स्वामी बोले राम मंदिर मसले पर मुस्लिम मेरा सुझाव मानें नहीं तो बनाएंगे कानून
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि मुसलमानों को हमारा सुझाव मान लेना चाहिए अन्यथा हम 2018 में मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाएंगे।
नई दिल्ली। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राम मंदिर मुद्दे मुस्लिम समाज को सलाह दी है कि वह उनके सुझाव को स्वीकार कर ले। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को मेरा सुझाव मान लेना चाहिए अन्यता 2018 में जब भाजपा के पास राज्यसभा में बहुमत होगा तो राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनाया जाएगा। स्वामी के इस बयान के बाद मंदिर मुद्दे पर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है।

सुझाव नहीं माना तो बनाएंगे कानून
सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट की राम मंदिर पर की गई टिप्पणी के बाद सुझाव दिया था कि मुसलमानों को सरयू नदी के पार मस्जिद का निर्माण कराना चाहिए और राम मंदिर को राम जन्म भूमि पर बनने देना चाहिए। स्वामी ने कहा कि मेरे इस सुझाव को मुसलमानों को मान लेना चाहिए, अन्यथा 2018 में जब भाजपा के पास राज्यसभा में पूर्ण बहुमत होगा तो हम मंदिर बनवाने के लिए कानून बनाएंगे।

किसी की हिम्मत है कि अस्थाई राम मंदिर को तोड़ दे?
इसके अलावा स्वामी ने कहा कि रामजन्मभूमि के पास अस्थाई राम मंदिर पहले से ही बना हुए है, जिसकी अनुमती खुद सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में दी थी और यहां पूजा आज भी की जाती है, क्या किसी की हिम्मत है कि वह इस स्थल को तोड़ दे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि बेहतर होगा अगर हिंदू और मुस्लिम समाज अगर कोर्ट से बाहर इस मुद्दे को लेकर समझौता करें तो यह बेहतर होगा।

कोर्ट के बाहर समझौता मुमकिन नहीं
कोर्ट के फैसले के बाद दोनों ही पक्षों व राजनीतिक दलों की ओर से तमाम प्रतिक्रियाएं आना शुरु हो गई। एक तरफ जहां स्वामी ने मुसलमानों को सरयू पार मस्जिद बनवाने की सलाह दी तो दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवौसी ने कहा कि हम बिना कोर्ट के हस्तक्षेप इस मामले में समझौता करने के लिए तैयार नहीं है, वही जफरयार जिलानी का कहना है कि कोर्ट के बाहर इस मामले में समझौता नहीं हो सकता है, बिना सुप्रीम कोर्ट के जज के इस मामले में समझौता मुमकिन नहीं है।

हम मंदिर निर्माण के खिलाफ नहीं
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर मुस्लिम पैरोकारों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, मुस्लिम धर्मगुरु राशिद फिरंगी महली ने कहा कि हिंदुस्तानी मुसलमान कभी भी राम मंदिर के खिलाफ नहीं है, आज जो सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर टिप्पणी की है हम उसपर अपने वरिष्ठ लोगों से बात करेंगे और उसके बाद अपनी बात रखेंगे, वहीं एक अन्य मुस्लिम धर्मगुरु ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सौहार्य की अपनी जगह है, फैसला दोनों पक्षों के हक में हो तो बेहतर है, इमामों और पुजारियों को असल में बैठकर बात करनी चाहिए।












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