मायावती व चंद्रशेखर को काउंटर करने की तैयारी में BJP, 40 विधानसभाओं में बेबी रानी मौर्य का करेगी इस्तेमाल
लखनऊ, 30 सितंबर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) और भीम आर्मी को काउंटर करने के लिए काउंटर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP)ने बेबीरानी मौर्या के रूप में नया दांव चला है। मौर्या दलित समुदाय से आती हैं और आगरा जोन के आसपास के इलाके में 40 विधानभा सीटें ऐसी हैं जहां जाटव का प्रभाव माना जाता है। बीजेपी की रणनीति इन जाटव एवं दलित बाहुल्य सीटों पर बेबीरानी के कद को इस्तेमाल करने की है। दरअसल बेबीरानी आगरा की मेयर भी रह चुकी हैं हाल ही में उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल पद स हटाकर बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। पार्टी सूत्रों की माने तो इसके बीच मायावती और चंद्रशेखर को काउंटर करने की प्लानिंग है। जिस तरह बीजेपी गैर यादव ओबीसी मतों में बीजेपी सेंध लगाने की कवायद में जुटी है उसी तरह अब उसकी निगाहें जाटव वोट बैंक पर भी है जिसके तहत बेबीरानी मौर्या को आगे किया जा रहा है।

दलितों की प्रमुख जाटव उपजाति से हैं बेबीरानी
बेबी रानी मौर्य ने 8 सितंबर को उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था, इसके बाद से ही ऐसी अटकलें थीं कि भाजपा उन्हें क्या नई जिम्मेदारी देगी। 20 सितंबर को, पार्टी ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों में मायावती और उनकी बसपा (बहुजन समाज पार्टी) को टक्कर देने के उद्देश्य से एक दलित नेता मौर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया। मायावती और मौर्य दोनों ही दलितों में प्रमुख जाटव उप-जाति से हैं। पार्टी की कोशिश है कि बेबीरानी के माध्यम से जाटव वोट में सेंध लगाई जाए।
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यूपी में 21 फीसदी दलितों में जाटव सबसे ज्यादा
दलित उत्तर प्रदेश की आबादी का लगभग 21 प्रतिशत हैं - उनमें से आधे जाटव समुदाय से हैं। आगरा में डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर रह चुके कबीर गौतम कहते हैं कि, "ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा ने मायावती के जाटव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए विधानसभा चुनावों में बेबी रानी मौर्य को मजबूती से पेश करने की रणनीति तैयार की है। पश्चिमी यूपी की 40 विधानसभा सीटों पर जाटव समुदाय की आबादी 20 फीसदी या उससे अधिक है। इन सीटों पर उनका इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि इस बात में संशय है कि क्या जाटव वोट मायावती के बजाए बीजेपी के साथ जाएगा लेकिन चंद्रशेखर के बाद अब बीजेपी की इस रणनीति से जाटव वोटों में बिखराव तो जरूर आएगा, जिसका लाभ बीजेपी को मिल सकता है।'

यूपी की 85 आरक्षित सीटों पर भी बीजेपी की नजर
यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 85 सीटें आरक्षित हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इनमें से 71 सीटें जीती थीं. मौर्य का 1995 से भाजपा से जुड़ाव रहा है। उस वर्ष, उन्होंने आगरा में महापौर पद के लिए भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और भारी अंतर से जीत हासिल की। वह 2000 तक इस पद पर रही आगरा की मेयर बनने वाली पहली महिला हैं। 2002 में, मौर्य राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बनीं। इसके बाद मौर्य ने समाज कल्याण बोर्ड के सदस्य के रूप में यूपी में दलित महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम किया।

2007 में एत्मादपुर विधानसभा सीट से हारीं थीं चुनाव
2007 के विधानसभा चुनाव में, मौर्य ने भाजपा के टिकट पर आगरा की एत्मादपुर विधानसभा सीट से बसपा के नारायण सिंह सुमन से हार गए। जुलाई 2018 में, मौर्य को 2017 में यूपी में भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का सदस्य बनाया गया था। उन्हें अगस्त 2018 में उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।

जेपी नड्डा के लखनऊ दौरे में लिखी गई बेबीरानी की सियासी पटकथा
इस महीने की शुरुआत में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के यूपी दौरे को दलित आधार को मजबूत करने और विशेष रूप से मायावती के जाटव वोट बैंक को मजबूत करने की पार्टी की योजना के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। 7 सितंबर को लखनऊ के अपने दौरे के दौरान चित्रकूट के जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जाटव ने प्रखंड प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों के सम्मेलन में नड्डा का स्वागत किया। उसी दिन भाजपा प्रदेश मुख्यालय में हुई बैठक में जाटव वोट बैंक को लेकर योजना बनाई गई।

मौर्य की भूमिका को लेकर धर्मेंद्र प्रधान की बैठक में भी हुई चर्चा
मौर्य की संभावित भूमिका पर 22 सितंबर को लखनऊ में यूपी के लिए भाजपा के विधानसभा चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की पहली बैठक में चर्चा की गई थी। रणनीति के तहत, मौर्य अक्टूबर-नवंबर में जाटवों के साथ-साथ अन्य दलित समुदायों को जुटाने के लिए कई बैठकें करेंगे। दिसंबर से राज्य के हर जिले में मौर्य की रैलियों की योजना है। भाजपा प्रदेश महासचिव प्रियंका रावत को बैठकों का समन्वयक नियुक्त किया गया है।

बसपा का दावा- बेबी रानी पर दांव बीजेपी को पड़ेगा महंगा
हालांकि बसपा इस घटनाक्रम से बेफिक्र है। पार्टी के एक पदाधिकारी का कहना है कि यूपी में मायावती का शासन दूसरों के लिए एक नजीर की तरह है। केंद्र और राज्य में भाजपा सरकारों ने दलितों के लिए कोई काम नहीं किया है। दलितों के खिलाफ सबसे अधिक अपराध यूपी में भाजपा शासन के दौरान हुए हैं। दलित उससे नाराज हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी बेबी रानी मौर्य पर दांव लगा रही है, लेकिन इसका उल्टा असर होने वाला है।












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