी अपनी उस छवि को काफी हद तक बदलने में सफल हुए। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के सामने भी एक मौका है जब वह खुद को कट्टरवादी छवि से बाहर निकल सके। बहरहाल यह आने वाला समय तक करेगा कि क्या योगी आदित्यनाथ पीएम मोदी की तरह ही अपने इस सफर को तय कर सकते हैं।

प्रदेश के सौहार्द को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती
यूपी चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था, जिसको लेकर तमाम विपक्षी दलों सहित मुस्लिम समाज ने भी इसकी आलोचना की थी, प्रदेश में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने देश के सबसे बड़े राज्य की कमान ऐसे नेता को दी जिनकी छवि मुस्लिम विरोधी नेता के तौर पर जानी जाती है, उनके सामने प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल को सौहार्दपूर्ण बनाए रखना मुश्किल लक्ष्य है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के सामने भी यह बड़ी चुनौती होगी कि प्रदेश के मुसलमानों के भीतर भी भरोसा जगाया जा सके कि किसी भी तरह की सांप्रदायिक हिंसा को आने वाले समय में नहीं होने दिया जाएगा।

यूपी से तय होगा लोकसभा चुनाव रास्ता
लोकसभा चुनाव होने में अब महज दो वर्ष का समय शेष हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास केंद्र में तकरीबन दो वर्ष का समय और शेष है, 2019 के चुनाव की तैयारियां अगले ही वर्ष से शुरु हो जाएगी। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के सामने जो बड़ा लक्ष्य है वह यह कि इस अल्प समय के भीतर प्रदेश में बड़ा बदलाव करके दिखाए और किसी भी ऐसी घटना को होने से रोके जो पार्टी को आने वाले चुनाव में किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाए। हालांकि भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को प्रदेश की कमान सौंपकर बड़ा जोखिम लिया है जो पार्टी के साथ भी सकता है और खिलाफ भी।

मुस्लिम विरोधी पार्टी की छवि से बाहर निकलना बड़ी चुनौती
भारतीय जनता पार्टी पर तमाम विपक्षी दल गैरसांप्रदायिक पार्टी होने का आरोप लगाते आए हैं, पार्टी ने प्रदेश में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया, यूपी के चुनाव प्रचार के दौरान खुद पीएम ने कब्रिस्तान और श्मशान घाट, दिवाली रमजान पर बिजली जैसे मुद्दों को उठाया, जिसके चलते पार्टी पर चुनावों का ध्रुवीकरण करने का आरोप लगा। यही नहीं केंद्र सरकार में सिर्फ दो मुस्लिम मंत्री हैं, एक मुख्तार अब्बास नकवी जोकि अल्पसंख्यक मंत्रालय के मंत्री हैं जबकि दूसरे एमजे अकबर हैं जोकि राज्यमंत्री हैं। इस लिहाज से पार्टी को मुस्लिम विरोधी छवि से बाहर निकलने बड़े कदम उठाने होंगे।












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