जिपं अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी का 'खेला', 21 सीटों पर निर्विरोध चुने गए, मुलायम के गढ़ में नहीं मिला प्रत्याशी

जिपं अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी का 'खेला', 21 सीटों पर निर्विरोध चुने गए, मुलायम के गढ़ में नहीं मिला प्रत्याशी

लखनऊ, जून 30: जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में यूपी के अंदर समाजवादी पार्टी भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीतकर नंबर वन बन गई। लेकिन अध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दबदबा बना है। भाजपा ने यूपी के 75 जिलों में से 21 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की है। हालांकि, मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा में जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार ही नहीं तलाश पाई। सपा अपना किला बचाने में सफल रही है। इटावा से मुलायम सिंह के भतीजे व सपा प्रत्याशी अभिषेक यादव उर्फ अंशुल यादव निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष घोषित किए गए हैं। बता दें, इनके खिलाफ किसी ने भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है। वहीं, बाकी बची 53 जिलों के लिए 3 जुलाई को मतदान और मतगणना होगी।

BJP on 21 seats of up zila panchayat chairman election SP candidate elected unopposed on one seat

नामांकन वापसी के दिन भाजपा ने किया 'खेला'
दरअलस, 29 जून को नामांकन वापसी के दिन भाजपा ने सपा-रालोद के उम्मीदवारों की नामांकन वापसी कराने में पूरी ताकत झोंक दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश सरकार के मंत्री, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, सांसद और विधायक सोमवार से ही इसमें जुटे हुए थे। मंगलवार दोपहर 12.30 बजे तक भाजपा ने सहानपुर, शाहजहांपुर, बहराइच और पीलीभीत में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार का नामांकन वापस कराने में सफलता हासिल की। सहारनपुर में भाजपा के मांगेराम चौधरी, शाहजहांपुर ममता यादव, पीलीभीत में दलजीत कौर और बहराइच में मंजू सिंह निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं।

बागपत के जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट तलब
उधर, बागपत में नामांकन वापसी को लेकर सपा और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भिड़ंत हुई। तनाव बढ़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ने बागपत में रालोद प्रत्याशी व जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीदवार ममता की शिकायत पर बागपत के जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट तलब की है। बागपत में रालोद की उम्मीदवार ममता ने आरोप लगाया कि किसी अन्य महिला ने उनके नाम से नामांकन वापस ले लिया है। जबकि वे इस समय राजस्थान में मौजूद है। ममता ने राजस्थान से अपना वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने नामांकन वापस नहीं लिया है।

इटावा सीट पर 32 सालों से कायम है सपा का वर्चस्व
सपा ने इटावा जिला पंचायत में निर्विरोध जीत दर्ज कर अपने 32 सालों से कायम वर्चस्व को बरकरार रखा है। साल 1987 में पहली बार इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष पर मुलासम परिवार ने जीत दर्ज की थी, उसके बाद से लगातार यह सीट सपा के कब्जे और परिवार के पास है। हालांकि, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने पिछले दिनों में इटावा जिला पंचायत पर पार्टी को जीत दिलाने और सपा के गढ़ में भगवा ध्वज लहराने का दावा किया था। लेकिन, इटावा में जीतना तो दूर की बात रही है बीजेपी तो उम्मीदवार तक भी नहीं उतार सकी।

इन जिलों में बीजेपी-सपा का होगा सीधा मुकाबला

मुजफ्फर नगर, शामली, बागपत, हापुड़, बिजनौर, रामपुर, संभल, बरेली, बदायूं, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरेया, कानपुर नगर, कानपुर देहात, जालौन, महोबा, हमीरपुर, कौशांबी, फतेहपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, लखनऊ, सीतापुर, अमेठी, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, अयोध्या, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र।

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