बीकेयू के नेता राकेश टिकैत की बीजेपी को नसीहत, कहा- गांवों में जाएं तो किसानों के बकाए का चेक जरूर ले लें

लखनऊ, 13 अगस्त: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किसान आंदोलन की धार कम करने के लिए बीजेपी वेस्ट यूपी के उन 104 विधानसभाओं में किसान संवाद करने जा रही है जिन इलाकों में भाजपा को लेकर किसानों में नाराजगी है। बीजेपी के इस कदम को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि यह तो अच्छा है कि चार साल बाद किसानों से संवाद करने की याद आई है। बीजेपी के नेता और मंत्री गांव में जाने के दौरान किसानों के बकाए का चेक जरूर लेते जाएं जिससे उन्हें राहत मिले। हम तो पिछले 9 महीने से गांवों में सरकार को ढूंढ रहे हैं लेकिन हमें तो कहीं नहीं मिली।

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    Rakesh Tikait की BJP को नसीहत, कहा-गांवों में जाएं तो किसानों के बकाए का चेक ले जाएं |वनइंडिया हिंदी
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    किसान नेता राकेश टिकैत ने वन इंडिया डॉट काम के संवाददाता से बातचीत के दौरान यह बातें कही। टिकैत ने कहा, '' गांवों में जाना और किसानों से संवाद करना बुरी बात नहीं है। लेकिन दुख है कि किसानों की याद चुनाव से ठीक पहले आई है। यूपी सरकार के मंत्री किसानों से संवाद करेंगे और गांव गांव जाकर मिलें अच्छी बात है। कम से कम जनता भी उनको समझ लेगी।''

    टिकैत से यह पूछे जाने पर कि बीजेपी ने बीकेयू के किसान आंदोलन की धार को कुंद करने के लिए यह प्लानिंग की है, इस सवाल पर टिकैत ने कहा, '' बीकेयू का किसान आंदोलन सिर्फ यूपी का नहीं पूरे देश का है। आंदोलन तो चलता ही रहेगा। यूपी में किसानों का 12 हजार करोड़ रुपए बकाया है लेकिन सरकार कानों में तेल डालकर बैठी हुई है। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।''

    किसान नेता ने कहा कि गांव के आदमी को अगर फायदा होगा तो उनकी बात सुनेंगे। हम तो पिछले 9 महीने से गांवों में सरकार को ढूंढ रहे हैं। सरकार जाए हमें कोई परेशानी नहीं है लेकिन जब गांव जाएं तो किसानों के लिए कुछ लेकर जाएं। सरकार के लोग सिर्फ गलत फीडिंग करते हैं। आंकड़ों की बाजीगरी करत हैं। किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करते हैं। किस किसान की आमदनी दो गुनी हुई है, उसका पता जरा हमें भी दिला दीजीए।

    टिकैत ने कहा कि किसानों की आमदनी दोगुनी कागजों में हो रही है। खेतों में आमदनी दोगुनी हुई हो तो बताइए। किसानों अब इनके बहकावे में आने वाला नहीं है। इस बार आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। किसानों की बात सरकार को सुननी ही पड़ेगी। किसानों के साथ संवाद के लिए मंत्रियों को गांवों में पहुंचने दीजीए। किसान अच्छे से इनका स्वागत करेगा।

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    टिकैत के मंसूबों पर पानी फेरने की कोशिश भाजपा इन किसान चौपालों के जरिए किसान आंदोलन के असर को टटोलने की भी कोशिश करेगी, ताकि इस असर को बेअसर करने की रणनीति बनाई जा सके। 16 से 25 अगस्त तक UP की 104 विधानसभा सीटों के तहत आने वाले गांवों में भाजपा का किसान मोर्चा चौपाल लगाएगा। मोर्चा केवल आयोजक है, लेकिन इसमें किसानों से सीधा संवाद का काम भाजपा के किसान नेता करेंगे।

    बड़ी पंचायत के बजाए खाट चबूतरों की चौपाल को मिलेगी तरजीह बड़ी चौपाल की जगह खाट और चबूतरों पर छोटी चौपाल को तरजीह दी जाएगी। इसकी वजह है कि पार्टी किसानों से सीधा संवाद करना चाहती है। उत्तर प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने किसान मोर्चा को यह सुझाव दिया है कि वह किसानों के छोटे-छोटे समूहों तक पहुंचे और सरकार तक उनकी बात पहुंचाए। किसानों की समस्याएं सुनने के साथ, किसानों के लिए UP सरकार द्वारा किए गए कामकाज का ब्यौरा दिया जाएगा।

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