BSP Bihar: मायावती ने खेमका हत्या को बनाया बड़ा मुद्दा, बिहार चुनाव में गठबंधन से बनाई दूरी
BSP Bihar election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने ऐलान किया है कि बसपा इस बार बिना किसी गठबंधन के चुनाव लड़ेगी। साथ ही उन्होंने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने खासतौर पर भाजपा से जुड़े उद्योगपति गोपाल खेमका की पटना में हुई हत्या का हवाला देते हुए इसे बिहार में प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बताया। मायावती का कहना है कि अगर चुनाव से पहले ऐसे अपराध हो रहे हैं, तो चुनाव के दौरान हालात और खराब हो सकते हैं।

सोमवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए मायावती ने कहा कि दलितों, अति-पिछड़ों, महिलाओं और गरीब तबके के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ रही है। लेकिन गोपाल खेमका की हत्या ने यह साबित कर दिया है कि अब तो सत्ता पक्ष से जुड़े लोग भी सुरक्षित नहीं हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और समय रहते कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाए। मायावती ने चेताया कि अगर आयोग निष्क्रिय रहा, तो निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना मुश्किल हो जाएगा।
बसपा सुप्रीमो का मानना है कि यह घटना दर्शाती है कि राज्य में आपराधिक तत्व कितने बेलगाम हो चुके हैं। ऐसे माहौल में चुनाव कराना केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा, जब तक कि चुनाव आयोग सख्ती से हालात पर नियंत्रण नहीं करता।
बसपा की स्पष्ट रणनीति: न गठबंधन, न समझौता
मायावती ने साफ कर दिया कि बसपा न तो किसी गठबंधन का हिस्सा बनेगी, न ही किसी दल से समझौता करेगी। पार्टी अपने कैडर, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बलबूते पर अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि बसपा की ताकत उसकी विचारधारा और संगठनात्मक संरचना है।
उनका कहना है कि गठबंधन की राजनीति अक्सर मूल मुद्दों को दबा देती है, खासकर दलितों और वंचितों से जुड़े सवालों को। इसलिए पार्टी ने तय किया है कि वह अपने सिद्धांतों से समझौता किए बिना चुनावी रण में उतरेगी और हर सीट पर मजबूती से मुकाबला करेगी।
चुनाव आयोग को चेतावनी- निष्क्रियता बर्दाश्त नहीं
मायावती ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान हो रही हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां जानबूझकर माहौल को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं ताकि अपने हित साधे जा सकें। उन्होंने इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया।
उन्होंने कहा कि यदि आयोग अभी से सख्त नहीं हुआ, तो चुनाव के दौरान धनबल, बाहुबल और अपराधियों का वर्चस्व देखने को मिलेगा। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी से मैदान में उतरे।
बसपा का पूरा ध्यान इस बार सामाजिक न्याय और हाशिए पर खड़े तबकों की आवाज़ को उठाने पर है। मायावती ने कहा कि बिहार में दलितों, गरीबों और पिछड़े वर्गों की दशा बद से बदतर होती जा रही है। उनकी पार्टी इन्हीं मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि बसपा की राजनीति सत्ता की नहीं, समाज परिवर्तन की राजनीति है। पार्टी केवल चुनाव लड़ने के लिए मैदान में नहीं उतरती, बल्कि हाशिए पर खड़े लोगों के हक और सम्मान की लड़ाई को मजबूती देने के लिए चुनाव लड़ती है।
मायावती के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब सबकी नजर बसपा की अगली रणनीति और उम्मीदवारों की सूची पर टिकी है। क्या बसपा कोई नया समीकरण खड़ा कर पाएगी, यह आने वाला समय बताएगा।












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