Bus Transport News: फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट से चली डबल डेकर बस, हादसे में गईं पांच जानें, अफसर निलंबित
Bus Transport News: राजधानी लखनऊ में किसान पथ पर हुए भीषण बस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। हादसे में पांच यात्रियों की दर्दनाक मौत के बाद परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। नियमों की अनदेखी और लापरवाही सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में जले यात्रियों की मौत के पीछे बस के फिटनेस प्रमाण पत्र में हुई बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विभाग की प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि जिस बस में हादसा हुआ, उसका फिटनेस प्रमाण पत्र गोरखपुर से केवल तस्वीर देखकर जारी कर दिया गया था।

परिवहन आयुक्त ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए तत्काल प्रभाव से संभागीय निरीक्षक-प्राविधिक (आरआई) राघव कुमार कुशवाहा को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है। जांच की जिम्मेदारी वाराणसी के संभागीय परिवहन अधिकारी शिखर ओझा को सौंपी गई है, जो इसे तीन माह में पूरा करेंगे।
फोटो देखकर फिटनेस, नियमों की उड़ाई धज्जियां
जांच में सामने आया है कि हादसे की शिकार डबल डेकर बस का फिटनेस प्रमाण पत्र 8 अप्रैल 2023 को जारी किया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उस समय बस को फिजिकल जांच के लिए पेश ही नहीं किया गया। सिर्फ फोटो देखकर ही फिटनेस प्रमाण पत्र तैयार कर दिया गया।
बस में न तो एआईएस-119 मानक के अनुसार सीट लेआउट था और न ही आपात निकास द्वार। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि बस में आपातकालीन द्वार को बंद कर वहां अतिरिक्त 10 सीटें लगाई गई थीं। यही वजह रही कि आग लगने के बाद यात्री समय रहते बाहर नहीं निकल सके।
'एनीवेयर फिटनेस' प्रणाली की भी होगी जांच
इस हादसे के बाद पूरे राज्य में पिछले एक साल में 'एनीवेयर फिटनेस' प्रणाली के तहत जारी फिटनेस प्रमाण पत्रों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई गई है। समिति की अध्यक्षता अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) संजय सिंह करेंगे।
यह समिति 15 दिनों के भीतर पूरे प्रदेश में फिटनेस प्रणाली की समीक्षा करेगी और यह भी जांचेगी कि किन स्थानों पर इस सुविधा का दुरुपयोग हुआ है। समिति को सभी दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने का अधिकार भी दिया गया है।
परिवहन मंत्री ने मांगा जवाब
दुर्घटना के बाद राज्य भर में डग्गामार बसों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। परिवहन मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से अवैध बस अड्डों और बिना अनुमति चल रही बसों के संचालन पर रिपोर्ट तलब की है। खासकर राजधानी के आउटर इलाकों में इन बसों की भरमार है।
कांट्रैक्ट कैरिज और स्टेज कैरिज परमिट का गलत इस्तेमाल कर बस संचालक धड़ल्ले से नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कांट्रैक्ट कैरिज परमिट लेकर सड़क पर सवारी बैठाने का खेल वर्षों से चल रहा है। अधिकारियों की मिलीभगत से ये बसें सड़कों पर फर्राटा भरती रहती हैं।
आरटीओ ऑफिस में 'परमिट खेल', नियम ताक पर
आरटीओ कार्यालयों में परमिट के नाम पर वर्षों से खेल जारी है। निजी बस संचालक कांट्रैक्ट कैरिज परमिट लेकर उसे स्टेज कैरिज की तरह चला रहे हैं। जबकि नियम के अनुसार, कांट्रैक्ट कैरिज बस सिर्फ तय रूट और सवारियों तक सीमित होती है, इसे बीच रास्ते में सवारी नहीं बैठाने की अनुमति नहीं होती।
स्टेज कैरिज परमिट अधिक महंगा होता है, इसलिए संचालक सस्ते परमिट लेकर नियमों को तोड़ते हैं। इन अनियमितताओं के चलते ही ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति होती है, लेकिन अब शासन ने ऐसे सभी मामलों की निगरानी शुरू कर दी है।
डग्गामार माफिया की दबंगई इस कदर है कि पुलिस और प्रशासन भी इनके आगे बेबस नजर आते हैं। अवैध बस अड्डों को हटाने के बाद कुछ ही दिनों में फिर से संचालन शुरू हो जाता है। राजधानी की सीतापुर रोड, हरदोई रोड, अयोध्या रोड और कानपुर रोड पर ये बसें बेरोकटोक दौड़ रही हैं।












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