BJP in UP: राधामोहन सिंह के विकल्प की तलाश में जुटा आलाकमान, 80 फीसदी जिलाध्यक्षों को भी बदलने की तैयारी

यूपी बीजेपी में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। संगठन के सूत्रों की माने तो महासंपर्क अभियान के बाद कभी भी इसका ऐलान किया जा सकता है।

Bhartiya Janta Party: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले यूपी बीजेपी में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। बीजेपी के सूत्रों की माने तो एक तरफ जहां यूपी में 80 फीसदी जिलाध्यक्षों को बदलने की तैयारी चल रही है वहीं दूसरी ओर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व यूपी के मौजूदा प्रभारी राधा मोहन सिंह के विकल्प की तलाश में जुटा हुआ है। इसका ऐलान जल्द ही किया जा सकता है।

80 फीसदी जिलाध्यक्षों को बदले जाएंगे

बीजेपी के सूत्रों की माने तो भाजपा केंद्रीय नेतृत्व इस महीने यूपी के लिए एक नए प्रभारी का ऐलान कभी भी कर सकता है। पार्टी की राज्य इकाई ने लोकसभा चुनाव से पहले नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति करने का फैसला किया है। बीजेपी सूत्रों से पता चला है कि पार्टी के करीब 80 फीसदी मौजूदा जिला अध्यक्षों को बदला जाएगा।

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संगठनात्मक कार्यों में कुशल लोगों को मिलेगा मौका

बीजेपी ने संगठनात्मक तौर पर यूपी को छह क्षेत्रीय इकाइयों और 98 जिलों में बांटा है। यूपी बीजेपी प्रमुख भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने मार्च में राज्य पदाधिकारियों और छह क्षेत्रीय अध्यक्षों की 45 सदस्यीय टीम की घोषणा की थी। बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि, "संगठनात्मक कार्यों में अनुभव और पार्टी के कामकाज की समझ जिला अध्यक्षों के चयन का मुख्य पैमाना होगा।"

महासंपर्क अभियान के बाद हो सकता है ऐलान

पदाधिकारी ने बताया कि,

जिला इकाइयां ज़मीन पर पार्टी की गतिविधियों को चलाने के लिए प्रमुख होती हैं। वर्तमान में अधिकांश जिला अध्यक्ष अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। बल्कि, उनमें से कई चार से पांच साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। ऐसे में 80 फीसदी तक जिलों में अध्यक्ष बदले जाने की संभावना है। नए जिला अध्यक्षों का चयन शुरू हो गया है और उनके नामों की घोषणा 15 जुलाई को चल रहे मतदाता संपर्क अभियान 'महा जनसंपर्क अभियान' के समाप्त होने के बाद की जाएगी।

चार महीने पहले ही भूपेंद्र ने बनाई थी नई टीम

नेता ने कहा कि पार्टी ने लगभग चार महीने पहले जिला अध्यक्षों को बदलने की योजना बनाई थी, लेकिन अप्रैल-मई में हुए शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि जिला अध्यक्ष शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन और संगठनात्मक कार्यक्रमों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए पार्टी ने यह देखते हुए जिला स्तर पर मौजूदा नेतृत्व को जारी रखने का फैसला किया था।

जिलाध्यक्षों की घोषणा में देरी नहीं चाहती बीजेपी

सूत्र बताते हैं कि, "चूंकि निकाय चुनाव खत्म हो चुके हैं और पार्टी ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है, इसलिए जिला अध्यक्षों की घोषणा में किसी भी तरह की देरी से जिला कार्यकारी समितियों के गठन में और देरी होगी। पार्टी चाहती है कि नए जिला अध्यक्ष और उनकी टीमें लोकसभा चुनाव से कम से कम आठ महीने पहले जमीन पर काम करना शुरू कर दें।'

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