यूपी चुनाव: इसी महीने लखनऊ में किसान पंचायत करेगी भाजपा, करीब 100 सीटें साधने का मास्टरप्लान
लखनऊ, 10 अगस्त: किसान आंदोलन की काट में उत्तर प्रदेश भाजपा ने भी अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। पार्टी इसी महीने से राज्य के किसान मतदाताओं को साधने का अभियान शुरू करने जा रही है। लखनऊ में एक विशाल किसान पंचायत से पहले पार्टी के नेता किसान नेताओं से सीधा संपर्क करना शुरू कर देंगे और उन्हें किसानों के लिए केंद्र और प्रदेश भाजपा सरकार की नीतियों और उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। दरअसल, तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जिस तरह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के एक हिस्से का उसे नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है, पार्टी उसे दूर करना चाहती है। किसान संपर्क कार्यक्रमों के जरिए वह यह भी पता लगाना चाहती है कि जमीन पर उसके खिलाफ किसानों की यह नाराजगी कितनी गंभीर है और उसे किस तरह से ठीक किया जा सकता है।

लखनऊ में 22-25 अगस्त तक भाजपा की किसान पंचायत
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत बार-बार संकेत दे चुके हैं कि कृषि कानूनों का विरोध कर रहे यूपी के किसान आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा को सबक सिखाएंगे। उनके इसी चैलेंज की काट में प्रदेश बीजेपी ने किसानों से सीधा संवाद करने की योजना बना डाली है। भाजपा को पता है कि अगर वह चुनावों से पहले नाराज किसानों को मनाने में कामयाब नहीं रही तो कम से कम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसे बहुत ही ज्यादा मुश्किल आ सकती है। जानकारी के मुताबिक इसी संकट से उबरने के लिए बीजेपी अगले 22 अगस्त से लेकर 25 अगस्त तक राजधानी लखनऊ में एक विशाल किसान पंचायत आयोजित करने जा रही है। यही नहीं पार्टी 16 अगस्त से लेकर 23 अगस्त तक प्रदेश के गन्ना-बेल्ट में किसान संपर्क अभियान भी चलाएगी और किसानों के साथ सीधा संवाद करेगी।

गन्ना-बेल्ट के किसानों से संपर्क करेगी भाजपा किसान मोर्चा
यूपी में बीजेपी का यह किसान संपर्क अभियान बीजेपी किसान मोर्चा की ओर से आयोजित किया जाएगा और इस दौरान पार्टी के नेता गन्ना-बेल्ट के किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें बीजेपी सरकार की ओर से उनके लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। किसानों से पार्टी के इस संवाद कार्यक्रम की जिम्मेदारी खुद पार्टी के किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह संभालेंगे। इनके अलावा पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर किसान चौपाल आयोजित करने की भी योजना बना रही है।

यूपी की 100 सीटें साधने का है मास्टरप्लान
उत्तर प्रदेश में 2022 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी को इस बात का पूरा इल्म है कि अगर गन्ना-बेल्ट के लगभग 100 जाट बहुल सीटों पर उसने किसानों की नाराजगी दूर नहीं की या उनका सरकार के प्रति संदेह नहीं मिटाया तो चुनावों में दिक्कत आ सकती है। प्रदेश के किसानों से इस संपर्क अभियान में संजीव बालियान, भूपेंद्र चौधरी और लक्ष्मी नारायण चौधरी जैसे भाजपा नेता किसानों के बीच जाएंगे और उनकी नाराजगी दूर करने के साथ-साथ, बीजेपी सरकार की ओर से किसानों के हित में लिए गए फैसलों और उनके लिए शुरू की गई योजनाओं की जानकारी भी देंगे। बता दें कि ऐसा माना जाता है कि पिछले दो लोकसभा चुनावों और 2017 के विधानसभा चुनाव में इस इलाके के किसान मतदाताओं ने पार्टी का भरपूर समर्थन किया था। इसलिए पार्टी इनके साथ को किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाह रही है।

राकेश टिकैत ने दी है भाजपा को चुनौती
पिछले महीने की 26 जुलाई को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और दिल्ली-एनसीआर में चल रहे किसान आंदोलन के नेता राकेश टिकैत ने लखनऊ में आरोप लगाया था कि 'सरकार किसानों को सुनने के लिए तैयार नहीं है, वह तीनों कानून वापस लेने को तैयार नहीं है और ना ही वे एमएसपी पर कानून बनाना चाहते हैं। 'उन्होंने आरोप लगाया था कि बीते चार सालों में यूपी में गन्ना की कीमत नहीं बढ़ाई गई है, जिसके चलते किसानों की हालत ठीक नहीं है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि 'हम लखनऊ को दिल्ली में बदल देंगे.....किसानों के मुद्दे पर पूरे उत्तर प्रदेश में बैठकें होंगी। लोग जिस भाषा में समझते हैं, उन्हें उसी भाषा में समझाया जाएगा, अगर वह सिर्फ राजनीति की भाषा समझते हैं तो उन्हें सिर्फ उसी भाषा में समझाया जाएगा।' इसके जवाब में यूपी भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक विवादित कार्टून भी शेयर किया गया था, जिसमें इशारों में टिप्पणी की गई थी- 'ओ भाई जरा संभल कर जइयो लखनऊ में.....'(तस्वीरें-फाइल)












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