BJP Jiladhyaksh List: पीडीए पॉलिटिक्स को टक्कर देने की तैयारी, जानें 28 जिलों में क्यों हो रही देरी?
BJP Jiladhyaksh List 2025: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 70 जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी है, लेकिन 28 जिलों में अब भी सहमति नहीं बन पाई है। पार्टी के अंदर गुटबाजी और आंतरिक खींचतान के चलते यह प्रक्रिया अटकी हुई है। सांसदों और स्थानीय विधायकों के आपसी मतभेदों की वजह से जिलाध्यक्षों की सूची जारी करने में देरी हो रही है।
बीजेपी संगठन की इस विस्तार प्रक्रिया में कई जिलों में घमासान मचा हुआ है। पार्टी की कोशिश है कि हर जिले में ऐसा जिलाध्यक्ष बने, जो आगामी चुनावों में मजबूती से काम कर सके। लेकिन कई जिलों में दावेदारों की लंबी लिस्ट और गुटबाजी के कारण मामला उलझता जा रहा है।

यूपी के 98 जिलों में से 28 जिलों में जिलाध्यक्षों के नाम अब तक तय नहीं हो सके हैं। इनमें प्रमुख रूप से ये जिले शामिल हैं:
वाराणसी, चंदौली, अयोध्या महानगर, अयोध्या जिला, जौनपुर, कौशांबी, मीरजापुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, शामली, अमरोहा, सहारनपुर, मेरठ, हापुड़, बागपत, कानपुर, झांसी महानगर, हमीरपुर, जालौन, फतेहपुर, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, लखीमपुर, फिरोजाबाद, अलीगढ़ जिला और अलीगढ़ महानगर।
अंदरूनी खींचतान से अटकी सूची
समाजवादी पार्टी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) वोट बैंक को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में बीजेपी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रख रही है। लेकिन अंदरूनी खींचतान के चलते यह रणनीति अभी तक सफल नहीं हो सकी है, जिससे विपक्ष को बीजेपी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
बीजेपी नेतृत्व ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि बची हुई जिलाध्यक्षों की सूची कब जारी होगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता सांसदों और विधायकों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अगर मामला जल्द नहीं सुलझा तो केंद्रीय नेतृत्व को अंतिम निर्णय लेना पड़ सकता है।
इसलिए भी हो रही है देरी
बीजेपी नेतृत्व चाहता है कि जिलाध्यक्षों का चयन सर्वसम्मति से हो, जिससे संगठन में एकता बनी रहे। लेकिन कई जिलों में विधायक और सांसदों के बीच मतभेद इस प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं। यही वजह है कि जिलाध्यक्षों की दूसरी सूची जारी होने में देरी हो रही है।
बीजेपी के प्रदेश चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के संसदीय क्षेत्र चंदौली में अब तक जिलाध्यक्ष का नाम तय नहीं हो सका है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी तीन दावेदारों के कारण मामला अटका हुआ है। इसके अलावा अलीगढ़, हाथरस, एटा और पीलीभीत में भी जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर विवाद जारी है।
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